Friday, 3 December 2021

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नीस/दुबई भारत मिस्र, क्रोएशिया और ग्रीस के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) फ्रांस से 80 ों को खरीद रहा है। इन 80 राफेल लड़ाकू विमानों की लागत 16 अरब यूरो बताई जा रही है। फ्रांस ने इस डील की पुष्टि की है, वहीं यूएई ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। कतर पहले से ही 24 राफेल लड़ाकू विमानों को आपरेट कर रहा है। कतर का यूएई और सऊदी अरब के साथ सामान्य संबंध नहीं है। ऐसे में यूएई की हवाई ताकत से कतर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों खाड़ी देशों के दौरे पर फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इसे निर्यात के लिए सबसे बड़ा हथियार सौदा बताया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों खाड़ी देशों के दो दिवसीय दौरे के पहले चरण में अमीरात पहुंचे हैं। यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ग्रहण करने के एक महीने पहले मैक्रों संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब के दौरे पर हैं। 2022 में फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव भी होने वाले हैं जिसमें मैक्रों दूसरा कार्यकाल हासिल करने का प्रयास करेंगे। पिछले एक दशक से जारी थी बातचीत अमीरात को फ्रांस के लड़ाकू विमान बेचने के सौदे पर पेरिस और अबु धाबी के बीच करीब एक दशक से वार्ता चल रही थी। अब जाकर इस डील पर दोनों देशों ने सहमति जताई है। इस डील से ऑस्ट्रेलिया के 12 फ्रांसीसी पनडुब्बियों का 66 अरब डॉलर का सौदा रद्द करने के बाद फ्रांस के रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। क्रोएशिया भी खरीद रहा राफेल लड़ाकू विमान क्रोएशिया ने अपनी हवाई क्षमता को बढ़ाने के लिए फ्रांस से 12 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का ऐलान किया है। क्रोएशिया के सामने राफेल और इजरायल में मोडिफाई हुए एफ-16सी/डी बराक लड़ाकू विमान में से किसी एक को चुनने का विकल्प था। क्रोएशियाई वायु सेना में राफेल शामिल होता है तो इससे बाल्कन देशों में उसकी हवाई क्षमता काफी बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं, हजारों द्वीपों को मिलाकर बने इस देश की हवाई सीमा भी पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी। घातक मिसाइलों और बमों से लैस है राफेल फाइटर जेट राफेल लड़ाकू विमान की रेंज 3,700 किलोमीटर है, यह अपने साथ कई तरह की अलग-अलग मिसाइलों को ले जा सकता है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और ऊंचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विंगस्‍पैन सिर्फ 10.90 मीटर है जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मैनुवरिंग में आसानी होती है। सभी मौसम में उड़ान भर सकता है राफेल राफेल बियांड विजुअल रेंज मिसाइल्‍स से लैस है। यानी बिना टारगेट प्‍लेन को देखते ही उसे उड़ाया जा सकता है। राफेल में ऐक्टिव रडार सीकर लगा है जिससे किसी भी मौसम में जेट ऑपरेट करने की सुविधा मिलती है। स्कैल्प मिसाइल या स्ट्रॉम शैडो जैसी मिसाइलें किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 560 किमी होती है। राफेल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। (एजेंसी के इनपुट के साथ)


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