Monday, 25 October 2021

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बीजिंग दक्षिण चीन सागर में ताइवान को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच अमेरिका ने भी इस इलाके में अपने एयरक्राफ्ट कैरियरों की मौजूदगी को बढ़ा दिया है। इस समय हर वक्त अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर इस इलाके में गश्त लगा रहे हैं। इसके अलावा ब्रिटेन का एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ और फ्रांस का युद्धपोत भी इस इलाके में समय समय पर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे मे चीन ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को खत्म करने के लिए अपने सबसे घातक हथियार बॉम्बर्स को और अधिक अपग्रेड किया है। अमेरिका की ताकत का प्रतीक हैं एच-6 एयरक्राफ्ट कैरियर्स अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को उसकी समुद्री ताकत का प्रतीक माना जाता है। अमेरिका के पास इस समय 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। ये सभी परमाणु शक्ति संचालित होने के कारण पूरी दुनिया में बिना रिफ्यूलिंग के गश्त लगाते रहते हैं। इनमें से हर एक एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ पूरी फ्लीट चलती है, जिसमें डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, माइन स्वीपर और कई पनडुब्बियां शामिल होती हैं। ये सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां पानी के अंदर और बाहर से आने वाले खतरों को कम करने और एयरक्राफ्ट कैरियर के ऑपरेशन में मदद करने का काम करती हैं। चीन के पास अंतरिक्ष से युद्धपोतों पर हमला करने वाला हथियार अमेरिका से बढ़ते खतरे को देखते हुए चीन ने कुछ दिन पहले ही ऑर्बिटल बम्बॉर्डमेंट सिस्टम का परीक्षण किया है। चीनी मीडिया ने इस परीक्षण की तुलना दुनिया की पहली सैटेलाइट के लॉन्चिंग जैसे ऐतिहासिक पल से की है। इस हथियार की खासियत है कि चीन अब जब चाहे तब अंतरिक्ष से परमाणु बम को धरती के किसी भी कोने में दाग सकता है। इसमें एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल है, जो समुद्र में दुश्मन के युद्धपोत को अंतरिक्ष से पलक झपकते ही खत्म कर सकती है। चीन की इस एंटी शिप मिसाइल को सोवियत काल में बने एच-6 बॉम्बर से फायर किया जा सकता है। कितना खतरनाक है चीन का H-6N फाइटर जेट द ड्राइव की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का H-6N विमान बेहद खतरनाक है और इसे तेजी से चलने वाले ड्रोन विमान से लेकर एंटी शिप मिसाइलों को ले जाने के लिए बनाया गया है। यह विमान क्रूज मिसाइलें भी दागने में सक्षम है। यह चीन के बमवर्षक विमान H-6K का उन्‍नत संस्‍करण है जो खुद भी अत्‍याधुनिक है। H-6K सोवियत संघ के Tu-16 बमवर्षक विमान पर आधारित है। चीन ने अब अपने H-6N विमान के लिए हवा से दागे जाने में सक्षम हाइपरसोनिक मिसाइलें बना रहा है। चीन ने हाल ही में अपने सैन्‍य परेड में भारी भरकम DF-17 मिसाइल का प्रदर्शन किया था। यह मिसाइल कितनी कारगर है, इसके बारे में अभी बहुत कम जानकारी है। हालांकि चीन निश्चित रूप से दुनिया को यह बताना चाहता है कि उसके पास पूरी तरह से सक्रिय हाइपरसोनिक मिसाइल है। चीन ने एच-6 एन में किए कई बदलाव चीन ने एच-6एन स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स में नए एवियोनिक्स और हथियारों के अलावा कई बुनियादी बदलाव किए हैं। इसमें चालक दल की संख्या 5 से घटाकर तीन कर दी गई है। इसके अलावा इन पायलटों के लिए इजेक्शन सीट भी लगाया गया है। जिससे ये पायलट विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के दौरान सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं। इस विशाल बॉम्बर से दुनिया की सबसे बड़ी हवा में दागी जाने वाली मिसाइल को फायर किया जा सकता है। इस मिसाइल का सबसे बड़ा शिकार एयरक्राफ्ट कैरियर्स को माना जा रहा है। चीन में इस मिसाइल को कैरियर किलर के नाम से जाना जाता है। अमेरिका, भारत के एयरक्राफ्ट कैरियर को तबाह कर सकता है चीन हाइपरसोनिक मिसाइल से लैस चीनी विमान सैंकड़ों या हजारों किलोमीटर की दूरी से अमेरिका के गुआम और वेक द्वीप समूह पर स्थित नेवल बेस और भारत के अंडमान नौसैनिक अड्डे को तबाह कर सकता है। यही नहीं यह चीनी मिसाइल समुद्र में दुश्‍मन के किसी भी युद्धपोत को पलक झपकते ही नष्‍ट कर सकती है। हाइपरसोनिक मिसाइलों के मामले में अमेरिका भी अभी चीन और रूस की मिसाइलों से काफी पीछे है। चीनी के इस मिसाइल के सामने आने के बाद अब दुनिया में हाइपरसोनिक मिसाइलों को बनाने की जंग तेज होने की आशंका तेज हो गई है। दुनिया में अभी तक रूस के एस-500 के अलावा किसी भी एयर डिफेंस सिस्‍टम में इसे रोकने की ताकत नहीं है। समुद्र में अमेरिकी बादशाहत पर मंडराया बड़ा खतरा अमेरिका और चीन में ताइवान समेत कई मुद्दों को लेकर विवाद चरम पर है। आए दिन यूएस नेवी के युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर चीन के नजदीक पहुंचते हैं। ताइवान पर खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को साउथ चाइना सी में तैनात कर रखा है। ऐसे में चीनी नेवी की इस कैरियर किलर हाइपरसोनिक मिसाइल से अमेरिकी नेवी को खतरा हो सकता है। ऐसे मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह दुश्मन को रिएक्ट करने के लिए सबसे कम समय देते हैं। जबकि बैलिस्टिक मिसाइल के लैंड और सी वैरियंट को लॉन्च करते ही दुश्मन को सूचना मिल जाती है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने 2019 में इस मिसाइल को CH-AS-X-13 का नाम दिया था। देखने में यह मिसाइल चीन के DF-17 जैसी लगती है क्योंकि इसके भी आगे का हिस्सा हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) जैसे दिखाई देता है। दुनिया के तीन देशों के पास ही ऐसे विमान दरअसल वर्तमान में केवल तीन देशों की सेना ही स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स विमानों का उपयोग कर रही हैं। ये हैं- अमेरिका, रूस और चीन। गौरतलब है कि तीनों देश पुराने बेड़े को बदलने के लिए नए चोरी-छिपे बमवर्षक विकसित कर रहे हैं। इसके अलावा, बहुत कम संभावना है कि कोई भी अन्य देश जल्द ही इस अमेरिकी-चीनी-रूसी तिकड़ी में शामिल होगा।


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