स्टॉकहोम दुनिया अब जीवाश्म ईंधन से सूरज की अक्षय ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रही है। इस बदलाव के बीच वैज्ञानिकों को कई बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। के साथ पहली दिक्कत यह है कि यह केवल दिन में मिलती है और दूसरी बड़ी दिक्कत यह है कि लंबे समय के इस्तेमाल के लिए इस ऊर्जा को स्टोर करके कैसे रखा जाए। स्वीडन के वैज्ञानिकों ने अब दूसरी दिक्कत का हल तलाश कर लिया है। स्वीडन के वैज्ञानिकों ने 'सोलर थर्मल फ्यूल' का विकास किया है। यह सोलर थर्मल फ्यूल एक विशेष प्रकार का ईंधन है जो 18 साल तक सूरज की ऊर्जा को सुरक्षित रखने में सक्षम है। इस ऊर्जा का विकास स्वीडन के चालमर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी के विशेषज्ञों ने एक साल तक चले शोध के बाद किया है। सोलर एनर्जी को पकड़ने में मदद करने वाले डिवाइस का नाम मोलेक्यूलर सोलर थर्मल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम 'MOST' है। लिक्विड के ठंडे होने के बाद भी उसके अंदर भरपूर ऊर्जा यह मोस्ट तकनीक परिक्रमा के आधार पर काम करती है जिसमें एक पंप ईंधन को पारदर्शी ट्यूब के सहारे घुमाता है। जब ये सूरज की ऊर्जा के संपर्क में आते हैं तो परमाणुओं के बीच संबंध बदल जाते हैं और यह एक ऊर्जा से भरभूर समावयी (Isomer) में बदल जाता है। इसके बाद सूरज की ऊर्जा इस मजबूत रासायनिक बॉन्ड में बंध जाती है। आश्चर्य वाली बात यह है कि लिक्विड के ठंडे होने के बाद भी उसके अंदर भरपूर ऊर्जा बनी रहती है। इस लिक्विड के अंदर फंसी ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए उस लिक्विड को शोधकर्ताओं के विकसित किए गए एक उत्प्रेरक के जरिए गुजारा जाता है। इससे यह लिक्विड करीब 63 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है। इससे उस प्रक्रिया की शुरुआत हो जाती है जब अणु (Molecule) दोबारा अपने फार्म में आ जाते हैं और गर्मी के रूप में ऊर्जा को छोड़ते हैं। इस गर्मी का इस्तेमाल किसी बिल्डिंग के पानी को गरम करने, खाना बनाने या हर उस जगह पर किया जा सकता है जहां पर गरम पानी की जरूरती होती है। इसी लिक्विड को दोबारा मोस्ट के अंदर भेज दिया जाता है जहां यह दोबारा सौर ऊर्जा को इकट्ठा करके उसे सुरक्षित रख सकता है।
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