वॉशिंगटन/ढाका शेख हसीना के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते लगातार बेहतर होते जा रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बांग्लादेश की आजादी के मौके पर ढाका की यात्रा भी की थी। एक तरफ भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध नई ऊंचाईयों को छू रहे हैं, वहीं हिंदुस्तान का दोस्त अमेरिका शेख हसीना सरकार से नाराज है। अमेरिका बांग्लादेश के खिलाफ लगातार सख्त काईवाई कर रहा है जो भारत के लिए भी खतरा बन सकता है। आइए समझते हैं क्या है पूरा मामला..... भारतीय विदेश मंत्री हर्ष वर्द्धन श्रंगला ने हाल ही में कहा था कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इस गहराती दोस्ती के बीच अमेरिका लगातार बांग्लादेश के खिलाफ ऐक्शन ले रहा है जिसे भारत भी अनदेखा नहीं कर सकता है। शेख हसीना सरकार के खिलाफ अमेरिका का गुस्सा उस समय देखने को मिला जब उसने लोकतंत्र को लेकर आयोजित दुनिया के शीर्ष नेताओं की बैठक में बंग्लादेश को नहीं बुलाया। इसके विपरीत अमेरिका ने पाकिस्तान को बुलाया जहां सेना अप्रत्यक्ष रूप से शासन कर रही है। बांग्लादेश पुलिस के आला अफसरों के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध यही नहीं पाकिस्तान ने चीन को खुश करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के न्योते को ठुकराकर बाइडन प्रशासन को बड़ा झटका दे दिया। पाकिस्तान में हिंदुओं और ईसाइयों के धर्मस्थलों पर लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन फिर भी बाइडन प्रशासन ने इमरान सरकार को बुलावा भेजा था। इस शिखर बैठक के ठीक बाद अमेरिका ने कई देशों के 15 लोगों और 10 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया। इन 15 लोगों में 7 बांग्लादेश पुलिस के आला अफसर भी हैं। यही नहीं बांग्लादेश की सेना के पूर्व प्रमुख जनरल अजीज अहमद का अमेरिका का वीजा भी रद कर दिया गया। जनरल अजीज पर भ्रष्टाचार और आपराधिक तत्वों के साथ संपर्क रखने का आरोप था। अमेरिका ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से बांग्लादेश में इस्लामिक विचारधारा को मानने वाला विपक्ष एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो सकता है। वहीं बांग्लादेश के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंधों की वजह से अब अन्य पुलिस अधिकारी शेख हसीना सरकार को गिराने के लिए प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों के खिलाफ जोरदार कार्रवाई करने से परहेज कर सकते हैं। इस बीच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कट्टर इस्लामिक संगठनों के सड़कों पर होने वाले हिंसक प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस की सख्त काईवाई ही विकल्प है। कट्टरपंथी भारत और हिंदुओं के खिलाफ करते हैं दुष्प्रचार ये इस्लामिक कट्टरपंथी मानते हैं कि शेख हसीना सरकार धर्म को नहीं मानती है और उसे सड़कों पर प्रदर्शन करके तथा आतंकी हमले करके गिराया जा सकता है। इसी वजह से शेख हसीना को हिंदुओं के खिलाफ हमले को रोकने के लिए भारी तादाद में सुरक्षाबलों को तैनात करना पड़ा था। ये कट्टरपंथी भारत और हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहते हैं। वे सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी को भारत की पैदाइश करार देते हैं। वे अल्पसंख्यकों के साथ उसी तरह से बर्ताव करते हैं जैसे पाकिस्तानी सेना साल 1971 के पहले करती थी। चर्चित लेखक लारेंस लिफ्सचुल्ज का मानना है कि साल 1975 में बांग्लादेश में हुए विद्रोह में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ था। इसमें बंगबंधु शेख मुजीबुरहमान के परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। इसमें बंगबंधु की दो बेटियां बच गई थी जिसमें से एक शेख हसीना अभी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं। बांग्लादेश के सैन्य शासन के अंतिम दिनों में अमेरिका बांग्लादेश में सैन्य अड्डा बनाना चाहता था लेकिन साल 1996 में सत्ता में आने के बाद शेख हसीना ने इस अमेरिकी सैन्य अड्डे को खारिज कर दिया था। शेख हसीना ने कहा कि वह ऐसे देश को सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति नहीं देंगी जो उनकी पिता की हत्या के लिए जिम्मेदार है और बांग्लादेश की आजादी का विरोध करता था। भारत के लिए अमेरिका के नक्शे कदम पर चलना संकट का सबब विशेषज्ञों का कहना है कि साल 1971 की स्थिति अब बदल गई है। चीन बांग्लादेश का उतना ही गहरा मित्र हो गया है जितना कि भारत है। शेख हसीना भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने का बहुत जोखिम भरा काम कर रही हैं। अमेरिका शेख हसीना के चीन से दोस्ती बढ़ाने से भी नाराज है। यह ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत अमेरिका का रणनीतिक पार्टनर है और बाइडन प्रशासन अगर शेख हसीना के खिलाफ कार्रवाई करता है तो भारत इसका पुरजोर विरोध नहीं कर पाएगा। यही नहीं अफगानिस्तान में तालिबान राज आने के बाद भारत नहीं चाहेगा कि उसके पूर्वी मोर्चे पर भी संकट बढ़े। इससे भारत के हितों को काफी नुकसान पहुंच सकता है। शेख हसीना सरकार ने पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी गुटों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करके भारत की सुरक्षा चिंताओं को काफी हद तक हल कर दिया है। यही नहीं बांग्लादेश पूर्वोत्तर में जाने के लिए रास्ता भी दे रहा है। ऐसे में भारत के लिए बांग्लादेश अमेरिका के नक्शे कदम पर चलना संकट का सबब बन जाएगा।
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