Thursday, 21 October 2021

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बीजिंग लद्दाख से लेकर दक्षिण चीन सागर तक दादागिरी दिखा रहे चीन ने दूसरी बार अंतरिक्ष से तबाही मचाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक चीन की यह महाविनाशक मिसाइल परमाणु बम गिराने में सक्षम है। यही नहीं यह मिसाइल धरती पर मौजूद किसी एयर डिफेंस सिस्‍टम को गच्‍चा देने में सक्षम है। इस तरह चीनी मिसाइल को किसी भी तरीके से रोका नहीं जा सकता है। अभी यह क्षमता अमेरिका जैसी सुपर पावर के पास भी नहीं है। बताया जा रहा है कि चीन ने यह नया मिसाइल परीक्षण 13 अगस्‍त को किया था। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दूसरे परीक्षण में भी चीन ने 'हाइपरसोनिक ग्‍लाइड वीइकल' का इस्‍तेमाल किया। इसे चीन ने लॉन्‍ग मार्च रॉकेट से जुलाई में अंतरिक्ष में भेजा था। इस मिसाइल ने धरती का चक्‍कर लगाया और फिर तयशुदा स्‍थान पर ध्‍वनि की गुना ज्‍यादा रफ्तार से हमला किया। चीन ने माना है कि उसने एक परीक्षण किया है लेकिन उसका दावा है कि यह 'शांतिपूर्ण' सिविलियन स्‍पेसक्राफ्ट है। 'चीनी मिसाइल ने फिज‍िक्‍स के नियमों को बदल दिया' उधर, विशेषज्ञ चीन के परीक्षण से दहशत में हैं और उनका मानना है कि इस स्‍पेसक्राफ्ट में एक परमाणु बम लगाया जा सकता है जो मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को भी गच्‍चा देने में सक्षम है। यहां तक कि सरकारी वैज्ञानिक भी यह पता लगाने के लिए जूझ रहे हैं कि चीनी अंतरिक्ष विमान की क्षमता क्‍या है। एक सूत्र ने फाइनेंशल टाइम्‍स से बातचीत में कहा कि इस मिसाइल ने 'फिज‍िक्‍स के नियमों को बदल दिया है।' इस तरह की तकनीक अमेरिका के पास भी नहीं है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति कार्यालय वाइट हाउस ने इस पूरे मामले में कॉमेंट करने से मना कर दिया है जबकि अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि करने से मना कर दिया है। इससे पहले खुलासा हुआ था कि मध्‍य अगस्‍त में चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइल का अंतरिक्ष से परीक्षण किया है। चीन ने इसकी सही डेट नहीं बताई थी। अब खुलासा हुआ है कि चीन ने पहला परीक्षण 27 जुलाई को किया था और दूसरा 13 अगस्‍त को किया था। विश्‍लेषकों का कहना है कि चीन का यह नया हथियार कोल्‍ड वार के दौरान का 'Fractional Orbital Bombardment System' है। चीनी मिसाइल को डिटेक्‍ट और बर्बाद करना बहुत ही मुश्किल सोवियत संघ की बनाई इस तकनीक में परमाणु बम को धरती की निचली कक्षा में स्‍थापित कर दिया जाता है और उसे धरती का चक्‍कर लगाने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद यह मिसाइल अपने लक्ष्‍य पर गिरती है। इसकी जोरदार स्‍पीड की वजह से उसे डिटेक्‍ट और बर्बाद करना बहुत ही मुश्किल है। इसकी तुलना में अन्‍य परंपरागत मिसाइलों को आसानी से ट्रैक करके उन्‍हें नष्‍ट किया जा सकता है।


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