काबुल तालिबान के सर्वोच्च नेता मौलाना ने शुक्रवार को अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के संबंध में एक फरमान जारी किया। इस फरमान में इस्लामिक अमीरात में महिलाओं के अधिकारों को लेकर जानकारी दी गई है। इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इस फरमान के आधार पर तालिबान सरकार इस्लामिक कानूनों को लागू करने जा रही है। तालिबान पहले से ही महिला अधिकारों को लेकर पूरी दुनिया के निशाने पर है। तालिबान चीफ का आदेश सभी प्रांतों में भेजा गया हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपने फरमान में महिलाओं के छह अधिकारों का जिक्र किया है। तालिबान प्रमुख हैबतुल्लाह अखुंदजादा के इस फरमान को हज और धार्मिक मामलों के मंत्रालय, सूचना और संस्कृति मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ प्रांतीय गवर्नरों और जिला राज्यपालों को भेजा जा चुका है। उन्हें इस डिक्री में शामिल निर्देशों को लागू करने और उन्हें जनता तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। शादी के लिए महिलाओं की सहमति जरूरी इसमें कहा गया है कि निकाह या शादी के दौरान वयस्क महिलाओं की सहमति जरूरी है। महिलाओं को जबरदस्ती या दबाव में शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। निकाह और शादी में किसी भी तरह का रिस्क नहीं होना चाहिए। स्त्री कोई संपत्ति नहीं, लेनदेन नहीं किया जा सकता तालिबान के सुप्रीम लीडर ने यह भी कहा कि स्त्री कोई संपत्ति नहीं है, बल्कि एक महान और स्वतंत्र इंसान है। कोई भी उसे शांति समझौते या दुश्मनी खत्म करने के बदले किसी को नहीं दे सकता है। पति की मौत या 'शरई अदत' (चार महीने और दस रात या गर्भावस्था) खत्म होने के बाद कोई भी विधवा से बलपूर्वक शादी नहीं कर सकता है। इसमें उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं। विधवा को भी अपना भविष्य चुनने का अधिकार अखुंदजादा ने कहा कि एक विधवा को अधिकार है कि वह शादी करे या अपने भविष्य को चुने। शादी में समानता के सिद्धांत और दबाव की भावना बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए। एक विधवा को अपने नए पति से 'महार' प्राप्त करने का शरीयत में अधिकार है। महार निकाह के दौरान पत्नी और पति द्वारा निश्चित की गई एक राशि है, जिसे पति द्वारा पत्नी को भुगतान किया जाता है। पिता और पति की संपत्ति में विधवा का हक तालिबान की इस्लामिक अमीरात में एक विधवा के पास अपने पति, बच्चों, पिता और रिश्तेदारों की संपत्ति में विरासत अधिकार और निश्चित हिस्सा होता है। कोई भी विधवा को उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता है। बहु विवाह वाले पुरुष (एक से अधिक पत्नी) शरिया कानून के अनुसार सभी महिलाओं को अधिकार देने और उनके बीच न्याय बनाए रखने के लिए मजबूर होंगे।
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