Friday, 3 December 2021

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वॉशिंगटन दुनियाभर में टर्मिनेटर स्टाइल में बनाए जा रहे स्मॉर्ट हथियारों को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। अमेरिका के प्रसिद्ध कंप्यूटर विशेषज्ञ और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक स्टुअर्ट रसेल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस किलिंग मशीनों से जोखिम इतना बड़ा है कि वह चाहते हैं कि उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। ये हथियार एक बार अपने टॉरगेट को लॉक करने के बाद उसे खुद के कंप्यूटर के जरिए खोजकर मार सकते हैं। अमेरिका, चीन, रूस और इजरायल समेत कई देशों के वैज्ञानिक ऐसे हथियारों पर काम कर रहे हैं। छोटा सा डब्बा भी ले सकता है इंसान की जान रसेल ने कहा कि एक घातक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस क्वाडकॉप्टर (ड्रोन) जूता पॉलिश के डिब्बे जितना छोटा हो सकता है। यह ड्रोन छोटी मात्रा में विस्फोटक को लेकर भी उड़ान भर सकता है। करीब 3 ग्राम विस्फोटक किसी व्यक्ति को नजदीक से मारने के लिए काफी हैं। उन्होंने बताया कि किसी एक कंटेनर में ऐसे एक लाख घातक ड्रोन को रखा जा सकता है और उन सभी को एक ही बार में अपना काम करने के लिए भेजा जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अमेरिका भी कर रहा काम उन्होंने बताया कि अमेरिका का रक्षा मंत्रालय भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काफी निवेश कर रहा है। लेकिन, इसके जरिए बनाए जा रहे सभी हथियारों की फायरिंग का कंट्रोल हमेशा से इंसानों के हाथ में ही होगा। उन्होंने कहा कि ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हथियारों से डर जायज है। आप सुबह उठे और कोई इलेक्ट्रॉनिक चीज आपकी या किसी और की हत्या करने की कोशिश करे तो यह डरना जरूरी है। इंसानी दिमाग पर कब्जा कर सकता है एआई अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर हम क्वांटम एआई सिस्टम विकसित करते हैं जो इंसानी दिमाग की और ज्यादा सटीकता के साथ नकल कर सकता है तो यह कार्बनिक पदार्थ से संवेदना विकसित करने की दिशा में तकनीक की खोज के लिए लंबा सफर तय कर सकता है। शोध के मुताबिक, मजबूत ब्रेन-कंप्यूटर-इंटरफेस एक दिन इंसानी दिमाग की भाषा बोलने में सक्षम हो सकता है। एक ऐसी परिस्थिति जिसमें कंप्यूटर हमारी इंद्रियों पर कब्जा कर सकते हैं और हमारे दिमाग में सीधे इनपुट भेज सकते हैं। चीटियों का नेविगेशन दुर्घटना से बचा सकता है वैज्ञानिको और शोधकर्ताओं का दावा है कि चींटियां समूहों में नेविगेट करने का सबसे कारगर तरीका चालक रहित कारों को दुर्घटनाओं से बचने में मदद कर सकता है। ऐसे ही एक तरीके को कलेक्टिव या स्वार्म इंटेलिजेंस कहा जाता है। आजकल ट्रकों और कारों पर जीपीएस और सैटेलाइट नेविगेशन का मतलब भी स्वार्म इंटेलिजेंस ही है। इसके जरिए वे बड़ी दुर्घटनाओं से बचने के लिए अन्य वाहनों को एआई द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा करते हैं। जीपीएस दूसरे सोर्स से मिले डेटा के आधार पर हमें बताता है कि आगे रास्ते में ट्रैफिक जाम है या रास्ते को डाइवर्ट किया गया है।


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