Monday, 28 June 2021

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वॉशिंगटन कोरोना महामारी में रोज-रोज आ रहे वेरिएंट के खतरे के बीच फाइजर और मॉडर्ना की वैक्‍सीन को लेकर अच्‍छी खबर आई है। एक ताजा शोध में पता चला है कि फाइजर और मॉडर्ना की mRNA तकनीक पर आधारित कोरोना वैक्‍सीन वायरस के खिलाफ जीवनभर सुरक्षा दे सकती है। इस दौरान यह भी सामने आया है कि इन दोनों वैक्‍सीन की दो डोज से वायरस के खिलाफ बेहद मजबूत और 'लगातार' रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है। इसके अलावा शोध के दौरान कोरोना वायरस के दो वेरिएंट के खिलाफ इन वैक्‍सीन ने कोरोना के दो वैरिएंट के खिलाफ उच्‍च स्‍तर की ऐंटीबॉडी भी पैदा की। इस शोध से अब यह निष्‍कर्ष निकल रहा है कि फाइजर और मॉडर्ना की कोरोना वैक्‍सीन लगवाने वालों को कई साल या जीवनभर इम्‍यूनिटी मिल सकती है। यही नहीं इन वैक्‍सीन को लगवाने वाले लोगों को बूस्‍टर डोज की भी जरूरत नहीं रहेगी। ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वेरिएंट के खिलाफ कारगर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉक्‍टर अली इल्‍लेबेडी ने कहा, 'इस वैक्‍सीन से हमें कितने समय तक इम्‍यूनिटी मिलती है, इसको लेकर यह शुभ संकेत है।' यह शोध नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के दौरान 14 लोगों को भर्ती किया गया था। इसमें से 8 लोग पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके थे। शोधकर्ताओं ने इस दौरान लिंफ नोड्स पर नजर रखी जिससे एक तरह का इम्‍यून सिस्‍टम सेल पैदा होती है, इसे मेमोरी बी सेल कहा जाता है। मेमरी बी कोशिकाएं वायरस को अन्‍य इम्‍यून कोशिकाओं के सहारे मारने में मदद करता है। ये कोशिकाएं खून के अंदर कई सालों तक रह सकती हैं। इम्‍यून सिस्‍टम अगर कोई और संक्रमण होता है तो इन कोशिकाओं को बुला सकता है। इस टीम ने लिंफ नोड्स से तीन, चार, पांच, सात और 15 सप्‍ताह पर नमूने लिए। इल्‍लेबेडी ने कहा कि वैक्‍सीन की प्रतिक्रिया लगने के बाद भी 4 महीने बाद भी काफी अच्‍छी है। शोध में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्‍सीन ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वेरिएंट के खिलाफ बेहद कारगर मिली है। शोध में अभी डेल्‍टा वेरिएंट के खिलाफ जांच नहीं हुई है।


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कराची पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत की विधानसभा के अंदर सोमवार को एक अजीब वाकया देखने को मिला। पीएम इमरान खान नियाजी की पार्टी पीटीआई के विधायक सिंध विधानसभा के अंदर चारपाई लेकर पहुंच गए। पीटीआई के विधायकों ने चारपाई के जरिए 'लोक‍तंत्र का जनाजा' निकालने का प्रयास किया। इससे पहले विधानसभा सत्र के दौरान पीटीआई के सदस्‍यों को बोलने का मौका नहीं दिया गया था। इसका विरोध करने के लिए इमरान खान की पार्टी के विधायक चारपाई लेकर सदन के अंदर घुस गए। इस दौरान उन्‍होंने 'लोकतंत्र का जनाजा' के नारे भी लगाए। इस बीच सिंध विधानसभा के अध्‍यक्ष आगा सिराज खान दुर्रानी ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि वे चारपाई को सदन के अंदर से लेकर जाएं। उन्‍होंने विधायकों से अपील की कि वे सदन की गरिमा को बनाए रखें। स्‍पीकर ने कहा कि पीटीआई के विधायकों ने सदन की शुचिता का उल्‍लंघन किया है। इस पूरे विवाद के दौरान प्रांतीय मंत्री नसीर हुसैन शाह और मुकेश कुमार चावला पत्रकारों की सुरक्षा वाला विधेयक पेश किया जिसे मंजूरी मिल गई। मुकेश कुमार चावला ने इस चारपाई विरोध के खिलाफ जोरदार पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि यह इमरान खान की पीटीआई है जिसने लोकतंत्र की हत्‍या की है। इसके बाद सदन के अंदर जमकर हंगामा होने लगा। इसको देखते हुए विधानसभा के सत्र को 29 जून तक के लिए स्‍थगित कर दिया गया। इस पूरी घटना के वीडियो में नजर आ रहा है कि पीटीआई के विधायक चारपाई को स्‍पीकर की कुर्सी की ओर ले जा रहे थे। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने ऐसा होने नहीं दिया और चारपाई को सदन के बाहर किया गया।


