Friday, 8 October 2021

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वॉशिंगटन मंगल ग्रह पर कभी विशाल झीलें हुआ करती थीं लेकिन एक समय में यह सूख गईं। मंगल ग्रह की झीलें कैसे सूखीं, इसके बारे में वैज्ञानिक लंबे समय से पता लगाने में जुटे हैं। अब नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने लाल ग्रह की कुछ नई तस्‍वीरें भेजी हैं जिससे वैज्ञानिक अब अरबों साल पहले की घटना के बारे में पता लगा सकेंगे। नासा का रोवर अभी जेजेरो क्रेटर में है जो करीब 3.7 अरब साल पहले एक झील थी। ताजा तस्‍वीरों से पता चला है कि जेजेरो क्रेटर में एक छोटी नदी आकर मिलती थी और कई बार तो अचानक से बाढ़ आ जाती थी। यह नदी अपने साथ कई बार विशाल पत्‍थर भी बहाकर लाती थी जो झील में गिर जाते थे। तस्‍वीरों से पता चला है कि ये विशाल पत्‍थर अरबों साल बीत जाने के बाद भी अभी भी झील के अंदर बने हुए हैं। यह ताजा खोज साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है। माना जा रहा है कि रोवर की तस्‍वीरों का पहली बार यह वैज्ञानिक विश्‍लेषण हुआ है जिसमें झील के ऊपर पड़े पत्‍थरों के बारे में बताया गया है। मंगल ग्रह पर नदी डेल्‍टा मौजूद इस ताजा जानकारी से पता चलता है कि नासा का मंगल ग्रह पर रोवर भेजना कितना फायदेमंद रहा। इससे पहले ऑर्बिटर ने अपनी तस्‍वीरों में दिखाया था कि ये बाहर निकले हुए पत्‍थर कुछ उसी तरह से हैं जैसे धरती पर नदी के डेल्‍टा के अंदर पाए जाते हैं। नासा के रोवर की इन ताजा तस्‍वीरों से निश्चित सबूत मिल गया है कि मंगल ग्रह पर नदी डेल्‍टा मौजूद है। अमेरिकी वैज्ञानिक एमी विलियम्‍स कहते हैं कि मंगल पर जल चक्र को समझने में इन तस्‍वीरों से हमें काफी मदद मिली है। नासा का यह पर्सिवियरेंस मिशन Jezero Crater में उतरा है। क्रेटर के बीच में कहीं पहाड़ी ऊंचाई है तो कहीं चट्टानी मैदान, कहीं रेत के पहाड़ और गड्ढे की ऊंची दीवारें भी हैं। यह क्रेटर 28 मील चौड़ा है और यह Isidis Planitia नाम के मैदानी इलाके के पश्चिमी छोर पर है। यह मंगल के ईक्वेटर से उत्तर में हैं। माना जाता है कि Isidis Planitia में एक प्राचीन उल्कापिंड आ गिरा था जिससे 750 मील का गड्ढा बन गया था। बाद में एक छोटा उल्कापिंड यहां गिरा और Jezero Crater बन गया। बाद में इसमें पानी भर गया और सूखा पड़ा डेल्टा जीवन के लिए अनुकूल हो गया। यहां से 2300 मील दूर Gale Crater पर नासा के Curiosity रोवर ने लैंडिंग की थी। कभी पानी से भरा हुआ करता था Jezero वैज्ञानिकों का मानना है कि Jezero कभी पानी से भरा हुआ करता था और यहां किसी प्राचीन नदी का डेल्टा था। 3.5 अरब साल पहले नदियों के पानी से ये झील बनी थी। वैज्ञानिकों ने ऐसे सबूत हासिल किए हैं जिनसे पता चलता है कि ये पानी आसपास के इलाके से मिनरल झील में लेकर आता था। हो सकता है कि इस दौरान वहां सूक्ष्मजीवी रहे हों। अगर ऐसा हुआ होगा तो झील के तल में या तट के सेडिमेंट में इसके निशान मिल सकेंगे।


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