Saturday, 17 April 2021

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इंसान अब धरती के बाहर शहर बसाने के लिए अपनी पूरी ताकत से जुट गया है। मानवता को लालग्रह मंगल में उम्‍मीद की किरण नजर आ रही है। अमेरिका, चीन, यूएई के अंतरिक्ष यान एलियन जीवन की तलाश में मंगल ग्रह तक पहुंच गए हैं। अब इंसानों को मंगल ग्रह तक भेजने की तैयारी हो रही है। मंगल ग्रह के इस सफर में इंसान को सात महीने लग जाएंगे। एक छोटे से कैप्‍सूल के अंदर इतने लंबे समय तक इंसान को अंतरिक्ष की मुसीबतों के बीच जाना होगा। अगर वे बच भी गए तो उन्‍हें मंगल ग्रह के बेहद खराब पर्यावरण का सामना करना होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इंसान ने 60 साल पहले जब से रॉकेट जरिए अंतरिक्ष में सफर शुरू किया है तब से अब तक 21 अंतरिक्षयात्रियों की जान जा चुकी है। अब मंगल ग्रह के लंबे सफर में और ज्‍यादा अंतरिक्षयात्रियों के मरने की आशंका है। इस लंबे सफर में अगर कोई अंतरिक्ष यात्री मर गया तो क्‍या होगा? क्‍या उसे साथी अंतरिक्ष यात्री खा जाएंगे? आइए जानते हैं क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ....

NASA Mars Mission Astronauts: लाल ग्रह पर इंसानी बस्तियां बसाने के लिए एलन मस्‍क समेत दुनिया के कई देशों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। इस बीच आशंका जताई जा रही है कि अगर मंगल ग्रह के रास्‍ते में किसी अंतरिक्षयात्री की मौत हो गई तो उसके शव का क्‍या होगा?


NASA Mars Mission: मंगल ग्रह के रास्ते में अगर गई जान...क्‍या पकाकर खा जाएंगे साथी अंतरिक्षयात्री ?

इंसान अब धरती के बाहर शहर बसाने के लिए अपनी पूरी ताकत से जुट गया है। मानवता को लालग्रह मंगल में उम्‍मीद की किरण नजर आ रही है। अमेरिका, चीन, यूएई के अंतरिक्ष यान एलियन जीवन की तलाश में मंगल ग्रह तक पहुंच गए हैं। अब इंसानों को मंगल ग्रह तक भेजने की तैयारी हो रही है। मंगल ग्रह के इस सफर में इंसान को सात महीने लग जाएंगे। एक छोटे से कैप्‍सूल के अंदर इतने लंबे समय तक इंसान को अंतरिक्ष की मुसीबतों के बीच जाना होगा। अगर वे बच भी गए तो उन्‍हें मंगल ग्रह के बेहद खराब पर्यावरण का सामना करना होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इंसान ने 60 साल पहले जब से रॉकेट जरिए अंतरिक्ष में सफर शुरू किया है तब से अब तक 21 अंतरिक्षयात्रियों की जान जा चुकी है। अब मंगल ग्रह के लंबे सफर में और ज्‍यादा अंतरिक्षयात्रियों के मरने की आशंका है। इस लंबे सफर में अगर कोई अंतरिक्ष यात्री मर गया तो क्‍या होगा? क्‍या उसे साथी अंतरिक्ष यात्री खा जाएंगे? आइए जानते हैं क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ....



​धरती से मंगल ग्रह का रास्‍ता 17 करोड़ मील लंबा
​धरती से मंगल ग्रह का रास्‍ता 17 करोड़ मील लंबा

मंगल ग्रह के सफर में अगर कोई चालक दल का सदस्‍य मर जाता है तो उसके शव को पृथ्‍वी पर वापस लाने के लिए कई महीने या कई साल लग सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष में किसी यात्री की मौत हो गई तो शव को नष्‍ट करने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं। इसके तहत शव को अनंत अंतरिक्ष में छोड़ देना या मंगल ग्रह पर दफन करना शामिल है। हालांकि वे कहते हैं कि सतह को खराब होने से बचाने के लिए शव को पहले मंगल ग्रह पर जलाना होगा। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि अंतरिक्ष में सबसे खराब स्थिति में जब खाना खत्‍म हो गया हो तो अंतरिक्ष में खुद को जिंदा रखने के लिए केवल एक ही चीज खाने योग्‍य बची रहेगी, वह है अपने दोस्‍त का शव। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी की मंगल ग्रह के 17 करोड़ मील के रास्‍ते में मौत हो जाती है तो शव को तब तक उसे कोल्‍ड स्‍टोरेज या फ्रीज में रखा जा सकता है, जब तक कि अंतरिक्ष यान उतर नहीं जाता है।