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इस्‍लामाबाद अफगानिस्‍तान के भविष्‍य को लेकर भारत और तालिबान नेताओं के बीच बातचीत से पाकिस्‍तान बौखला गया है। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोइद युसूफ ने भारत के खिलाफ जहर उगला है। उन्‍होंने कतर में तालिबान के साथ भारत के बातचीत को 'बेशर्मी' करार दिया है। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले तीन सप्‍ताह में दो बार कतर की राजधानी में तालिबान नेताओं के साथ बातचीत की है। पाकिस्‍तानी टीवी चैनल डॉन न्‍यूज के साथ बातचीत में मोइद ने कहा कि भारत ने अफगानिस्‍तान में तालिबान के खिलाफ अभियान का लगातार समर्थन किया है। इस मुलाकात पर पाकिस्‍तान के विचार के बारे में उन्‍होंने कहा, 'मैं यह पूछना चाहूंगा कि किस नैतिकता के आधार पर भारत के शीर्ष अध‍िकारी ने वहां पर तालिबान के साथ बैठक की। क्‍या उन्‍होंने शर्म महसूस नहीं की।' 'यह मुलाकात शर्म का विषय है न कि रणनीतिक कदम' पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, 'भारतीय चाहते हैं कि तालिबान सदस्‍य रोज अफगानिस्‍तान में मारे जाएं। भारतीय लगातार तालिबान के खिलाफ अभियान के लिए पैसा देते रहते हैं। आज वे बातचीत के लिए वहां पहुंच गए हैं।' उन्‍होंने कहा कि तालिबान के साथ भारतीय नेता की यह मुलाकात शर्म का विषय है न कि रणनीतिक कदम। मोइद ने दावा किया कि जिन तालिबान नेताओं के साथ भारतीय नेता ने मुलाकात की है, वे मूर्ख नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान अमेरिका की वापसी के बीच तालिबान नेताओं के साथ भारत के मुलाकात से चिंतित नहीं है। मोइद ने कहा कि भारत के साथ पर्दे के पीछे से कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्‍होंने कहा, 'भारत ने हमसे संपर्क किया था कि वे संबंधों को ठीक करना चाहते हैं और हमने उनसे कश्‍मीर में अगस्‍त 2019 के पहले की स्थिति को बहाल करने के लिए कहा था। हम भारत के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।' भारतीय अधिकारियों ने दोहा की 'गुपचुप' यात्रा की इससे पहले कतर के नेताओं के हवाले से आई खबरों में कहा गया था कि भारतीय अधिकारियों ने दोहा की 'गुपचुप' यात्रा की थी ताकि वहां पर मौजूद तालिबान नेताओं के साथ बैठक की जा सके। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अरिंदम बागची ने भी कहा था कि भारत अफगानिस्‍तान के 'विभिन्‍न धड़ों' के साथ संपर्क में है। इस बीच तालिबान ने कहा है कि वे अपने पड़ोसी देश भारत और क्षेत्र के अन्‍य देशों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहने में विश्‍वास करते हैं। तालिबान ने यह भी कहा कि कोई भी देश अपने पड़ोसी को नहीं बदल सकता है। तालिबान प्रवक्‍ता सुहैल शाहीन ने भारत और कश्‍मीर को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में ये बातें कहीं। सुहैल शाहीन ने कहा, 'पाकिस्‍तान हमारा पड़ोसी देश है। दोनों देशों के साझा इतिहास और मूल्‍य हैं। भारत भी हमारा क्षेत्रीय देश है। कोई भी देश अपने पड़ोसी या अपने क्षेत्र को नहीं बदल सकता है। हमें निश्चित रूप से इस वास्‍तविकता को स्‍वीकार करना होगा और शांतिपूर्ण सहअस्तित्‍व के साथ रहना होगा। यह हम सभी के हित में है।'


