यरूशलम सीखने और पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। 85 साल की जिहाद भुट्टो ने यह सच कर दिखाया है। फिलिस्तीन की रहने वाली जिहाद भुट्टो ने इजरायल के कफ्र बारा से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने यह डिग्री 85 साल की उम्र में हासिल की है जिससे उनके बच्चे और पोते-पोतियां काफी खुश हैं। अपनी इस उपलब्धि से भुट्टो काफी खुश हैं क्योंकि बचपन में ही उन्हें 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। भुट्टो ने 1948 में स्कूल छोड़ दिया था, जिसके बाद 81 साल की उम्र में उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया। भुट्टो ने कफ्र बारा सेंटर फॉर इस्लामिक स्ट्डीज में भाषा, धर्म और गणित की पढ़ाई की है। अपनी 85 साल की विशेष छात्रा को डिग्री देते हुए सेंटर भी बेहद खुश था। जिहाद भुट्टो ने कहा कि सेंटर में सभी जानते हैं कि मुझे पढ़ना कितना पसंद है। मैं कोर्स के अलावा सिर्फ दूसरी किताबें पढ़ती थी। फिर किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे दाखिला लेना है? इस पर मैंने तुरंत हां बोल दिया। महिलाओं के लिए बनीं मिसालभुट्टो सात बच्चों की मां हैं और पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद लोगों ने सेंटर के डीन से पूछा कि क्या दूसरे छात्र भुट्टो की मदद करते थे? डीन ने कहा कि खुद भुट्टो अलग-अलग विषयों पर छात्रों की मदद करती थीं। भुट्टो लगातार शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं और महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरुक कर रही हैं। इजरायल का कफ्र बारा एक परिषद है जो अरब बहुल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में स्थित है। शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहीं महिलाएंमिडिल ईस्ट के कई देशों में आज भी महिलाओं के शिक्षा हासिल करने पर कई तरह की पाबंदियां हैं। अब इनमें अफगानिस्तान का नाम भी शामिल हो चुका है जहां तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा पर अपने नियम थोप दिए हैं। तालिबान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा है कि महिलाएं स्नातकोत्तर स्तर सहित सभी स्तर के विश्वविद्यालयों में पढ़ सकती हैं लेकिन कक्षाएं लैंगिक आधार पर विभाजित होनी चाहिए। तालिबान मंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए इस्लामी पोशाक पहनना अनिवार्य होगा।
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