पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन की सेना ने कराकोरम की पहाड़ियों पर बड़ी तादाद में अपने सबसे घातक टैंक Type 99A को तैनात किया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन का यह टैंक करीब 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर तैनात किया गया है। चीन ने हाल ही में अपने नए टाइप 15 टैंक के पहले जत्थे को भी शामिल किया है जो टाइप 99ए के साथ मिलकर जंग के मैदान में उतरेगा। चीनी अखबार ने कहा कि अगर फायर पावर और आर्मर की बात करें तो टाइप 99ए टैंक चीन का सबसे घातक टैंक है। वहीं टाइप 15 टैंक बहुत तेजी से हमला करने में सक्षम है। आइए जानते हैं यह चीनी टैंक भारत के T-90 टैंक के सामने कहां ठहरता है।China type 99a Tank vs India T90: चीन ने पूर्वी लद्दाख में भारत के T-90 से मुकाबले के लिए अपने सबसे घातक टैंक Type 99A को बड़ी तादाद में मैदान में उतार दिया है। चीन का यह क्या भारत के टी-90 से टक्कर ले पाएगा या नहीं, आइए जानते हैं सबकुछ.....

पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन की सेना ने कराकोरम की पहाड़ियों पर बड़ी तादाद में अपने सबसे घातक टैंक Type 99A को तैनात किया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन का यह टैंक करीब 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर तैनात किया गया है। चीन ने हाल ही में अपने नए टाइप 15 टैंक के पहले जत्थे को भी शामिल किया है जो टाइप 99ए के साथ मिलकर जंग के मैदान में उतरेगा। चीनी अखबार ने कहा कि अगर फायर पावर और आर्मर की बात करें तो टाइप 99ए टैंक चीन का सबसे घातक टैंक है। वहीं टाइप 15 टैंक बहुत तेजी से हमला करने में सक्षम है। आइए जानते हैं यह चीनी टैंक भारत के T-90 टैंक के सामने कहां ठहरता है।
रूस और जर्मनी के टैंकों की नकल है चीन का टैंक

चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वजन वाला टाइप 99ए मुख्य युद्धक टैंक ऑक्सीजन की कमी और पहाड़ी धरातल की वजह से पूर्वी लद्दाख में बहुत ज्यादा कारगर नहीं है। हाालंकि टाइप 99ए की बेजोड़ ताकत निर्णायक है। चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि टाइप 15 लाइट टैंक अगर युद्ध के दौरान फंसता है तो उसकी मदद के लिए टाइप 99ए टैंक जंग के मैदान में उतर सकता है। उधर, स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह मुख्य युद्धक टैंक अमेरिका या रूस के किसी टैंक से कमजोर नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन का यह टैंक तीसरी पीढ़ी का है और उसके अंदर घातक गोला बारुद, बड़े आकार के गोले दागने वाली तोप और बेहतरीन फायर कंट्रोल सिस्टम तथा अडवांस्ड इलेक्ट्रानिक प्रणाली लगाया है। चीन का टाइप 99ए टैंक रूस के टी-72 और जर्मनी के लेपर्ड 2 टैंक की नकल करके बनाया गया है। चीन का यह टैंक पहली बार 2001 में सेना में शामिल किया गया था।
भारत के T-90 से भारी है चीन का टाइप 99A टैंक

चीन टाइप 99ए टैंक भारत के टी-90 से भारी है जिसे भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में ड्रैगन के दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैनात किया है। टी-90 टैंक का वजन जहां 48 टन है, वहीं चीन के टाइप 99ए टैंक का वजन 57 टन है। विशेषज्ञों का कहना है कि लद्दाख की पहाड़ियों जो टैंक ज्यादा हल्का होगा, वह ज्यादा कारगर होगा। इस मामले में भारतीय टैंक चीनी टैंक पर भारी है। चीन और भारत दोनों के ही टैंक 125 मिलीमीटर की तोप पर भरोसा करते हैं। इससे दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाना आसान होता है। दावा किया जाता है कि चीन ने अपने टैंक के लिए यूरेनियम पर आधारित गोला तैयार किया है जो करीब डेढ़ किमी तक किसी भी टैंक को तबाह कर सकता है। चीन और भारत दोनों के ही टैंक एंटी टैंक मिसाइल फायर करने में सक्षम हैं। इसकी मदद से लंबी दूरी तक निशाना साधा जा सकता है और निचली उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टरों को भी तबाह किया जा सकता है।
चीनी टैंक में टी -90 से ज्यादा अच्छा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम

रूस निर्मित टी-90 के निर्यात संस्करण वाले टैंक में बहुत अच्छा हार्डवेयर नहीं है लेकिन कलिना टारगेटिंग सिस्टम लगाए जाने के बाद यह काफी हद तक सुधर गया है। वहीं चीन इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में बहुत आगे है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीनी टैंक में नया इंफ्रारेड ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है जो उन्हें शत्रु के टैंकों का आसानी से शिकार करने में मदद करता है और माना जाता है कि यह टी-90 से ज्यादा बेहतर है। टी-90 टैंक और चीनी टैंक दोनों में बेहतरीन सुरक्षा के उपकरण लगे हुए हैं। भारत के टी-90 एमएस टैंक में रेलिक्ट सिस्टम लगा है जो एंटी टैंक मिसाइलों से उसे बचाता है। चीनी टैंक में लेजर वार्निंग सिस्टम लगा है जो लेजर से निशाना बनाए जाते समय अपने टैंक कमांडर को उसकी जानकारी दे देता है। इससे टैंक कमांडर को मौका दे देता है कि वह अपने टैंक को पीछे कर ले। टी-90 टैंक में श्तोरा एक्टिव प्रॉटेक्शन सिस्टम लगा है जो न केवल लेजर को जाम कर देता है, बल्कि लेजर को रोकने वाले ग्रेनेड दागता है जिससे धुआं निकलता है।
स्पीड में भारतीय टैंक चीनी टाइप 99ए टैंक से पीछे

चीन का टाइप 99 ए टैंक स्पीड के मामले में भारतीय टी-90 टैंक से आगे है। चीनी टैंक की स्पीड 50 मील प्रतिघंटा है, वहीं भारतीय टी-90 टैंक 42 से 45 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से सड़क पर दौड़ सकता है। एक बार टैंक में ईंधन भरे जाने के बाद टी-90 टैंक और टाइप 99 टैंक करीब 300 मील तक दौड़ सकते हैं। टाइप 99ए टैंक की तकनीक को चीन ने अभी तक किसी देश को नहीं दिया है लेकिन भारतीय टैंक की काफी जानकारी चीन के पास है। चीनी टैंक में जहां 1500 हार्स पावर का डीजल इंजन लगा है, वहीं भारतीय टैंक में करीब 1000 हार्स पावर का इंजन लगा है। कुल मिलाकर कहें तो चीनी टैंक काफी आधुनिक है लेकिन भारत का टी-90 टैंक उसे तबाह करने की पूरी ताकत रखता है। यही वजह है कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन की चुनौती से निपटने के लिए टी-90 टैंक को तैनात किया है।
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