Sunday, 4 April 2021

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किसी के मरने के बाद क्या उसे फिर से जिंदा किया जा सकता है? यह सुनने में अंधविश्वास या साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है लेकिन रूसी ट्रांसह्यूमनिस्ट और लाइफ एक्सटेंशनिस्ट अलेक्सेई तरचिन टेक्नॉलजी की मदद से ऐसा मुमकिन होने का दावा करते हैं। डायसन स्फीयर (Dyson sphere) है वह मेगास्ट्रक्चर जिसकी मदद से सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट किसी इंसान के निजी डेटा के आधार पर उसकी डिजिटल कॉपी तैयार करेगा। तरचिन 2014 से इस 'इम्मॉर्टैलिटी रोडमैप' पर काम कर रहे हैं। तरचिन ने हाल ही में एक पेपर में इसका पूरा तरीका बताया है।

Dyson Sphere: सुपरइंटेलिजेंट AI को आगे काम करने के लिए ऐसे तरीके पता होने चाहिए जिनसे किसी इंसान ने अपना जीवन जिया था, तभी वह उस इंसान जैसा बन सकेगा। एक बार डिजिटल कॉपी बनने के बाद शरीर को बनाना भी मुमकिन हो सकेगा।


Dyson Sphere: वैज्ञानिक का दावा, सूरज से ऊर्जा लेकर खो चुके अपनों को जिंदा करेगा सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट, कितना मुमकिन?

किसी के मरने के बाद क्या उसे फिर से जिंदा किया जा सकता है? यह सुनने में अंधविश्वास या साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है लेकिन रूसी ट्रांसह्यूमनिस्ट और लाइफ एक्सटेंशनिस्ट अलेक्सेई तरचिन टेक्नॉलजी की मदद से ऐसा मुमकिन होने का दावा करते हैं। डायसन स्फीयर (Dyson sphere) है वह मेगास्ट्रक्चर जिसकी मदद से सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट किसी इंसान के निजी डेटा के आधार पर उसकी डिजिटल कॉपी तैयार करेगा। तरचिन 2014 से इस 'इम्मॉर्टैलिटी रोडमैप' पर काम कर रहे हैं। तरचिन ने हाल ही में एक पेपर में इसका पूरा तरीका बताया है।



कैसे करेगा काम?
कैसे करेगा काम?

तरचिन अपने हर सपने, हर बातचीत और रोज के अनुभवों को डॉक्युमेंट कर रहे हैं। यहां तक कि वे अपने निजी विचारों और विचारधारा को भी स्वीकार करते हैं। सुपरइंटेलिजेंट AI को आगे काम करने के लिए ऐसे तरीके पता होने चाहिए जिनसे किसी इंसान ने अपना जीवन जिया था, तभी वह उस इंसान जैसा बन सकेगा। एक बार डिजिटल कॉपी बनने के बाद शरीर को बनाना भी मुमकिन हो सकेगा। DNA संरचना की मदद से क्लोनिंग की जा सकेगी और डिजिटल कॉपी की मदद से उसे इंसान जैसा बनाया जा सकेगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के लिए जितनी ऊर्जा चाहिए होगी वह धरती से मिलना मुश्किल है। यहां काम आएगा डायसन स्फीयर। (International Journal of Astrobiology)



कैसे बनेगा?
कैसे बनेगा?

दिवंगत फिजिसिस्ट फ्रीमन डायसन ने 1960 में यह कॉन्सेप्ट दिया था। इसमें उन्होंने ऐसे काल्पनिक शेल के बारे में बात की थी जो सूरज को घेरता हो। यह सूरज से निकलने वाली 400 सेप्टिलियन वॉट्स पर सेकंड की ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। यह अलग-अलग कक्षा में घूम रहीं कई सैटलाइट्स से बनेगा। यही सबसे बड़ी चुनौती भी है। इतना विशाल ढांचा बनाना फिलहाल मुमकिन नहीं नजर आता। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के फ्यूचर ऑफ ह्यूमैनिट इंस्टिट्यूट में रिसर्चर स्टुअर्ट आर्मस्ट्रॉन्ग का कहना है कि सूरज को ढकते हुए ऐसा कुछ बनाना प्रैक्टिकल नहीं है।



क्लोनिंग से अलग
क्लोनिंग से अलग

तरचिन का कहना है कि डायसन स्फीयर फिलहाल बनाना मुश्किल है लेकिन नैनोरोबॉट से इसे किया जा सकता है। उनका कहना है कि ये रोबॉट किसी ग्रह से लोहे और ऑक्सिजन का खनन शुरू कर सकते हैं और उसका इस्तेमाल सूरज के आसपास हीमाटाइट की सतह बनाने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, बावजूद इसके एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्लोनिंग की तरह ही डिजिटल कॉपी का भी हूबहू इंसान के जैसा होना मुश्किल है। समय के साथ नए अनुभवों के आधार पर वह अलग इंसान बन सकता है। यही नहीं, सूरज या किसी और सितारे के इर्द-गिर्द यह घेरा बनाना सिर्फ तब तक सफल होगा जब तक सितारा जीवित है। उसके मरने के साथ ही ऊर्जा का यह स्रोत भी खत्म हो जाएगा।





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