काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारा कार्ते परवान के अंदर हथियारबंद तालिबानी लड़ाके दाखिल हो गए और गार्ड्स को हिरासत में ले लिया। इन लोगों ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ डाले। इसके बाद वहां से चले गए। काबुल का यह गुरुद्वारा तालिबान का शासन आने के बाद सिखों और हिंदुओं के लिए पनाहगाह बना था और तब तालिबान ने आश्वासन दिया था कि यहां के लोगों की सुरक्षा की जाएगा। गार्ड्स को बंधक बनाया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15-16 हथियारबंद अज्ञात लोग गुरुद्वारे के अंदर दोपहर के वक्त पहुंच गए। इन लोगों ने तीन गार्ड्स के हाथ-पैर बांध दिए। उन्होंने बाहर जाते हुए सीसीटीवी भी तोड़ दिए। घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दी गई और मामले की जांच की जा रही है। घटना में हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। इससे पहले इंडिया वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने बताया कि हथियारबंद तालिबानी अधिकारी गुरुद्वारे में दाखिल हुए थे। उनका कहना है कि पवित्र स्थान का अपमान भी किया गया है और उसे नुकसान भी पहुंचाया गया है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से मामले में दखल देने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि देश में हिंदू और सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अल्पसंख्यकों पर जारी आतंक तालिबान पर इस्लामिक कट्टरपंथ की लाइन पर चलते हुए दूसरे धर्मों के अपमान के आरोप लगते रहे हैं लेकिन संगठन ने हाल में खुद के बदलने का दावा किया है। अफगानिस्तान के युद्धग्रस्त इलाकों में दशकों से अल्पसंख्यक अफगान सिखों और हिंदुओं के ऊपर अत्याचार जारी है। खासकर पकतिया का इलाका 1980 के दशक से मुजाहिदीन और तालिबान/हक्कानी समूह का गढ़ हुआ करता था। तालिबान का आतंक यहां इस कदर था कि अफगानिस्तान की सरकार का यहां कोई दखल नहीं था।
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