Thursday, 7 October 2021

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कैंब्रिज धरती के ध्रुवों पर आसमान को रंगीन होता देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। यह नजारा देखने में तो दिलकश होता है लेकिन क्या इस दौरान कुछ खास आवाजें भी आती हैं? इस बात पर वैज्ञानिक असहमत रहे हैं लेकिन साल 2016 में फिनलैंड में की गई एक स्टडी में दावा किया गया है कि या ऑरोरा के दौरान ऐसी आवाजें निकलती हैं जो इंसान को सुनाई दे सकती हैं। एक रिसर्चर ने रिकॉर्डिंग भी बनाई है जिसमें यह आवाज सुनने का दावा किया गया है। अभी यह नहीं साफ है कि ऐसा मुमकिन कैसे है? 20वीं शताब्दी से चर्चा द कन्वर्जेशन के मुताबिक रिसर्चर फियोना ऐमरी ने अपनी रिसर्च में इस आवाज का पता लगाने की कोशिश की है। उनके मुताबिक 20वीं शताब्दी में इसे लेकर काफी चर्चा रहा करती थी जब उन इलाकों में रहने वाले लोग रोशनी के साथ आवाज सुनने का दावा करते थे। कुछ लोग इसे अजीब सा बताते भी थे। खासकर तब जब रोशनी ज्यादा तेज और सक्रिय होती थी। कुछ लोग इसे रेशन जैसा तो कभी लकड़ी के रगड़ने जैसा बताते थे। धरती के पास आती हैं आवाजें ऐसी ही खबरें कनाडा और नॉर्वे से आती थीं। कहा जाता था कि जो रोशनी कम ऊंचाई पर रहती थी, उससे आवाज सुनने की ज्यादा संभावना रहती थी। वहीं, साल 1932-1933 के बीच ऑरोरा ज्यादातर धरती से 100 किमी ऊपर रहे और बहुत ही कम 80 किमी तक आए। ऐसे में यह नामुमकिन समझा गया कि धरती की तरह तक रोशनी से ऐसी आवाज ट्रांसमिट हो सके जिसे सुना जा सके। इस वजह से ज्यादातर वैज्ञानिक इस पर शक करते रहे। यही कहा जाता रहा कि यह लोगों के मन का भ्रम है। वैज्ञानिक ने किया दावा मशहूर वैज्ञानिक कार्ल स्टॉर्मर ने अपने दो असिस्टेंट्स के हवाले से इन आवाजों को सुने जाने का दावा किया। इसके बाद इसे गंभीरता से लिया जाने लगा। उनके असिस्टेंट हांस का कहना था कि उन्हें सीटी जैसी आवाज सुनाई दी जो ऑरोरा के साथ चल रही थी। वहीं, दूसरे असिस्टेंट जॉन ने जलती हुई घास या स्प्रे जैसी आवाज सुनी। हालांकि, बावजूद इसके यह साफ नहीं हो सका कि इस रोशनी से आवाज निकल कैसे सकती है। क्या हो सकती है वजह? कुछ हद तक इसका जवाब मिल सकता है कनाडा के ऐस्ट्रॉनमर क्लैरेंस चांट की थिअरी में। उनके मुताबिक ऑरोरा धरती के चुंबकीय क्षेत्र में ऐसे बदलाव करता है जिससे वायुमंडल में विद्युतिकरण होता है और धरती के पास इसकी आवाज सुनाई देती है। यह आवाज किसी ऑब्जेक्ट, जैसे कपड़ों या चश्मे या पेड़ों से टकराने पर पैदा हो सकती है। हालांकि, उनकी थिअरी को शुरुआत में किसी ने सही नहीं माना लेकिन 1970 के दशक में इसे पहचान मिली।


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