Friday, 8 October 2021

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वॉशिंगटन चीन के नजदीक साउथ चाइना सी में गश्त लगा रही अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी किसी अज्ञात चीज से टकरा गई। इस हादसे में पनडुब्बी पर सवार 11 अमेरिकी नौसैनिक घायल हो गए। इस टक्कर ने दुनिया को यह भी बात बता दी कि अमेरिका और चीन के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है। अगर ऐसा नहीं होता तो अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी चीन के इतनी नजदीक गश्त नहीं करती। अमेरिकी नौसेना ने यह भी बताया है कि इस दुर्घटना में घायल हुए नौसैनिकों की जान को कोई खतरा नहीं है और पनडुब्बी का परमाणु रिएक्टर भी पूरी तरह से सुरक्षित है। 2 अक्टूबर को दक्षिण चीन सागर में हुई थी टक्कर दो अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद यूएसएस कनेक्टिकट पनडुब्बी सुरक्षित रूप से अमेरिकी नौसेना के 7वीं फ्लीट के एक बंदरगाह पर भी मरम्मत के लिए पहुंच गई है। अमेरिकी नौसेना की 7वीं फ्लीट का मुख्यालय जापान में है। बताया यह भी जा रहा है कि इस पनडुब्बी को प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी नेवल बेस गुआम भी भेजा जा सकता है। अमेरिकी नौसेना ने भी इस दुर्घटना को लेकर बयान जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि यूएसएस कनेक्टिकट 2 अक्टूबर की दोपहर को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जल में संचालन के दौरान पानी में डूबे एक वस्तु से टकरा गई। कितनी खतरनाक है यूएसएस कनेक्टिकट? यूएसएस कनेक्टिकट अमेरिकी नौसेना के सीवॉल्फ क्लास की न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी है। इस पनडुब्बी पर 15 ऑफिसर्स के साथ 101 नौसैनिक तैनात रहते हैं। 107.5 मीटर लंबी 7,568 टन वजनी यह पनडुब्बी कई तरह की घातक मिसाइल और तारपीडो से लैस है। इस पनडुब्बी में आठ की संख्या में 28 इंच के तारपीडो ट्यूब दिए गए हैं। इसके अलावा इस पनडुब्बी पर 40 की संख्या में तारपीडो और मिसाइलों को रखा जा सकता है। यूएसएस कनेक्टिकट समुद्र में बारूदी सुरंग को भी बिछाने में माहिर है। इस पनडुब्बी पर 100 से ज्यादा नेवल माइन रखा जा सकता है। यूएसएस कनेक्टिकट का इतिहास क्या है? 1776 से यूएसएस कनेक्टिकट अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य के नाम पर नामित होने वाला पांचवा नेवल वेसल है। इस पनडुब्बी को बनाने का काम 3 मई 1991 को कनेक्टिकट के ग्रोटन में जनरल डायनेमिक्स कॉर्पोरेशन के इलेक्ट्रिक बोट डिवीजन को दिया गया था। इस पनडुब्बी को अमेरिकी नौसेना में औपचारिक रूप से 11 दिसंबर 1998 को कमीशन किया गया था। यूएसएस कनेक्टिकट पर आर्कटिक में ध्रुवीय भालू ने किया था हमला सितंबर 1999 में यूएसएस कनेक्टिकट को इलेक्ट्रिक बोट शिपयार्ड पर पोस्ट-शेकडाउन अवलबिलिटी के लिए तैनात किया गया। इस दौरान यूएसएस कनेक्टिकट के कई दूसरे सी ट्रायल भी किए गए। अप्रैल 2003 में यूएसएस कनेक्टिकट को वाशिंगटन विश्वविद्यालय के एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी आइस स्टेशन (एपीएलआईएस) में आर्कटिक की बर्फ की सतह के ऊपर निकाला गया था। वहां पर तैनाती के दौरानयूएसएस कनेक्टिकट पर एक पोलर बीयर (ध्रुवीय भालू) ने हमला किया था। जिसने इस पनडुब्बी के पिछले हिस्से को काफी नुकसान भी पहुंचाया था। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध और आर्कटिक में भी तैनाती 31 मार्च 2004 को कनेक्टिकट ने वास्प एक्सपेडिशनरी स्ट्राइक ग्रुप (ईएसजी) के हिस्से के रूप में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध वाले मिशन पर भेजा गया। इसी साल 2 सितंबर से लेकर 2007 तक इस परमाणु पनडुब्बी को मेंटिनेंस के लिए पोर्ट पर रखा गया। 2007 की शुरुआत में यूएसएस कनेक्टिकट को छह महीने के लिए समुद्री ट्रायल पर भेजा गया। जिसके बाद 25 जुलाई 2007 को वाशिंगटन के पुगेट साउंड में नेवल बेस किट्सैप-ब्रेमर्टन में तैनात किया गया। 2011 की शुरुआत में इस पनडुब्बी को दोबारा आर्कटिक क्षेत्र में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जहां इसने ICEX 2011 नाम के युद्धाभ्यास में हिस्सा भी लिया। ओवरहॉल के बाद प्रशांत महासागर भेजा गया था कनेक्टिकट को 2012 से 2017 तक ओवरहॉल किया गया। जिसके बाद 2018 में इसे फिर से आर्कटिक क्षेत्र में सक्रिय किया गया। 2019 में कनेक्टिकट पनडुब्बी को पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तैनात किया गया। इस क्षेत्र में यूएसएस कनेक्टिकट ने कई युद्धाभ्यासों में हिस्सा लिया। इसे मुख्य तौर पर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गश्त के लिए तैनात किया गया था। दक्षिण चीन सागर भी प्रशांत महासागर के पूर्वी क्षेत्र का हिस्सा है। यूएसएस कनेक्टिकट इस क्षेत्र में गुप्त मिशन पर आई थी, जब उसकी टक्कर किसी अज्ञात वस्तु से हो गई।


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