वॉशिंगटन जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए अपने पहले बयान में अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान से इस मुद्दे के हल के लिए सीधी बात करने का अनुरोध किया है। अमेरिका ने नियंत्रण रेखा और अन्य क्षेत्रों में संघर्षविराम के सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने के भारत एवं पाकिस्तान के संयुक्त बयान का स्वागत किया। बाइडेन प्रशासन ने इसे दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रशासन ने एलओसी पर तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों से 2003 में हुए संघर्ष विराम समझौते का पालन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘हम नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की निंदा करते हैं।’ प्राइस ने कहा, ‘अमेरिका की भूमिका की बात करें तो हम कश्मीर एवं अन्य संबंधित मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी वार्ता का समर्थन करते हैं और निश्चित रूप से इस समझौते का स्वागत करते हैं, जो 25 फरवरी से प्रभावी हो गया है।’’ 'दक्षिण एशिया में शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम' प्राइस ने कहा कि पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण सहयोगी है जिसके साथ अमेरिका के कई साझा हित जुड़े हैं। वही वाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि अमेरिका ने संघर्ष विराम के सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने के भारत और पाकिस्तान के संयुक्त बयान का स्वागत करता है। उन्होंने इसे दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। जेन साकी ने कहा कि बाइडेन प्रशासन पाकिस्तान सहित क्षेत्र के नेताओं और अधिकारियों के साथ संपर्क में है। साकी ने कहा, ‘अमेरिका, भारत और पाकिस्तान के संयुक्त बयान का स्वागत करता है कि दोनों देश नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम का सख्ती से पालन करने पर सहमत हुए हैं और यह 25 फरवरी से प्रभावी हो गया है।’ इस बारे में पूछे जाने पर प्रेस सचिव ने कहा, ‘यह दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जिसमें हमारे साझा हित जुड़े हैं। हम दोनों देशों को इस प्रगति को बनाये रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’ यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पर्याप्त कदम उठा रहा है, इस पर उन्होंने कहा ‘उस आकलन के बारे में मैं आपको विदेश मंत्रालय या खुफिया विभाग की ओर इशारा करूंगी।’
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