कैलिफोर्निया हीरे अपने आप में बेहद खास होते हैं और अब वैज्ञानिकों ने ऐसे हीरों की खोज की है जो तापमान बेहद कम होने पर अपना रंग बदल लेते हैं। ठंडे तापमान में ये ग्रे से पीले रंग के हो जाते हैं। 'गिरगिट' जैसे हीरों की खोज पहली की जा चुकी है जो अंधेरे में या गर्मी में रंग बदलते थे लेकिन ठंडक में रंग बदलने वाले हीरे पहली बार देखे गए हैं। ठंडक में बदला रंग यह खोज कैलिफोर्निया के जेमॉलजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ अमेरिका की स्टेफनी परसॉद ने की है। अभी तक यह साफ नहीं है कि इन हीरों की कीमत कितनी होगी लेकिन दुर्लभ होने के कारण ये काफी कीमती हैं। ये हीरे -196 डिग्री सेल्सियस जितने तापमान में रंग बदलते हैं। हीरों को लैब में इतना ठंडा इनका वाइब्रेशन कम करने के लिए किया जाता है। इनसे निकलने वाली रोशनी को सटीकता से नापने में कम तापमान मदद करता है। Chameleon या सबसे पहले 1866 में जॉर्जेस हाल्फेन ने खोजे थे। अभी तक यह नहीं समझा जा सका है कि ये रंग क्यों बदलते हैं। कई हीरे 200 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा के तापमान पर या 24 घंटे से ज्यादा अंधेरे में रखे जाने पर रंग बदलते पाए गए हैं। कैसे बदलते हैं रंग? अलग-अलग हालात में रंग बदलने के कारण माना जाता है कि इसके पीछे के कारण और प्रक्रिया भी अलग होती है। ये इतने दुर्लभ होते हैं कि इन्हें स्टडी करना भी मुश्किल होता है। इसलिए नई खोज और भी अहम हो जाती है। GIA के पॉल जॉनसन का मानना है कि ठंडा करने पर हीरे का रंग इसलिए बदलता है क्योंकि इलेक्ट्रिक चार्ज हीरे में मौजूद मिलावटी कणों के करीब आता है या दूर जाता है। ऐसे में इसका रंग बदलता है। कुछ वक्त पहले ही रूस में एक हीरा दूसरे हीरे के अंदर मिला था। माना गया है कि यह 80 करोड़ साल पुराना हीरा था। रूस की लकड़ी से बनीं गुड़ियों से मेल खाने के चलते इसे Matryoshka हीरा कहा गया है। एक्सपर्ट्स अभी समझ नहीं पाए हैं कि ये हीरा कैसे बना लेकिन माना गया कि यह ऐसी पहली खोज है।
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