Sunday, 21 November 2021

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तेल अवीव मध्य-पूर्व में तेजी से बदलते हालात के कारण कभी कट्टर दुश्मन रहे तुर्की और इजरायल काफी करीब आ रहे हैं। दोनों देश रक्षा, कूटनीति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के एक आग्रह पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने जासूसी के आरोपों में कैद किए गए एक इजरायली दंपति को रिहा कर दिया। जासूसी का लगाया गया था आरोप इजरायल के इस पति-पत्नी के जोड़े पर तुर्की में जासूसी करने का आरोप लगाया गया था। एक हफ्ते तक तुर्की की जेल में रहने के बाद ये दोनों अब इजरायल वापस लौट आए हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इजरायली नागरिक मोर्दी ओकनिन और नताली ओकनिन छुट्टियां मनाने के लिए तुर्की के शहर इस्तांबुल गए हुए थे। जहां उन्हें राष्ट्रपति एर्दोगन के महल की तस्वीरें लेने के आरोप में पकड़ लिया गया था। तुर्की में छुट्टियां मनाने पहुंचा था यह जोड़ा बताया गया कि यह दंपति इजरायल में पेशे से बस ड्राइवर हैं और छुट्टियां मनाने के लिए इस्तांबुल गए हुए थे। इनकी गिरफ्तारी को लेकर इजरायल में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। जिसके बाद इजरायल सरकार पर इस जोड़े की रिहाई के लिए दबाव बढ़ने लगा। रिहाई के बाद पीएम नफ्ताली बेनेट और विदेश मंत्री याइर लेपिड ने एक बयान जारी कर तुर्की का शुक्रिया अदा किया। इजरायल के धुर विरोधी थे फलस्तीन समर्थक एर्दोगन एर्दोगन को कुछ साल पहले तक इजरायल का धुर विरोधी नेता माना जाता था। इस्लामी देशों का मसीहा बनने की कोशिश कर रहे एर्दोगन तब हमेशा ही इजरायल की आलोचना करते रहते थे। यही कारण था कि फलस्तीन के समर्थन में उन्होंने 20218 में इजरायल के साथ राजनीतिक संबंधों को भी तोड़ लिया था। लेकिन, दो साल बाद 2020 में उन्होंने अचानक इजरायल के साथ राजनयिक संबंधों को बहाल करने का ऐलान कर सबको चौंका दिया था। कातिल, दहशतगर्त तक बता चुके हैं एर्दोगन इजरायल को कालित और दहशतगर्द तक करार दे चुके हैं। माना जाता है कि तुर्की के साथ राजनीतिक संबंधों को बहाल करने के पीछे अमेरिकी प्रतिबंध बड़ा कारण थे। इतना ही नहीं, मध्य-पूर्व में जारी गुटबाजियां, ईरान का बढ़ता प्रभाव जैसे कई कारकों ने इन दोनों देशों के बीच रिश्तों को फिर से सामान्य करने में बड़ी भूमिका निभाई। आर्थिक प्रतिबंध के कारण तुर्की की अर्थव्यवस्था को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ दोस्ती से भी तुर्की को कोई खास फायदा नहीं हुआ।


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