मिस्र में शनिवार को भव्य परेड का नजारा देखा गया। यह ऐतिहासिक परेड आयोजित की गई थी 22 ममीज के लिए जो मशहूर फिरौनों को हैं। इन्हें सेंट्रल काहिरा से एक म्यूजियम में ले जाया जा रहा है। मिस्र के म्यूजियम से तहरीर स्क्वेयर होते हुए इने नैशनल म्यूजियम ऑफ इजिप्शियन सिविलाइजेशन ले जाया गया जहां मिस्र की पहली इस्लामिक राजधानी थी। दिलचस्प बात यह है कि इसे लेकर कई शंकाएं जताई गईं और 'शाप' का डर भी फैला रहा लेकिन आधुनिक मिस्र ने इन्हें नजरअंदाज करते हुए परेड का फैसला किया। परेड के दौरान मौसम का ध्यान रखते हुए खास केसेज में ट्रकों में रखा गया और उन्हें पारंपरिक अंदाज में सजाया गया।चर्चित पुरातत्वविदों ने शाप के दावे को आधारहीन बताया है और कहा कि इन ममी को दूसरी जगह भेजे जाने से उनका सम्मान ही बढ़ेगा। 2011 में देश में पैदा हुए राजनीतिक उथल-पुथल और अब कोरोना वायरस की महामारी के चलते नुकसान उठा रहे पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होने की उम्मीद है।

मिस्र में शनिवार को भव्य परेड का नजारा देखा गया। यह ऐतिहासिक परेड आयोजित की गई थी 22 ममीज के लिए जो मशहूर फिरौनों को हैं। इन्हें सेंट्रल काहिरा से एक म्यूजियम में ले जाया जा रहा है। मिस्र के म्यूजियम से तहरीर स्क्वेयर होते हुए इने नैशनल म्यूजियम ऑफ इजिप्शियन सिविलाइजेशन ले जाया गया जहां मिस्र की पहली इस्लामिक राजधानी थी। दिलचस्प बात यह है कि इसे लेकर कई शंकाएं जताई गईं और 'शाप' का डर भी फैला रहा लेकिन आधुनिक मिस्र ने इन्हें नजरअंदाज करते हुए परेड का फैसला किया। परेड के दौरान मौसम का ध्यान रखते हुए खास केसेज में ट्रकों में रखा गया और उन्हें पारंपरिक अंदाज में सजाया गया।
21 तोपों की सलामी

समारोह के दौरान 21 तोपों की सलामी से शुरुआत की गई और लाइट-म्यूजिक का कार्यक्रम पेश किया गया। इन ममियों में राजा रामसेस द्वितीय, सेती प्रथम, रानी हटशेपसूट आदि शामिल हैं। मिस्र सरकार का कहना है कि काहिरा के म्यूजियम में सारी ममी को एक साथ रखने से पर्यटक उन्हें एक ही जगह देख सकते हैं। साथ ही पैसे के संकट से जूझ रही सरकार को उम्मीद है कि पर्यटक बड़ पैमाने पर आएंगे और इससे कोरोना काल में उसकी आय में वृद्धि होगी। वहीं, डेली मेल के मुताबिक एक शाप में कहा गया था कि जो व्यक्ति राजा फराओ की शांति में खलल डालेगा, उसके पास मौत बहुत तेजी से आएगी।
'संयोग मात्र हैं घटनाएं'

इस तरह के डर को सही साबित करने के लिए मिस्र में हाल में हुए हादसे गिनाए गए लेकिन पुरातत्वविदों ने ऐसे दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि मिस्र में हो रही इस तरह की घटनाएं केवल एक संयोग मात्र हैं। मिस्र के पूर्व मंत्री अल नाहर ने कहा कि ममी के एक जगह से दूसरी जगह भेजे जाने का इन हादसों से कोई संबंध नहीं है। चर्चित पुरातत्वविदों ने शाप के दावे को आधारहीन बताया है और कहा कि इन ममी को दूसरी जगह भेजे जाने से उनका सम्मान ही बढ़ेगा। 2011 में देश में पैदा हुए राजनीतिक उथल-पुथल और अब कोरोना वायरस की महामारी के चलते नुकसान उठा रहे पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होने की उम्मीद है।
कौन था फिरौन?

बता दें कि फिरौन मिस्र का सबसे ताकतवर बादशाह था, जिसने 16वीं शताब्दी ईसा पूर्व में शासन किया था। कहा जाता है कि विदेशी आक्रमणकारी हक्सोस राजवंश के साथ लड़ाई में पकड़े जाने के बाद फिरौन को मौत के घाट उतार दिया गया था। तब से फिरौन को ममी बनाकर थेब्स में नेक्रोपोलिस के भीतर दफना दिया गया था। इस ममी की खोज 1881 में की गई थी। तब यह पता नहीं चल सका था कि उनके शरीर पर कई जानलेवा चोट के निशान थे। अब जब उनके सिर का सीटी स्कैन किया गया है तो वैज्ञानिकों को कई गंभीर घाव के निशान दिखाई दिए हैं।
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