पेइचिंग सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख के फारवर्ड इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि फारवर्ड इलाकों चीनी सेना ने अपनी तैनाती को बढ़ाया है जो कि भारत के लिए चिंता की बात है। सेना प्रमुख की चिंता बिल्कुल जायज है। विस्तारवादी चीन की नजर हर वक्त अपनी पड़ोसी देशों की जमीन पर कब्जे की रहती है। एक सैटेलाइट तस्वीर में देखा जा सकता है कि चीन अपने कब्जे वाले भारतीय इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया है। चीन ने बनाए स्थायी कैंपसैटेलाइट तस्वीर में अक्साई चिन इलाके में चीन के निर्माण को चिन्हित किया गया है। चीन ने सीमा के पास सेना के कैंप बनाए हैं। समय-समय पर रिपोर्ट्स दावा करती आई हैं कि इनमें से कई कैंप स्थायी हैं जो कंक्रीट से बनाए गए हैं जहां पीएलए के जवान मौजूद हैं। इस इलाके में चीन ने ऐसे निवास भी बनाए हैं जिनक मौसम की विषम परिस्थितियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसमें गलवान घाटी भी शामिल है जो पिछले साल से दोनों देशों के बीच विवाद की वजह बनी हुई है। अवैध इलाके में चीन का सैन्य शहरइसके अलावा कई साइट्स पर काम अभी भी चल रहा है। इलाके में सड़कों को भी साफतौर पर देखा जा सकता है। स्पष्ट है कि चीन ने एक ऐसे इलाके में पूरा 'सैन्य शहर' बसा दिया है जिस पर उसका अवैध कब्जा है। चीन का कब्जा सिर्फ पूर्वी लद्दाख तक ही सीमित नहीं है। धीरे-धीरे वह सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सीमाओं पर भी गांवों को बसाने और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। जिसका खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से होता रहता है। सीमा पर बना हुआ है तनावपिछले साल चीन और भारत के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। बाद में खुलासा हुआ था कि चीन के भी कई सैनिक इसमें मारे गए थे। चीन ने इस झड़प के साथ दशकों पुराने हथियार न इस्तेमाल करने के संयुक्त वादे को तोड़ दिया था। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं लंबे समय तक स्टैंडऑफ पर रहीं। कई दौर की वार्ता और सेनाओं के पीछे हटने के बाद भी सीमा पर तनाव बना हुआ है।
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