लंदन दुनियाभर में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के ओमीक्रोन वेरिएंट के खतरे के बीच ब्रिटेन में हुए एक ताजा शोध में भारत समेत पूरी दुनिया के लिए खुशखबरी सामने आई है। दुनियाभर में इस्तेमाल की जा रही 7 वैक्सीन की बूस्टर डोज ने वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में जोरदार रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा की है। इन 7 वैक्सीन में भारत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रही कोविशील्ड भी शामिल है जिसे ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका ने बनाया है। यह शोध उन लोगों पर किया गया है जिन्होंने या तो कोविशील्ड वैक्सीन लगवाया है या फाइजर की डोज। पहली बार अध्ययन किया गया जिसमें वैक्सीन की दो डोज देने के बाद तीसरी डोज दी गई। इससे पहले हुए शोध में यह पता चला था कि कोविशील्ड और फाइजर की दो डोज देने पर 6 महीने बाद भी अस्पताल में भर्ती कराए जाने और मौतों के खिलाफ क्रमश: 79 और 90 की प्रतिशत सुरक्षा मिली। ऑक्सफर्ड समेत 7 वैक्सीन से कोई सुरक्षा खतरा नहीं हालांकि कुछ शोध में यह भी संकेत मिला कि समय के साथ कोविड संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा कम होती जाती है। इसी वजह से वैक्सीन के निर्माता ऐसे लोगों को तीसरे बूस्टर डोज देने की बात कर रहे हैं जिन्हें खतरा ज्यादा है। हालांकि अभी तीसरे डोज से कितनी सुरक्षा मिल रही है, इस पर बहुत ज्यादा शोध नहीं हुआ है। लैंसेट में गुरुवार को छपे शोध में कहा गया है कि ऑक्सफर्ड, फाइजर, नोवावैक्स, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना, वलनेवा और क्योरवैक की कोरोना वैक्सीन इस अध्ययन में शामिल हैं। इस शोध में 2,878 वयस्क शामिल थे और पाया गया कि इन 7 वैक्सीन से कोई सुरक्षा खतरा नहीं है। वैक्सीन लगवाने के बाद थकान, सिर दर्द और जिस जगह पर वैक्सीन लगी है, वहां दर्द जैसे सामान्य लक्षण ही देखे गए। ये लक्षण ज्यादातर युवा लोगों में ही देखे गए। हालांकि 24 ऐसे भी लोग थे जिन्हें गंभीर साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ा। शोध में ये परिणाम कोरोना के अल्फा, बीटा, डेल्टा और चीन में पहली बार मिले कोरोना वायरस के खिलाफ मापे गए। स्पाइक प्रोटीन की मात्रा को 1.8 से 32.3 गुना बढ़ा दिया शोध में पाया गया कि दो डोज लगवाने वाले लोगों में 10 से 12 सप्ताह के बाद सभी 7 वैक्सीन ने बूस्टर डोज देने पर इम्यूनिटी को बढ़ा दिया। इस शोध में जिन मरीजों को कोविशील्ड वैक्सीन दी गई थी, उनके अंदर बूस्टर डोज के 28 दिन बाद स्पाइक प्रोटीन की मात्रा को 1.8 से 32.3 गुना बढ़ा दिया। शोधकर्ताओं ने कहा कि आने वाले एक साल तक यह देखा जाएगा कि क्या बूस्टर डोज का असर बना हुआ है या नहीं।
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