Sunday, 10 October 2021

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इस्लामाबाद बात है 80 के दशक की जब भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच परमाणु शक्ति बनने की रेस लगी हुई थी। भारत को यह पता नहीं था कि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है या नहीं। 1987 में भारत को इस बारे में पुख्ता जानकारी मिली और यह अत्यधिक खुफिया सूचना खुद पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक और 'न्यूक्लियर बम के पिता' कहे जाने वाले ए क्यू खान ने दी। जरा सोचिए, जिस वैज्ञानिक के कंधों पर देश के परमाणु कार्यक्रम का भार था उसने अपने सबसे बड़े दुश्मन को बड़े आसानी से इसकी सूचना कैसे दे दी। आज डॉ अब्दुल कादिर खान की बात इसलिए हो रही है क्योंकि 85 साल की उम्र में उनका आज निधन हो गया है। उन्हें पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का पिता और बनाने के लिए 'हीरो' जैसी तमाम उपमाओं से पुकारा जाता है। लेकिन इस 'हीरो' ने बड़ी आसानी से देश का सबसे बड़ा राज भारतीय पत्रकार कुलदीप नैयर के सामने उगल दिया था। एक पत्रकार के रूप में कुलदीप नैयर का अपना ही अंदाज था। उन्होंने ही 1977 में कांग्रेस नेता कमलनाथ के हवाले से सबसे पहले यह खबर दी थी कि भारत में इमरजेंसी खत्म होने वाली है। इंटरव्यू से पहले रखी शर्त'पाकिस्तान के हीरो' खान भी नैयर के सवालों के सामने टिक नहीं पाए। अपनी आत्मकथा Beyond The Lines में कुलदीप नैयर ने उस घटना का खुलासा करते हुए कहा कि सवालों में फंसकर खान ने सच उगल दिया था। सबसे अहम बात, खान ने नैयर को बताया कि पाकिस्तान को बम की टेस्टिंग करने के लिए न्यूक्लियर धमाका करने की कोई जरूरत नहीं है। बल्कि पाकिस्तान ने लैब में ही बम की टेस्टिंग कर ली है। खान ने नैयर को इंटरव्यू देने से पहले यह शर्त रखी कि वह न ही पेन का इस्तेमाल करेंगे और न उनकी आवाज को रेकॉर्ड करेंगे। उन्हें बता दीजिए, हमारे पास है परमाणु बमनैयर ने खान को बताया कि पाकिस्तान आने से पहले वह डॉ होमी सेथना से मिले थे, जिन्हें भारत के परमाणु बम का पिता माना जाता है। उन्होंने कहा कि सेथना ने उनसे पूछा कि कुलदीप क्यों पाकिस्तान जाकर खान से मिलने में अपना समय बर्बाद कर रहे हो? पाकिस्तान के पास परमाणु बम जैसे हथियार बनाने के लिए न ही संसाधन हैं और न सामग्री। नैयर की बात सुनकर खान बिफर गए और भड़के उठे। खान ने ऊंची आवाज में गुस्से से कहा, 'उन्हें जाकर बता दीजिए कि हमारे पास है, हमारे पास है'। लैब में हो चुकी है बम की टेस्टिंगखान ने इंटरव्यू में यहां तक दावा किया कि पाकिस्तान का परमाणु बम भारत से बड़ा है जिसका परीक्षण 18 मई 1974 को राजस्थान में किया गया था। खान के दावे सुनकर नैयर ने अपना उत्साह छिपाया और कहा कि इस तरह के दावे तो कोई भी कर सकता है लेकिन इनका आधार क्या है? खान ने कहा कि पाकिस्तान बम को लैब में टेस्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि बम की ताकत जानने के लिए हमें इसे विस्फोट करने की जरूरत नहीं है। लैब में मौजूद उपकरणों की मदद से हम विस्फोट के पैमाने को देख सकते हैं। हम अपने नतीजों से बेहद संतुष्ट हैं। भारत के तुरंत बाद किया परमाणु बम का परीक्षणपाकिस्तान ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 1998 में किया था। पोखरण में भारत के दूसरे परमाणु परीक्षण के ठीक बाद में। खान से जब आगे पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अमेरिकी धमकियों का हवाला देते हुए इस पर बात करने से इनकार कर दिया। अपनी किताब में नैयर ने याद किया कि खान ने बिल्कुल भी यह जाहिर करने की कोशिश नहीं की कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य 'शांति' है। उन्होंने कहा कि परमाणु कार्यक्रम के साथ 'शांति' शब्द सिर्फ दिखावा है। 'शांतिपूर्ण बम' जैसी कोई चीज नहीं होती। इस्लामाबाद डेली के संपादक के माध्यम से कुलदीप नैयर और एक्यू खान की 1987 में मुलाकात हुई थी।


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