काहिरा हजारों साल पहले ताबूत में बंद ममी की आवाज कैसी रही होगी? इससे भी बड़ा सवाल यह कि क्या आज उन्हें दोबारा सुना जा सकता है? पिछले साल वैज्ञानिकों ने ऐसा कर दिखाया था और एक खास तकनीक का इस्तेमाल करके ममी की आवाज की नकल की थी। शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने मेडिकल स्कैनर, 3डी प्रिंटिंग और एक इलेक्ट्रॉनिक वोकल ट्रैक्ट का इस्तेमाल करके 3000 साल पुरानी मिस्र की ममी की आवाज की नकल की है। जनवरी 2020 में साइंटिफिक रिपोर्ट्स मैग्जीन में प्रकाशित एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने कहा था कि तकनीक की मदद से उन्होंने एक ध्वनि पैदा करने में कामयाबी हासिल की। हालांकि इस अजीबोगरीब ध्वनि के मिस्र के पुजारी नेस्यमुन की आवाज के हूबहू नकल होने की संभावना से इनकार किया गया था, जिनके ममीकृत शरीर के साथ शोधकर्ता काम कर रहे थे। पुजारी की जीभ ने तीन सहस्राब्दियों में अपना अधिकांश हिस्सा खो दिया था। कटी जीभ के साथ सटीक आवाज की नकल मुश्किललंदन के रॉयल होलोवे कॉलेज के सह-लेखक डेविड एम. हॉवर्ड ने कहा था कि हमने मौजूदा स्थिति के अनुसार एक उचित ध्वनि पैदा की है लेकिन हम उनकी जुबान की स्थिति की देखते हुए एक सटीक आवाज की उम्मीद नहीं कर सकते। जर्मनी के वुर्जबर्ग में यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ रुडोल्फ हेगन ने इस पर संदेह जताया था। उन्होंने कहा था कि अत्याधुनिक दवा भी बिना वक्ष के जीवित लोगों को 'सामान्य' आवाज देने के लिए संघर्ष करती है। अनुमान से 1000 साल पुरानी है ममी बनाने की प्रक्रियामिस्र ज्यादातर अपने सदियों पुराने पिरामिडों, ममी और प्राचीन संस्कृतियों के चलते पुरातत्वविदों की पहली पसंद रहा है। इतिहास के रहस्यों पर से पर्दा हटाने में भी मिस्र का अहम योगदान है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ममीकरण की प्रक्रिया प्राचीन मिस्र में अब तक के अनुमान की तुलना में 1000 साल पहले ही शुरू हो गई थी। मिस्र में खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों की खोज पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री के अनुसार सबूत बताते हैं कि यह प्रक्रिया अनुमान से पहले ही शुरू हो गई थी।
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