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वारसा पोलैंड के संपत्ति क्षतिपूर्ति नियमों में बदलाव को लेकर इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जिसके जवाब में पोलैंड ने इजरायली राजदूत को तलब किया है। पोलैंड के इस ऐक्शन को देखते हुए इजरायल ने भी उसके राजदूत को बुलाकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इजरायल और यहूदी संगठनों का कहना है कि पोलैंड के इस कानून से होलोकास्ट और कम्युनिस्ट शासन के दौरान जब्त संपत्ति या मुआवजे के लिए यहूदी दावा नहीं कर सकेंगे। इजरायली राजदूत ने पोलैंड के उप विदेश मंत्री से मुलाकात की इजरायल के प्रभारी राजदूत ताल बेन-आरी याहलून ने सोमवार को पोलैंड के विदेश उपमंत्री पावेल जाबलोंस्की से मुलाकात की जिन्होंने कहा कि नए नियमों से संपत्ति दावे पर रोक नहीं है जिन्हें अदालतों के माध्यम से किया जा सकता है। पोलैंड ने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड पर कब्जा के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा जब्त संपत्तियों के लिए वह जवाबदेह नहीं होगा। इ जरायल ने भी पोलैंड के राजदूत को तलब किया जाबलोंस्की ने बाद में कहा कि बेन-आरी यालून ने पिछले हफ्ते दूतावास की तरफ से जारी बयान को दोहराया जिसने नए नियमों को अनैतिक बताया और कहा कि उनका द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर होगा। इजरायल में पोलैंड के राजदूत मारेक मागीरोवस्की रविवार को इजरायल के विदेश मंत्रालय में गए और नए नियमों के बारे में जानकारी दी जिन्हें 2015 में एक शीर्ष सांविधानिक अदालत के फैसले के मुताबिक बनाया गया है। मालिकाना हक वाले कानून में बदलाव ला रहा पोलैंड पोलैंड की संसद 30 वर्षों के बाद मालिकाना हक एवं अन्य प्रशासनिक निर्णयों से रोकने के लिए बदलाव ला रही है। इसने कहा कि यह क्षतिपूर्ति प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी एवं अनियमितता के कारण ये बदलाव किए जा रहे हैं। बदलावों को सीनेट और राष्ट्रपति से मंजूरी मिलना जरूरी है। वर्ल्ड जेविश रेस्टीट्यूशन ऑर्गेनाइजेशन ने कहा कि वह पोलैंड के कानून से काफी निराश है। इस समूह के प्रमुख गिडोन टेलर ने कहा कि इस कानून से प्रभावित पोलैंड में घर या दुकान या फैक्टरी को जर्मनी ने नहीं लिया था, इसे पोलैंड ने लिया था। यह पोलैंड में है और इससे 70 वर्षों से अधिक समय से पोलैंड को फायदा हो रहा है। इस तथ्य को समझने का समय आ गया है और पोलैंड को इससे पीड़ित लोगों को न्याय देना चाहिए। द्वितीय विश्व युद्ध से पहले यूरोप में सबसे अधिक संख्या में यहूदी समुदाय पोलैंड में रहता था और यहां उसकी आबादी करीब 35 लाख थी। नाजी जर्मनी के हमले में मारे गए यहूदियों की संपत्ति पर विवाद नाजी जर्मनी के कब्जे के दौरान होलोकास्ट में अधिकतर यहूदी मारे गए और उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई। विश्व युद्ध के बाद पोलैंड की कम्युनिस्ट सरकार ने वारसा एवं अन्य शहरों में उन संपत्तियों को और गैर यहूदियों की संपत्तियों को भी जब्त कर लिया। 1989 में कम्युनिस्ट सरकार के खात्मे के बाद क्षतिपूर्ति दावा का दरवाजा खुला।


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लंदन पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में वांछित अब अपने वकील के जरिए कैरिबियाई लोगों को भड़का रहा है। मेहुल के वकील माइकल पोलक ने उसके एंटीगुआ का नागरिक होने के नाते कैरीबियाई समुदाय से सोमवार को हस्तक्षेप करने की अपील की। पोलक ने दावा किया कि चोकसी को एंटीगुआ में एक विला में बुलाया गया, फिर उसकी पिटाई की गई। उसे एक व्हीलचेयर से बांध दिया गया और समुद्र के रास्ते डोमिनिका की ओर भेज दिया गया। एंटीगुआ के कानून का उल्लंघन बताया वकील ने यह भी दावा किा कि यह एंटीगुआ के कानून का उल्लंघन है और कैरीबियाई समुदाय के लिए एक बड़ी परीक्षा है। लंदन के वकील पोलक ने कहा कि चोकसी को एंटीगुआ से अपहरण कर डोमिनिका ले जाए जाने की घटना ने कैरीबियाई देशों की ओर विश्व का ध्यान आकृष्ट किया और हमने इस संगठन (कैरीबियाई देशों के संगठन कैरीकॉम) से इस मानवधिकार उल्लंघन के बारे में अब तक कुछ नहीं सुना है। कैरिकॉम के महासचिव से मिलेंगे मेहुल के वकील उन्होंने कहा