Tuesday, 13 April 2021

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वॉशिंगटन रूस से को खरीदने पर अमेरिका कई बार भारत पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दे चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने भी भारत दौरे के समय कहा था कि हमारे दोस्तों को रूस से हथियारों की खरीद से बचना चाहिए। उधर, भारत पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर अमेरिकी सांसद दो फाड़ हो गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के नेता टोड यंग ने कहा है कि अगर भारत पर काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाया जाता है तो यह रूस के लिए भूरणनीतिक जीत होगी। भारत पर प्रतिबंध से अमेरिका होगा कमजोर अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों की समिति के सदस्य यंग ने विदेश नीति मैगजीन में लिखा कि यदि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन भारत पर प्रतिबंध लगाता है, तो इससे अहम समय में दो रणनीतिक मोर्चे कमजोर होंगे- इससे भारत के साथ अमेरिका के संबंध कमजोर होंगे और इससे चीन से निपटने की क्वाड (QUAD) की क्षमता भी प्रभावित होगी। डेमोक्रेटिक नेता ने भारत पर प्रतिबंधों की वकालत की यंग ने सोमवार को कहा कि हालिया सप्ताह में सीनेट की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेटिक अध्यक्ष बॉब मेनेंडेज ने कहा था कि यदि भारत रूसी मिसाइल प्रणाली खरीदने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसे काट्सा की धारा 231 के तहत प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी जानी चाहिए। बता दें कि रूसी रक्षा या खुफिया क्षेत्रों के लिए या उनकी ओर से काम करने वाले प्रतिष्ठानों पर इस धारा के तहत अमेरिका प्रतिबंधों का ऐलान करता है। अमेरिकी सांसद ने कहा- प्रतिबंध से भारत रुकेगा नहीं यंग ने लिखा कि अमेरिका के प्रतिबंध लगाने का कदम भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने से रोकेगा नहीं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर भारत के ऐतिहासिक संशयवाद और रूस के साथ उसके पुराने संबंधों के मद्देनजर किसी भी प्रतिबंध को गुट निरपेक्ष आंदोलन के सहयोगियों समेत भारत में वे लोग बढ़ा-चढ़ा कर दिखाएंगे और इनका लाभ उठाएंगे, जिन्हें पश्चिम के साथ गहरे संबंधों को लेकर शक रहता है। भारत को काट्सा से छूट दिए जाने की अपील की उन्होंने लिखा कि इसके अलावा रूस भारत के सैन्य साझेदार के रूप में अपनी भूमिका का फिर से दावा करने के लिए प्रतिबंधों का लाभ उठा सकता है। इसके बाद विडम्बना यह होगी कि रूस निर्मित रक्षा प्रणाली को लेकर भारत पर प्रतिबंध लगाना वास्तव में मॉस्को की भूरणनीतिक जीत साबित होगा। उन्होंने बाइडन प्रशासन से भारत को सीएएटीएसए से छूट दिए जाने की अपील करते हुए कहा कि यह छूट देने से और भारत को रूसी हथियार खरीदने की अनुमति देने से बाइडन प्रशासन यह स्पष्ट कर सकता है कि अमेरिका के लिए मुख्य भूरणनीतिक खतरा चीन है। अमेरिकी एडमिरल ने भी भारत के खिलाफ प्रतिबंध न लगाने को कहा कुछ दिन पहले ही अमेरिकी सेना के इंडो-पैसिफिक कमांड के चीफ बनने जा रहे एडमिरल जॉन एक्वीलिनो ने भारत रूस के संबंधों को लेकर यूएस कांग्रेस को जमकर सुनाया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका को यह समझने की जरूरत है कि सुरक्षा सहयोग और सैन्य साजो सामान के लिए भारत के रूस के साथ पुराने संबंध हैं। उन्होंने रूस से भारत के एस-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर भी प्रतिबंधों को न लगाने की वकालत की थी। क्या कहा था अमेरिकी एडमिरल ने? अमेरिकी सीनेटर जीन शाहीन ने सवाल किया कि क्या हमें भारत पर प्रतिबंध लगाना चाहिए अगर वह एस-400 खरीदते हैं तो? इसके जवाब में एडमिरल जॉन एक्वीलिनो ने कहा कि वह हथियारों को खरीदने के लिए प्रतिबंधों का सहारा लेने के बजाय भारत को रूस से दूर करने की कोशिश करेंगे। एक्वीलिनो ने कहा कि मुझे लगता है कि यह फैसला मैं नीति निर्माताओं पर छोड़ दूंगा। मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए कि हम भारत के साथ कहां खड़े हैं और मुझे लगता है कि विकल्प उपलब्ध कराने का कदम ज्यादा बेहतर है। क्या है S-400 डिफेंस सिस्टम यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। S-400 को रूस का सबसे अडवांस लॉन्ग रेंज सर्फेस-टु-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम रूस के ही S-300 का अपग्रेडेड वर्जन है। इस मिसाइल सिस्टम को अल्माज-आंते ने तैयार किया है, जो रूस में 2007 के बाद से ही सेवा में है। यह एक ही राउंड में 36 वार करने में सक्षम है। रूस ने अप्रैल 2007 में किया था तैनात 400 किलोमीटर तक मार करने वाले इस सिस्टम को रूस ने 28 अप्रैल, 2007 को तैनात किया था। मौजूदा दौर का यह सबसे अडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इजरायल और अमेरिका का मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी मजबूत है, लेकिन उनके पास लॉन्ग रेंज की मिसाइलें हैं। इसकी बजाय रूस के पास कम दूरी में मजबूती से मार करने वाला मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। यह एयरक्राफ्ट्स को मार गिराने में सक्षम है, जिसके जरिए अटैक का भारत पर खतरा रहता है। एस-400 डिफेंस सिस्टम को और घातक बना रहा रूस रूस ने अपने एस-400 और एस-300 मिसाइल सिस्टम को और घातक बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस सिस्टम में रूस नई तरह की कई मिसाइलों को शामिल करने जा रहा है जो दुश्मन के किसी भी मिसाइल को मार गिराने में सक्षम होंगी। रूस का यह हथियार अपनी कैटेगरी में दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है। रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने एस- 300 और एस- 400s के स्टॉक को लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाने और अत्यधिक सटीक शॉर्ट-रेंज डिफेंस प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों से लैस करने की योजना को मंजूरी दी है। रूसी सेना के अनुसार, लॉन्च प्लेटफार्मों में इस बदलाव से स्थिति के आधार पर इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइलों को तुरंत स्विच करना संभव हो जाएगा।


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