दुनिया का सबसे तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू विमान एसआर-71 ब्लैकबर्ड अब म्यूजियम में धूल फांक रहा है। इस लड़ाकू विमान की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड थी, जिसके कारण हवा में दुश्मन की एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल भी इसे पकड़ नहीं पाती थी। इस विमान को अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया था। इस विमान की टॉप स्पीड 3529 किलोमीटर प्रति घंटा है। जो एक बार में 5400 किलोमीटर की दूरी को तय कर सकता था। हालांकि, अमेरिकी वायुसेना का बजट कम होने और इस विमान के महंगे मेंटीनेंस को देखते हुए समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा। यह विमान धरती से 85000 फुट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता था। आज के जमाने में बहुत ही कम ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो इस ऊंचाई को छू पाते हैं। अपने तीन दशक की सेवा के दौरान कभी भी ऐसा मौका नहीं आया जब खुफिया मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके में भी घुसने के बावजूद किसी मिसाइल ने इसे अपना शिकार बनाया हो।दुनिया का सबसे तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू विमान एसआर-71 ब्लैकबर्ड अब म्यूजियम में धूल फांक रहा है। इस लड़ाकू विमान की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड थी, जिसके कारण हवा में दुश्मन की एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल भी इसे पकड़ नहीं पाती थी।

दुनिया का सबसे तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू विमान एसआर-71 ब्लैकबर्ड अब म्यूजियम में धूल फांक रहा है। इस लड़ाकू विमान की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड थी, जिसके कारण हवा में दुश्मन की एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल भी इसे पकड़ नहीं पाती थी। इस विमान को अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया था। इस विमान की टॉप स्पीड 3529 किलोमीटर प्रति घंटा है। जो एक बार में 5400 किलोमीटर की दूरी को तय कर सकता था। हालांकि, अमेरिकी वायुसेना का बजट कम होने और इस विमान के महंगे मेंटीनेंस को देखते हुए समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा। यह विमान धरती से 85000 फुट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता था। आज के जमाने में बहुत ही कम ऐसे लड़ाकू विमान हैं जो इस ऊंचाई को छू पाते हैं। अपने तीन दशक की सेवा के दौरान कभी भी ऐसा मौका नहीं आया जब खुफिया मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके में भी घुसने के बावजूद किसी मिसाइल ने इसे अपना शिकार बनाया हो।
4000 मिसाइलों को धूल चटा चुका है ब्लैकबर्ड

एयरमैन मैगजीन की 2017 में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैकबर्ड विमान पर सर्विस के दौरान दुश्मनों की तरफ से कम से कम 4000 मिसाइलें फायर की गई थीं। हालांकि, कोई भी मिसाइल इस विमान की स्पीड की बराबरी नहीं कर सकी। यह अमेरिकी वायुसेना के इतिहास में एकमात्र ऐसा विमान है जो 30 साल की सर्विस के दौरान एक बार भी दुर्घटना का शिकार नहीं हुआ है। 4000 मिसाइलों का आंकड़ा वी आर द माइटी की एक अन्य रिपोर्ट में में भी दिया गया है। ब्लैकबर्ड के सबसे प्रसिद्ध पायलट ब्रायन शुल ने भी इन मिसाइल हमलों का उल्लेख किया है। शुल ने बताया कि इस विमान ने अमेरिका के 6 राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान अपनी सेवाएं दी हैं। जिसमें राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, गेराल्ड फोर्ड, जिमी कार्टर, रोनाल्ड रीगन और जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश शामिल थे। हालांकि, इस विमान को बनाने की परियोजना की शुरुआत ड्वाइट आइजनहावर के कार्यकाल के दौरान हुई थी और कैनेडी प्रशासन के दौरान इसकी पहली उड़ान आयोजित की गई थी। जबकि, अंतिम उड़ान बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति रहने के दौरान हुई थी।
3529 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से उड़कर रचा था इतिहास

