Thursday, 23 September 2021

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नैरोबी/पेइचिंग चीन की कर्ज देकर गुलाम बनाने वाली रणनीति को अफ्रीका में तगड़ा झटका लगा है। अफ्रीका के कई देशों ने चीन की परियोजनाओं को रद्द कर दिया है, जबकि कई दूसरे समीक्षा कर रहे हैं। चीन इन देशों को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए कर्ज देकर अपना आर्थिक गुलाम बनाने की कोशिशों में जुटा था। इतना ही नहीं, चीन अपनी घरेलू आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए अफ्रीकी देशों के संसाधनों का खूब दोहन भी कर रहा था। चीनी कंपनियां न केवल प्राकृतिक बल्कि मानव श्रम के जरिए भी अफ्रीका के दोहन में जुटी हुई थीं। चीनी कंपनियों के घटिया काम से खुश नहीं अफ्रीका सिंगापुर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियों का घटिया काम अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों में सत्तारूढ़ व्यवस्था के लिए तनाव का स्रोत बन गया है। इससे उबरने के लिए कई देश चीन के साथ किए गए सौदे की समीक्षा में जुटे हुए हैं। चीनी कंपनियां सौदे के नियमों को भी नहीं मान रही हैं। वे लगभग सभी प्रॉजेक्ट में या तो लापरवाही बरत रही हैं या फिर उनको लंबित छोड़ा हुआ है। घाना ने रद्द किया चीनी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट अफ्रीकी देश घाना ने हाल में ही बीजिंग एवरीवे ट्रैफिक एंड लाइटिंग टेक कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया है। यह कंपनी घाना में एक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम बनाने वाली थी। घाना सरकार ने अपनी जांच में पाया कि एवरीवे ट्रैफिक और लाइटनिंग टेक का काम किसी भी संतुष्टि के अनुरूप नहीं है। जिसके बाद उन्होंने पूरी डील को एक ही बार में रद्द करने का ऐलान कर दिया। कांगो भी चीनी सौदे की कर रहा समीक्षा इससे कुछ दिन पहले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) ने चीन के साथ लगभग 44 हाजर करोड़ की माइनिंग डील की समीक्षा शुरू करन का ऐलान किया था। कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदी ने कहा कि वह अपने देश के लिए उचित सौदे करना चाहते हैं। चीन की शोषणकारी प्रवृति ने नाराज राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जिनके साथ उनके देश ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, वे अमीर हो रहे हैं जबकि डीआरसी (कांगो) लोग गरीब बने हुए हैं। 2008 में, तत्कालीन कांगो राष्ट्रपति जोसेफ कबीला ने चीन की सरकारी कंपनी सिनोहाइड्रो कॉर्प और चाइना रेलवे ग्रुप के साथ करार किया था। केन्या ने 3.2 बिलियन डालर की डील रद्द की थी पिछले साल जुलाई में केन्या ने भी चीन को बड़ा झटका दिया था। केन्या की हाईकोर्ट ने स्टेंडर्ड गेज रेल लाइन के निर्माण की डील को रद्द करने का आदेश दिया था। चीन और केन्या के बीच इस डील की कुल कीमत 3.2 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास थी। कोर्ट ने पूरी परियोजना को ही अवैध करार दिया था। कोर्ट ने यह भी बताया था कि इस डील को लेकर केन्या की केन्या रेलवे स्टेंडर्ड गेज ने मानकों के अनुरूप काम नहीं किया है। अफ्रीकी देशों में भारी निवेश कर रहा चीन साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी की मार से परेशान थी, तब चीन ने अफ्रीका के कई देशों में 33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया था। चीन की चाल का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वह अफ्रीका में तेल, गैस और खनिज के उत्पादक देशों में ही कई परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। नाइजीरिया को सबसे ज्यादा दिया कर्ज पिछले साल चाइना डेवलपमेंट बैंक (CDB) और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने नाइजीरिया में अजोकुता-कडुना-कानो नेचुरल गैस पाइपलाइन प्रोजक्ट में कम से कम 3.1 बिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है। 2019 की अपेक्षा साल 2020 में चीन ने ऊर्जा परियोजनाओं में अपना निवेश कम से कम 43 फीसदी कम किया है। हालांकि, इसका कारण कोरोना वायरस महामारी को बताया जा रहा है। महामारी के कारण अफ्रीकी देश में प्रोजक्ट्स के काम ठप पड़ गए थे वहीं चीन को अपने भी देश में स्वास्थ्य पर खर्च करना था। इन अफ्रीकी देशों में चीन ने लगाया है पैसा चीन की चाइना डेवलपमेंट बैंक (सीडीबी) और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना (एक्जिम बैंक) आइवरी कोस्ट और रवांडा में हाइड्रो पावर स्टेशन और लेसोथो में सोलर फैसिलिटी के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। इन देशों के अलावा, चीन के इन दो सरकारी बैंकों ने बांग्लादेश, पाकिस्तान, कंबोडिया और सर्बिया में भी अरबों डॉलर के प्रोजक्ट को फाइनेंस किया हुआ है। इस राशि का बड़ा हिस्सा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वकांक्षी प्रोजक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के साथ जुड़ा हुआ है।


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