​एलन मस्‍क ने कहा था, मंगल जा रहे हो तो मरने को तैयार रहो
​एलन मस्‍क ने कहा था, मंगल जा रहे हो तो मरने को तैयार रहो

लाल ग्रह पर शहर बसाने का सपना देखने वाले स्‍पेसएक्‍स कंपनी के सीईओ और अरबपति बिजनसमैन एलन मस्‍क ने कहा था, 'अगर आप मंगल ग्रह पर जाना चाहते हो तो मरने के लिए तैयार रहो।' अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अभी तक अंतरिक्ष में हुई मौत के लिए कोई प्रोटोकॉल नहीं बनाया है लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसे कोल्‍ड स्‍टोरेज में रखा जा सकता है। अंतरिक्ष में फ्रीज पृथ्‍वी की तुलना में बेहद अलग तरीके का होगा। इसमें शव को एक कैप्‍सूल के अंदर रखा जाएगा जहां अंतरिक्ष में यह बर्फ में ढंक जाएगा। हालांकि अगर अंतरिक्ष में शव ठंडा रखना विकल्‍प नहीं होगा तो बचे हुए चालक दल के सदस्‍य अपने मरे हुए साथी को अंतरिक्ष में छोड़ सकते हैं। नासा की वैज्ञानिक कैथरिन कोनले ने पाप्‍युलर साइंस मैगजीन से बातचीत में कहा कि इस संबंध में अभी नासा या किसी और की ओर से कोई दिशानिर्देश नहीं है जिसके तहत अंतरिक्ष में छोड़कर साथी यात्री को दफना दिया जाए। हालांकि इससे शव के अंतरिक्ष यान से टकराने का भी खतरा है।



​लाशों से पट सकता है मंगल ग्रह जाने का रास्‍ता
​लाशों से पट सकता है मंगल ग्रह जाने का रास्‍ता

विशेषज्ञों का कहना है कि लाशों को अंतरिक्ष में छोड़ना सबसे आसान विकल्‍प है लेकिन भविष्‍य में जाने वाले रॉकेट को लाशों के समुद्र से गुजरना होगा क्‍योंकि मरने वालों की संख्‍या लगातार बढ़ती रहेगी। यही नहीं जब मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्री पहुंच जाएंगे तो उन्‍हें अपने जीवन को बचाने के लिए एक नई चुनौती रेडियेशन से जूझना पड़ेगा। पहले के आंकड़े के मुताबिक मंगल ग्रह पर रेडियेशन का स्‍तर पृथ्‍वी की तुलना में 700 गुना ज्‍यादा है। रेडियेशन से इंसान के हृदय और शरीर के अन्‍य हिस्‍सों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मंगल ग्रह पर दफनाना आवश्‍यक हो सकता है। हालांकि इसमें एक दिक्‍कत है। नासा के नियमों के मुताबिक पृथ्‍वी के जीवाणुओं से किसी अन्‍य ग्रह को दूषित करने पर सख्‍त मनाही है। अंतरिक्षयात्रियों के नरभक्षी होने के बारे में अभी किसी अंतरिक्ष एजेंसी ने कुछ नहीं कहा है।



​मंगल ग्रह पर लाशों को खा जाएंगे साथी अंतरिक्षयात्री?
​मंगल ग्रह पर लाशों को खा जाएंगे साथी अंतरिक्षयात्री?

विशेषज्ञों का कहना है कि हर मरे हुए अंतरिक्षयात्री को दफनाया नहीं जा सकता है, बल्कि उन्‍हें खाया जा सकता है ताकि अन्‍य अंतरिक्षयात्री वहां पर ज‍िंदा रह सके। यह सुनने में बहुत ही क्रूर भले ही लगे लेकिन विशेषज्ञ एंडेस पहाड़ पर वर्ष 1972 में गिरे एक विमान के बारे में याद करते हैं। इस दौरान बचे हुए यात्रियों के पास न तो जिंदा रहने के लिए खाना था और नहीं संपर्क का उपाय तो उन्‍होंने मरे हुए यात्रियों को ही खाने का फैसला किया। जैव विशेषज्ञ पॉल वोल्‍प कहते हैं कि इस संबंध में दो तरीका है। हालांकि हम किसी इंसान के शव को बहुत सम्‍मान देते हैं लेकिन जिंदगी बचाए रखना सबसे महत्‍वपूर्ण है। अगर जिंदगी को बचाने के लिए केवल शव को खाना ही एकमात्र रास्‍ता है तो यह स्‍वीकार है लेकिन वांछनीय नहीं है। इस विमान पर उरुग्‍वे की रग्‍बी टीम सवार थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मंगल मिशन के खाने की सप्‍लाइ बाधित हुई तो अंतरिक्षयात्री बहुत ही जल्‍द बिना भोजन के हो जाएंगे।





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