इस लड़ाकू विमान ने 1976 में 3529 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पाई थी, जो आजतक के इतिहास में रिकॉर्ड है। इस विमान ने 1 सितंबर 1974 को न्यूयार्क से लंदन की 5,645 मील की दूरी एक घंटा 54 मिनट और 56.4 सेकंड में तय की थी। रूस के साथ जारी शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका ने इस लड़ाकू विमान का खूब उपयोग किया था। जिसका मकसद रूस के मन में डर को बैठाना था। अमेरिका ने कभी भी इस विमान का उपयोग किसी युद्ध के दौरान नहीं किया। जिससे यह साबित नहीं हो सका कि क्या यह विमान युद्ध के दौरान भी उपयोगी साबित होता है कि नहीं? बताया जाता है कि सोवियत संघ के पतन के पहले ही साल 1990 के करीब इस विमान को अमेरिकी एयरफोर्स ने अपनी सर्विस से रिटायर कर दिया था। तब एयरफोर्स ने कहा था कि इसकी परिचालन लागत बहुत ज्यादा है और हमारे पास इतना बजट नहीं है कि हम इसे लगातार उड़ा पाएं।
यूएस एयरफोर्स के अलावा NASA भी करती थी इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक रूप से रिटायर करने के बाद भी अमेरिकी कांग्रेस के कहने पर यूएस एयरफोर्स ने 1995 से 1998 के बीच ऐसे तीन विमानों को ऑपरेट किया था। बाद में एयरफोर्स ने इसमें से एक विमान अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को सौंप दिया था। नासा ने इन विमानों के जरिए साल 1999 तक रिसर्च से जुड़े कई मिशनों में उपयोग किया। जिसके बाद इन्हें हमेशा के लिए सर्विस से हटा दिया गया। 1990 में जब इस विमान को अमेरिकी एयरफोर्स ने सेवा से हटाने का फैसला किया तो उन्हें लगने लगा था कि रूस के पास भी कई ऐसे जहाज आ गए हैं जो इस स्पीड का मुकाबला कर सकते हैं। ऐसे में इस विमान की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे थे। उधर, सोवियत संघ भी अपने अंदरूनी मामलों में कुछ ज्यादा ही व्यस्त हो गया था, जिसके कारण अमेरिका के साथ उसका तनाव भी धीरे-धीरे कम होने लगा। जिसके बाद अमेरिकी कांग्रेस ने इस विमान की लागत को लेकर कड़े सवाल खड़े किए थे।
2 लाख डॉलर प्रति घंटा थी उड़ान की लागत

अमेरिकी कांग्रेस के सामने यूएस एयरफोर्स के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लैरी डी वेल्च ने कहा था कि सैटेलाइट की बढ़ती ताकत और सोवियत संघ की SAM-5 मिसाइल से इस विमान का बच पाना मुश्किल है। सोवियत संघ की यह मिसाइल काफी गति से उड़ान भरती थी, जो जमीन से हवा में किसी भी टॉरगेट को पल भर में मार गिराने में समर्थ थी। एयरफोर्स चीफ ने तब कहा था कि हमें इस विमान को तुरंत रिटायर करने की जरुरत है, जिससे एयरफोर्स के फंड को बचाया जा सके। उस समय रोनाल्ड रीगन प्रशासन में यूएस एयरफोर्स के सेकरेटरी एडवर्ड सी एल्ड्रिज जूनियर ने अनुमान लगाया कि एसआर-71 बेड़े को संचालित करने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे से दो टेक्टिकल फ्लाइट विंग्स को संचालित किया जा सकता है। एक टेक्टिकल फ्लाइट विंग में 9-9 की संख्या में लड़ाकू विमानों से लैस 4 स्वॉड्रन होते हैं। बताया गया था कि उस समय एसआर-71 बेड़े को संचालित करने की प्रति घंटे की लागत 2 लाख डॉलर आती थी।
1966 में US एयरफोर्स में शामिल हुआ था यह विमान

लॉकहीड मार्टिन ने एसआर-71 ब्लैकबर्ड को ए-12 रिकॉनसेंस एयरक्राफ्ट से डेवलप कर बनाया था। इसकी पहली उड़ान 22 दिसंबर 1964 को आयोजित की गई थी। यूएस एयरफोर्स के इंजिनियर क्लेयरेंस कैली जॉनसन को इस एयरक्राफ्ट के कॉनस्पेट का जन्मदाता माना जाता है। इस एयरक्राफ्ट को साल 1966 में ऑपरेशन में शामिल किया गया था।
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