कि संगठन के महासचिव इर्विन लारोस्क से मिलने के लिए एक अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि चोकसी डोमिनिका में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोपों का सामना कर रहा है और वह 30 मई से अस्पताल में भर्ती है। उसे भारत लाने के लिए सरकारी स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं। पीएनबी घोटाले में है वांछितमेहुल चोकसी सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से लगभग 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के एक मामले में भारत में वांछित है। वह वर्ष 2018 से एंटीगुआ एवं बारबुडा में नागरिक के तौर पर रह रहा है और वहां से 23 मई को रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था। डोमिनिका ने मेहुल को घोषित किया है अवैध प्रवासी डोमिनिका की सरकार ने 25 मई को एक आदेश जारी कर मेहुल चोकसी को अवैध अप्रवासी घोषित कर दिया था। डोमिनिका के मिनिस्टर फॉर नेशनल सिक्योरिटी एंड होम अफेयर्स Rayburn Blackmoore ने पुलिस प्रमुख को यह आदेश जारी करते हुए कहा था कि चोकसी को देश से बाहर करने के लिए देश के कानून के मुताबिक कदम उठाए जाएं।


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लंदन दुनिया के प्रसिद्ध टेनिस टूर्नामेंट विंबलडन ग्रैंड स्लैम के दौरान लोगों के खड़े होकर ताली बजाने का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस क्लिप में लोग एक महिला की तरफ देखकर ताली बजाते हुए दिखते हैं। जबकि उस महिला के चेहरे पर कोई भाव नहीं दिखता है। दरअसल, यह महिला कोई और नहीं बल्कि प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट सारा गिल्बर्ट हैं। इन्होंने ही ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन को डेवलप किया था। एस्ट्राजेनेका वैक्सीन बनाने वाली वैज्ञानिक को देख खुश हुए लोग विंबलडन टूर्नामेंट के आयोजनकर्ताओं ने इस साल के शुरुआती मैचों के दौरान एनएचएस स्टाफ और कोरोना वायरस वैक्सीन के डेवलपर्स को वीआपी रॉयल बॉक्स में बैठकर मैच देखने के लिए बुलाया था। इस दौरान ब्रिटिश वायरोलॉजिस्ट सारा गिल्बर्ट भी मैच देखने पहुंचीं। डिफेंडिंग चैंपियन नोवाक जोकोविच ने जैसे ही 19 साल के ब्रिटिश खिलाड़ी जैक ड्रेपर को सर्विस करनी चाही तभी लाउडस्पीकर पर एक अनाउसमेंट हुआ। कोरोना वैक्सीन के डेवलपर्स को देख खड़े होकर लोगों ने बजाई ताली उद्घोषक ने भीड़ को बताया कि आज रॉयल बॉक्स में कोरोना वैक्सीन बनाने वाले डेवलपर्स और नेशनल हेल्थ सर्विस के लोग बैठे हुए हैं। जिसके बाद वहां मौजूद दर्शकों ने ताली बजाना शुरू कर दिया। लगभग एक मिनट से भी ज्यादा समय तक सभी दर्शकों ने खड़े होकर ताली बजाई। कमेंट्री कर रहे बोरिस बेकर ने कहा कि इस चैंपियनशिप को शुरू करने से पहले यह बहुत ही भावात्मक क्षण है। विंबलडन के दौरान कोरोना वॉरियर्स का सम्मान पिछले साल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण विंबलडन को रद्द कर दिया गया था। इस साल जब इस ग्रैंड स्लैम को फिर से शुरू किया गया, तब विंबलडन के आयोजकों ने कोरोना वाॉरियर्स के सम्मान में उनके लिए अगल वीआईपी सीट की व्यवस्था की। इस दौरान कैप्टन टॉम मूर की बेटी हन्ना इनग्राम-मूर का भी शानदार स्वागत किया गया। टॉम मूर ने इस साल की शुरुआत में 100 साल की उम्र में एनएचएस के लिए 33 मिलियन पाउंड की राशि जुटाई थी। इस दौरान उनकी मृत्यु भी हो गई थी। सारा गिल्बर्ट के बारे में जानिए सारा गिल्बर्ट आयरिश मूल की ब्रिटिश वैज्ञानिक हैं। उनका जन्म अप्रैल 1962 में हुआ था। उन्होंने अपने करियर के शुरूआती दिनों में मलेरिया की वैक्सीन खोजने वाली टीम के साथ काम किया था। इसके बाद उन्होंने मलेरिया और ईबोला जैसे खतरनाक बीमारियों की वैक्सीन बनाने में भी अपना योगदान दिया। उनके काम को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने कोरोना वैक्सीन बनाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी।


