वॉशिंगटन कश्मीर में लगातार आतंकी हमले करा रहे पाकिस्तान को भारत ने गुरुवार को बिना नाम लिए ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जमकर सुनाया। भारत ने कहा कि कुछ राष्ट्र आतंकियों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचाने के लिए उनकी मदद कर रहे हैं ताकि छद्म युद्ध में उनकी मदद ली जा सके। भारत ने पाकिस्तान में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का अप्रत्यक्ष रूप से इशारा करते हुए कहा कि आतंकियों के हमले के जवाब में आत्मरक्षा का अधिकार लागू होता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के नागराज नायडू ने कहा कि आतंकियों की मदद करने वाले राष्ट्र उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय मदद, खुफिया जानकारी, हथियार और भर्ती करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। नायडू ने कहा कि भारत दशकों से सीमापार छद्म युद्ध और पड़ोसी देश की मदद से आतंकियों के हमले का सामना कर रहा है। 'नॉन स्टेट ऐक्टर्स के हमले के जवाब में आत्मरक्षा का अधिकार' नायडू ने कहा, 'फिर चाहे वह वर्ष 1993 का मुंबई हमला हो या 26/11 हमले के दौरान अंधाधुंध हमला जिसमें लोन वुल्फ अटैक का हमले सामना करना पड़ा या पठानकोट और पुलवामा हो। दुनिया ने देखा है कि भारत लगातार इस तरह के नान स्टेट ऐक्टर्स के हमले का शिकार रहा है।' भारत ने कहा कि इन नॉन स्टेट ऐक्टर्स के हमले के जवाब में आत्मरक्षा का अधिकार लागू होता है। आत्मरक्षा के अधिकार के लिए हमले का स्रोत फिर चाहे वह स्टेट का हो या नॉन स्टेट का, मायने नहीं रखता है। नायडू ने कहा कि नॉन स्टेट ऐक्टर्स जैसे आतंकी गुट अक्सर देशों पर दूर से हमला करते हैं जो दूसरे देश में स्थित होता है । इस दौरान आतंकी दूसरे देश की संप्रभुता की आड़ लेते हैं। ऐसे में बहुत से देशों का मानना है कि इन आतंकी गुटों के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार लागू होता है। उन्होंने कहा कि राज्य उस समय पहले हमला करने के लिए मजबूर होंगे जब किसी तीसरे देश में सक्रिय आतंकियों के हमले का खतरा पैदा हो जाता है। बता दें कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट हमले को इसी आत्मरक्षा के अधिकार के तहत अंजाम दिया था।
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