Saturday, 9 October 2021

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इस्लामाबाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद का बीते दिनों सेना ने तबादला कर दिया। इस फैसले ने सभी को चौंका दिया क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन में उन्होंने अहम और सफल भूमिका निभाई थी। फैज हमीद को अब पेशावर कोर का कमांडर बनाया गया है। आईएसआई की कमान अब लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम के हाथ में है। पाकिस्‍तान में खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री की ओर से की जाती है। परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री पाकिस्तान के सेना प्रमुख की सलाह से इस शक्ति को उपयोग करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस फैसले से खुश नहीं हैं। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना से कहा कि वह आईएसआई प्रमुख को बदलने के फैसले के साथ नहीं थे। इमरान खान का मानना है कि लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की पेशावर कोर कमांडर के रूप में पोस्टिंग और जनरल नदीम अंजुम की नई डीजी आईएसआई के रूप में नियुक्ति की घोषणा प्रधान मंत्री आवास से आनी चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान के संविधान के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को इसका अधिकार हासिल है। इस्लामाबाद के बजाय रावलपिंडी से आई विज्ञप्तिसेठी ने खुलासा किया कि नई नियुक्तियों की घोषणा करने वाली प्रेस विज्ञप्ति रावलपिंडी से आई न कि इस्लामाबाद से। उन्होंने कहा कि सूत्रों का कहना है कि इस मामले पर इमरान खान के रुख से तनाव पैदा हो गया था। इसी वजह से नियुक्तियों की अधिसूचना पर साइन नहीं किया गया है। आईएसपीआर ने तबादलों की घोषणा कर दी लेकिन पीएम हाउस की ओर इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई और यह देरी असामान्य थी। अब यह सामने आया है कि इस फैसले से पैदा हो गया है। तबादले के बाद भी मीटिंग में पहुंचे फैज हमीदनजम सेठी का दावा है कि स्थिति को काबू में करने के लिए शुक्रवार रात से ही बैठकें हो रही हैं लेकिन इमरान खान जिद पर अड़े हुए हैं। इमरान खान की ओर से बुलाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद की उपस्थिति भी असामान्य थी। बैठक में उन्हें देखकर लोगों को हैरानी इसलिए हुई क्योंकि उनके तबादले के आदेश जारी किए गए हैं लेकिन उन्होंने डीजी आईएसआई के रूप में मीटिंग में हिस्सा लिया। पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि इस तरह का तनाव अक्सर सेना और सरकार को ऐसे रास्ते पर ले जाता है जहां से वापसी संभव नहीं होती। क्या काबुल यात्रा की चुकाई कीमतउन्होंने कहा कि आईएसपीएस और पीएस हाउस दोनों ही खामोश हैं। तनाव को कम करने के लिए कुछ कैबिनेट के सदस्य भी बीच में आए हैं लेकिन फिलहाल कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। फैज हामिद और प्रधानमंत्री इमरान खान के काफी अच्छे संबंध हैं। कुछ रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि इमरान हमीद को अगले साल सेना प्रमुख बना सकते थे। कहा जा रहा है कि बिना किसी को जानकारी दिए काबुल यात्रा और तालिबान से दोस्ती के चलते सेना प्रमुख बाजवा हमीद से नाराज थे और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी। कौन हैं नए आईएसआई चीफनए आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम पाकिस्तानी सेना की पंजाब रेजिमेंट से हैं और वह कराची कोर कमांडर के साथ ही कमांड एंड स्टाफ कॉलेज क्वेटा के कमांडेंट के रूप में भी काम कर चुके हैं। अंजुम ने पाकिस्‍तान के अशांत बलूचिस्‍तान प्रांत में कई अभियान चलाए हैं। कहा जाता है कि नदीम को युद्ध का काफी अनुभव है। इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल नदीम पाकिस्‍तान के फ्रंटियर कोर बलूचिस्‍तान के महानिदेशक रह चुके हैं। सेना के हाथ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की किस्मतनदीम के अधीनस्‍थ अधिकारी उन्‍हें तेज दिमाग वाला और काम में व्‍यस्‍त रहने वाला मानते हैं। आईएसआई के नए चीफ अच्‍छे श्रोता हैं और बहुत कम बोलते हैं। यही नहीं नदीम भारत से लगी एलओसी पर भी कमांड कर चुके हैं। पाकिस्तान में सरकार बनने में सेना की अहम भूमिका रहती हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे से साफ हो गया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री से ज्यादा सेना का नियुक्तियों में दखल रहता है। मौजूदा सेना प्रमुख बाजवा का कार्यकाल 2022 में खत्म होने वाला है। अगर मौजूदा तनाव के बीच इमरान खान अपनी कुर्सी बचा ले जाते हैं तो भी पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री की किस्मत अगले सेना प्रमुख के हाथ में होगी।


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