वॉशिंगटन में आई तकनीकी खामियों को अबतक पूरी तरह से दूर नहीं किया जा सका है। इसके बावजूद नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी टेलीस्कोप की ली गई तस्वीरों को लगातार जारी कर रही हैं। हबल ने बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून की कई ऐसी तस्वीरें ली हैं जिसमें उनके वायुमंडल में हो रहे बदलाव को स्पष्ट रूप से देखा गया है। हबल टेलिस्कोप बृहस्पति के बदलते वातावरण के साथ-साथ शनि और यूरेनस पर मौसमी तूफानों पर भी नजर रखता है। सौर मंडल के वेदमैन के रूप में काम कर रहा हबल नासा ने कहा है कि हबल स्पेस टेलिस्कोप सौर मंडल के वेदमैन के रूप में काम कर रहा है। उसकी पैनी निगरानी के कारण ही खगोलविदों को दूसरी दुनिया के बदलते मौसमों को लेकर बहुत सारी जानकारियां मिली हैं। वह पूरी तरह से एक्टिव न होने के बावजूद लगातार तस्वीरें भेज रहा है। इसने बृहस्पति पर नए तूफानों की मौजूदगी को पूरी दुनिया को बताया था। बृहस्पति के तूफान को लेकर हबल ने ही दी थी जानकारी नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की वैज्ञानिक एमी साइमन ने कहा कि हर बार जब हम नया डेटा डाउनलोड करते हैं, तो क्लाउड फीचर्स में इमेज क्वालिटी और डिटेल हमारे होश को उड़ा देती है। इस टेलिस्कोप ने बृहस्पति ग्रह की सतह पर एक लाल धब्बे (ग्रेट रेड स्पॉट) का पता लगाया था। यह लाल धब्बा दरअसल बृहस्पति पर आया एक बड़ा तूफान था। तूफान की स्पीड 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने बताया है कि बृहस्पति पर आए इस तूफान की गति लगातार बढ़ रही है। टेलिस्कोप के भेजे गए डेटा से पता चला है कि बृहस्पति के सतह पर दिखे लाल धब्बे के सबसे बाहरी इलाके में हवाएं तेज हो रही हैं। नवीनतम तूफान रिपोर्टों से पता चला है कि इस धब्बे के भीतर हवा की औसत गति 2009 से 2020 तक 8 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया है कि इस लाल धब्बे के अंदरूनी हिस्से में हवाओं की स्पीड काफी कम है। इस ग्रेट रेड स्पॉट को 150 से अधिक वर्षों से बृहस्पति ग्रह पर उग्र रूप में देखा गया है। ये लाल बादल 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से घड़ी की उल्टी दिशा में घूम रहे हैं। दुनिया को दिखाया था बनता हुआ नया सितारा हबल स्पेस टेलीस्कोप ने ही कुछ दिनों पहले एक नए सितारे के बनने की झलक को दिखाया था। इस तारे के ठीक पीछे एक निहारिका भी दिखाई दी थी। नासा ने इस वीडियो को पोस्ट कर लिखा था कि अब सक्रिय तारा निर्माण वाले क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। नासा ने बताया कि यह नेबुला हमारी गैलेक्सी दूरदराज के इलाके में पृथ्वी से लगभग 2,000 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। 1990 में लॉन्च हुआ था हबल टेलिस्कोप नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अप्रैल 1990 में हबल स्पेस टेलीस्कोप लॉन्च किया था। इसे डिस्कवरी स्पेस शटल के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। अमेरिकी एस्ट्रोनॉमर एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इस टेलिस्कोप को 'हबल' नाम दिया गया। नासा का एकमात्र ऐसा टेलिस्कोप है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है। 13.2 मीटर लंबा यह टेलिस्कोप 11 हजार किलोग्राम वजनी है। यह धरती की लोवर ऑर्बिट में परिक्रमा करता है।
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