इस्लामबाद इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार डूबती जा रही है। शुक्रवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उससे पूरे देश की चिंता बढ़ गई है। वहीं, इमरान खान लगातार विश्व बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से कर्ज लेते जा रहे हैं। 31 दिसंबर, 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान पर कुल 115.756 अरब डॉलर का कर्ज था। पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 1.6 अरब डॉलर हुआ स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपनी नई रिपोर्ट में बताया है कि इस वर्ष अक्टूबर में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा बढ़कर 1.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा सितंबर की तुलना में काफी अधिक है। इसे पाकिस्तान की जीडीपी का 4.7 फीसदी बताया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इस साल चालू खाता घाटे को जीडीपी का दो से तीन फीसदी रखने का लक्ष्य बनाया था, लेकिन यह सभी सीमाओं को तोड़ते हुए लक्ष्य से लगभग दो गुनी ऊंचाई पर पहुंच गया है। इस कारण पाकिस्तान का आर्थिक घाटा बढ़ा पाकिस्तान में चालू खाता घाटा के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बढ़ते आयात को माना जा रहा है। कोरोना संकट के दौरान पाकिस्तान ने काफी बड़ी संख्या में सामानों का विदेशों से आयात किया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बताया है कि जुलाई से अक्टूबर तक पाकिस्तान का कुल आयात 66.3 फीसदी बढ़कर 23.484 अरब डॉलर हो गया है। पिछले साल यानी 2020 में जुलाई से अक्टूबर के दौरान यह आंकड़ा 14.118 अरब डॉलर था। क्या होता है चालू खाता घाटा चालू खाता, निर्यात और आयात के कारण विदेशी मुद्रा के प्रवाह को दर्शाता है। अगर यह नकारात्मक होता है तो इसे चालू खाता घाटा (CAD) कहते हैं और सकारात्मक होने पर इसे चालू खाता सरप्लस कहा जाता है। चालू खाता के जरिए मुख्य रूप से तीन तरह के लेनदेन किए जाते हैं। पहला- वस्तुओं व सेवाओं का आयात-निर्यात, दूसरा- कर्मचारियों व विदेशी निवेश से प्राप्त आय-खर्च, तीसरा- विदेशों से मिली अनुदान राशि, उपहार और विदेशों में बसे कामगारों के जरिए देश में आने वाला पैसा। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनैशनल की रिपोर्ट के मुताबिक देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इमरान सरकार को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अगले दो साल के अंदर 51.6 अरब डॉलर की विदेशी वित्तीय सहायता चाहिए। अखबार ने कहा कि साल 2021-22 में पाकिस्तान को 23.6 अरब डॉलर और वर्ष 2022-23 में 28 अरब डॉलर की जरूरत होगी। सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज वाले देशों में पाकिस्तान शामिल यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने पाकिस्तान के बारे में बहुत ही रूढ़िवादी अनुमान लगाए हैं। पाकिस्तानी अधिकारी अब लोन हासिल करने के लिए आईएमएफ के साथ अंतिम समझौता करने में जुटे हुए हैं। पाकिस्तान आईएमएफ से लोन लेना चाहता है ताकि अपनी विदेशी वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा कर सके। विश्वबैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बात को माना था कि पाकिस्तान दुनिया के उन 10 देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके ऊपर सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज है। पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग घटा रही कंपनियां इस बीच ऐसी आशंका जताई जा रही है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां पाकिस्तान की रेटिंग और ज्यादा गिरा सकती हैं जिससे उसके लिए इंटरनैशनल बांड जारी करके पैसा जुटा और ज्यादा महंगा हो जाएगा। पाकिस्तान अपने प्रॉजेक्ट को तेजी से पूरा नहीं कर पा रहा है जिसकी वजह से उसके विश्वबैंक और एडीबी से पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से अब आईएमएफ पाकिस्तान पर कड़ी शर्तें लाद रहा है।
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