वॉशिंगटन चीन ने सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (सीएमसी) की शक्तियां बढ़ाने के लिए अपने राष्ट्रीय रक्षा कानून में एक जनवरी से बदलाव किया है। इस कमिशन के अध्यक्ष चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। अब ‘राष्ट्रीय हित’ देस में और विदेश में यह कमिशन सैन्य और नागरिक संसाधन जुटा सकेगा। अब सेना के लिए नीति बनाने में स्टेट काउंसिल की भूमिका कम हो जाएगी और सीएमसी के पास ज्यादा ताकत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में सेना अब और ताकतवर हो जाएगी। चीन मीडिया के मुताबिक सशस्त्र बलों को तैनात करने के आधार के रूप में पहली बार ‘विकास हितों’ को कानून में जोड़ा गया है। दो साल के विचार-विमर्श के बाद नैशनल पीपुल्स कांग्रेस ने 26 दिसंबर को संशोधन पारित किया। इस कानून के तहत अब सरकारी कंपनियां और प्राइवेट फर्म मिलकर डिफेंस तकनीकों, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष के विषय पर फोकस करेंगी। सैन्य कानून विशेषज्ञ जेंग झिपिंग का कहना है कि स्टेट काउंसिल अब सेना का साथ देने वाली एजेंसी बन गई है। यह जर्मनी, इस्राइल और फ्रांस जैसे देशों के उलट है। वहां, सैन्य बल नागरिकों के नेतृत्व के अधीन होते हैं। ताइपे के सैन्य विशेषज्ञ ची ली-येई का कहना है कि इस कानून के तहत अब चीन सेना का इस्तेमाल ताइवान में लोकतंत्र की मांग को कुचलने के लिए करेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून चीन के सभी लोगों के लिए चेतावनी है कि वे युद्ध के लिए तैयार रहें। बता दें कि पूर्वी लद्दाख और ताइवान स्ट्रेट में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। लद्दाख में जहां चीन भारतीय जमीन पर कब्जे की ताक में है, वहीं साउथ चाइना सी में चीन में ताइवान पर कब्जा करना चाहता है। ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच जुबानी जंग छिड़ चुकी है। पिछले दिनों चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने ताइवान जलडमरूमध्य में गुरुवार की सुबह अपने दो जंगी जहाजों के जरिए ‘शक्ति का प्रदर्शन’ किया। चीन के इस आरोप पर अमेरिकी नौसेना ने भी करार जवाब दिया है। अमेरिकी नौसेना ने कहा है कि विध्वंसक पोत यूएसएस एस मैककेन और यूएसएस कर्टिस विल्बर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ताइवान जलडमरूमध्य मार्ग का इस्तेमाल किया। अमेरिकी नौसेना ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में कहा है कि पोत की आवाजाही मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को दिखाती है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने घटनाक्रम को ‘शक्ति का प्रदर्शन’ और भड़काऊ कदम बताते हुए कहा कि इससे ताइवान के स्वतंत्र बलों को गलत संकेत गया और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचा है।
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