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लंदन भूमध्य सागर और काला सागर में रूस के साथ जारी तनाव के बीच ब्रिटिश सेना को करारा झटका लगा है। ब्रिटेन के चीफ ऑफ ऑर्मी स्टाफ जनरल सर निक कार्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जिसके बाद रक्षा मंत्री बेन वालेस और कई शीर्ष सैन्य प्रमुख क्वांरटीन हो गए हैं। ऐसे नाजुक मौके पर की टॉप लीडरशिप के कोरोना की चपेट में आने से तहलका मचा हुआ है। कुछ दिन पहले ही रूसी नौसेना ने ब्रिटिश युद्धपोत एचएमएस डिफेंडर को खदेड़ा था। इस समय ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ से 30 किमी की दूरी पर रूसी नौसेना युद्धाभ्यास भी कर रही है। 10 दिन क्वारंटीन रहेंगे सभी सैन्य अधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के टेस्ट एंड ट्रेस ऐप की तरफ से कैबिनेट मंत्री और रॉयल नेवी, रॉयल एयरफोर्स और रणनीतिक कमान के प्रमुख को सर निक के संपर्क में आने के बाद 10 दिनों की अवधि के लिये घर पर ही रहने को कहा गया है। द डेली टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, सर निक के अधीनस्थ और ब्रिटिश सेना के प्रमुख जनरल सर मार्क कार्लटन-स्मिथ ने भी सप्ताहांत पृथकवास में बिताया और उन्हें पीसीआर जांच के नतीजों का इंतजार था। उन्होंने एक बैठक में हिस्सा लिया था हालांकि कमांडर से भौतिक दूरी बरकरार रखी थी। रक्षामंत्री समेत कई लोग क्वारंटीन हुए रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि नियमित कोविड-19 जांच के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ संक्रमित पाए गए। प्रवक्ता ने कहा, “उनके साथ पिछले हफ्ते वरिष्ठों की बैठक में मौजूद लोग सरकारी दिशानिर्देश के अनुरूप स्व-पृथकवास में हैं जिनमें रक्षा मंत्री भी शामिल हैं। कमांडर के पृथकवास में रहने के दौरान सैन्य गतिविधियों को संचालन डिजिटल तरीके से होगा। बैठक के अगले दिन संक्रमित पाए गए ब्रिटिश सीडीएस जिस बैठक की चर्चा हो रही है वह गुरुवार को सर निक द्वारा ऑक्सफोर्डशायर के श्रीवेनहम स्थित रक्षा अकादमी में हुई थी। इसमें बेन वालेस, डिफेंस स्टाफ के उपाध्यक्ष एडमिरल सर टिम फ्रेजर और सर मार्क समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बताया जा रहा है कि इस बैठक में सामाजिक दूरी का पूरा पालन किया गया था, मगर कुछ लोग फिर भी सर निक के संपर्क में आए थे। सर निक बैठक के अगले दिन ही संक्रमित पाए गए थे। बैठक के बाद शुक्रवार को वह चाल्के वैली हिस्ट्री फेस्टिवल में भी दिखे थे। भूमध्य सागर में ब्रिटेन को उकसा रहा है रूस रूसी नौसेना भूमध्य सागर में ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ की तैनाती स्थल से मात्र 30 किलोमीटर दूर नौसैनिक अभ्यास कर रही है। इसमें रूस के गई जंगी युद्धपोत, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां हिस्सा ले रही हैं। ब्रिटेन को आशंका है कि युद्धाभ्यास की आड़ में रूसी नौसेना के लड़ाकू विमान 30 किलोमीटर दूर तैनात उसके एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर को परेशान कर सकते हैं। यही कारण है कि ब्रिटेन ने भी अपने लड़ाकू विमानों को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। काला सागर में ब्रिटिश युद्धपोत को खदेड़ चुका है रूस रूस ने कुछ ही दिन पहले काला सागर में ब्रिटिश युद्धपोत एचएमएस डिफेंडर के ऊपर फायरिंग की थी। रूस ने दावा किया था कि ब्रिटेन का यह युद्धपोत उसकी जलसीमा में घुस आया है। वहीं, ब्रिटेन ने कहा था कि उसका युद्धपोत यूक्रेन की जलसीमा में था। दरअसल, क्रीमिया पर कब्जे के बाद से रूस ने पूरे इलाके की घेराबंदी करके रखी हुई है।


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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...