वॉशिंगटन मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर वैज्ञानिक शुरू से ही उत्साहित रहे हैं। कई अंतरिक्ष मिशन में भी होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। लेकिन, जब पहली बार नासा के एक वैज्ञानिक ने यह दावा किया था, तब उनपर विज्ञान को बदनाम करने का आरोप लगाया गया था। इतना ही नहीं, मंगल पर जीवन के होने के उनके विश्वास को लेकर करियर में भी काफी उतार-चढ़ाव देखना पड़ा था। वाइकिंग स्पेस प्रोग्राम के सुपरवाइजर थे लेविन नासा के वैज्ञानिक गिल्बर्ट वी. लेविन ने सबसे पहले मंगल पर जीवन होने का दावा किया था । लेविन आज से 45 साल पहले नासा के वाइकिंग स्पेस प्रोब प्रोग्राम के सुपरवाइजर थे। उनकी ही देखरेख में मंगल से सतह पर मानव रहित अंतरिक्ष मिशन को उतारा गया था। इस प्रोग्राम का उद्देश्य मंगल की सतह पर किसी भी गैस या सूक्ष्मजीवों का पता लगाना था। वाइकिंग मिशन के डेटा को देख किया था दावा लेबल्ड रिलीज (LR) नाम के टेस्टिंग मैथड का इस्तेमाल करते हुए वाइकिंग लैंडर्स ने चार अलग-अलग स्थानों पर प्रयोग किए। इस अंतरिक्ष यान ने मंगल की सतह की पहली हाई रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें भी लीं। उस समय लिखते हुए लेविन ने कहा था कि 30 जुलाई, 1976 को लेबल रिलीज टेस्ट ने मंगल ग्रह से अपने प्रारंभिक परिणाम को भेजा था। यह आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक था। अन्य वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत पर नहीं किया विश्वास उस समय कई वैज्ञानिकों ने गिल्बर्ट वी. लेविन मंगल ग्रह पर जीवन के सिद्धांत पर विश्वास नहीं किया था। लेविन ने मंगल की सतह पर वाइकिंग मॉलिक्यूलर एनलॉसिस एक्सपेरिमेंट विधि का इस्तेमाल करते हुए एक और प्रयोग किया था। इसमें उन्हें कार्बनिक पदार्थों का कोई सबूत नहीं मिला। दूसरी खोज ने निष्कर्ष निकाला कि मंगल की सतह पर जीवन होने के सबूत बहुत की हम हैं। मंगल पर जीवन के उनके दावे ने खराब किया था करियर 2019 में उन्होंने लिखा कि पिछले 43 साल में वाइकिंग के बाद नासा के किसी भी मार्स लैंडर ने इतने रोमांचक परिणामों को साझा नहीं किया है। उन्होंने मंगल पर जीवन का पता लगाने वाले उपकरणों तक को नहीं रखा है। मंगल पर जीवन होने के विश्वास के कारण ही लेविन को अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि मैंने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में जब कहा था कि हमने मंगल पर जीवन का पता लगा लिया है तो जमकर हंगामा हुआ था। विज्ञान को बदनाम करने का लगा था आरोप एक कार्यक्रम में उनके एक साथी ने गुस्सा दिखाते हुए आरोप लगाया था कि आपने खुद को बदनाम किया है, और आप विज्ञान को बदनाम कर रहे हैं। लेकिन, लेविन पीछे नहीं हटे, जिनके बारे में वे खुद को सही मानते थे। मंगल की बंजर, सूखी और भारी विकिरण वाली सतह को देखने के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यहां जीवन के सबूत हैं, जिसे हमें और ज्यादा ढूंढने की जरूरत है।
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