पाकिस्तान में ईशनिंदा को लेकर हिंसा की तादाद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब इसकी चपेट में अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाई ही नहीं, बल्कि मुसलमान भी आ रहे हैं। आज से ठीक चार साल पहले पाकिस्तान के मरदान में स्थित अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन के छात्र मशाल खान की कट्टरपंथियों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मशाल पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से जुड़ी समाग्री पोस्ट की थी। अपने 23 साल के बेटे की मौत से मां को ऐसा सदमा लगा, जिससे वह चार साल बाद भी उबर नहीं पाई हैं। मशाल खान की मां आज भी अपने बेटे के कपड़े को रोज धोती और प्रेस करती हैं, इस आस में कि एक दिन उनका बेटा आएगा और इन कपड़ों को पहनेगा। घरवाले भी मां की इस काम को रोकने का प्रयास इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनका मानसिक संतुलन और खराब न हो जाए। पाकिस्तान में यह इकलौता मामला नहीं है जब ईशनिंदा के आरोप में किसी व्यक्ति की हत्या की गई है। 2011 में तो पंजाब प्रांत के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की ईशनिंदा के आरोप में उनके ही गार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।पाकिस्तान में ईशनिंदा को लेकर हिंसा की तादाद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब इसकी चपेट में अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाई ही नहीं, बल्कि मुसलमान भी आ रहे हैं। 2017 में पाकिस्तान के अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन के छात्र मशाल खान की कट्टरपंथियों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

पाकिस्तान में ईशनिंदा को लेकर हिंसा की तादाद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अब इसकी चपेट में अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाई ही नहीं, बल्कि मुसलमान भी आ रहे हैं। आज से ठीक चार साल पहले पाकिस्तान के मरदान में स्थित अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन के छात्र मशाल खान की कट्टरपंथियों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मशाल पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से जुड़ी समाग्री पोस्ट की थी। अपने 23 साल के बेटे की मौत से मां को ऐसा सदमा लगा, जिससे वह चार साल बाद भी उबर नहीं पाई हैं। मशाल खान की मां आज भी अपने बेटे के कपड़े को रोज धोती और प्रेस करती हैं, इस आस में कि एक दिन उनका बेटा आएगा और इन कपड़ों को पहनेगा। घरवाले भी मां की इस काम को रोकने का प्रयास इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनका मानसिक संतुलन और खराब न हो जाए। पाकिस्तान में यह इकलौता मामला नहीं है जब ईशनिंदा के आरोप में किसी व्यक्ति की हत्या की गई है। 2011 में तो पंजाब प्रांत के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की ईशनिंदा के आरोप में उनके ही गार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
मशाल की मां बोलीं- मेरा अल्लाह लेगा जालिमों से बदला

बीबीसी के साथ 2017 में बातचीत के दौरान मशान खान की मां सैयदा गुलजार बेगम ने कहा था कि मैं सोचती थी कि मेरा बेटा बड़ा होकर नाम कमाएगा। मेरा सहारा बनेगा लेकिन इतनी बेदर्दी से उसकी हत्या कर दी गई। किसी ने मशाल की हिफाजत नहीं की। उन्हें क्या सजा मिलेगी जिन्होंने मेरे बेटे पर झूठे इल्जाम लगाए? अल्लाह ने मुझे होनहार बेटा दिया था लेकिन इन जालिमों ने मुझसे मेरे जिगर का टुकड़ा छीन लिया मेरा अल्लाह उनसे जरूर बदला लेगा। पाकिस्तानी पुलिस ने इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन 2019 में केवल 2 लोगों को सजा सुनाई गई। इनमें से एक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी से जुड़ा हुआ था।
मशाल पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर की गई थी हत्या

पुलिस की जांच रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हुआ था कि मशाल खान पर मजहब की तौहीन करने का झूठा इल्जाम लगाया गया था। उसकी हत्या सोची समझी साजिश का हिस्सा था, जिसे यूनिवर्सिटी के अफसर और विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष ने साजिशन अंजाम दिया था। दरअसल, मशाल खान यूनिवर्सिटी में हो रहे भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं को लेकर काफी मुखर रहता था। इसलिए, उसे रास्ते से हटाने के लिए इस घटना को प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया था। पहले उसके सोशल मीडिया अकाउंट से ईशनिंदा की अफवाह फैलाई गई, फिर उसे हॉस्टल से निकालकर छात्रों के एक गुट ने तीन गोलियां मारी। इन अपराधियों का गुस्सा इतने से भी शांत नहीं हुआ तो वे मशाल के शरीर पर तबतक लाठी-डंडे बरसाते रहे, जबतक पुलिस नहीं आ गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मशाल के शरीर से गोली, चाकू के हमले के निशान पाए गए थे।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को पीड़ित करने का हथियार 'ईशनिंदा'

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए हमेशा ईशनिंदा कानून का उपयोग किया जाता है। तानाशाह जिया-उल-हक के शासनकाल में पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को लागू किया गया। पाकिस्तान पीनल कोड में सेक्शन 295-बी और 295-सी जोड़कर ईशनिंदा कानून बनाया गया। दरअसल पाकिस्तान को ईशनिंदा कानून ब्रिटिश शासन से विरासत में मिला है। 1860 में ब्रिटिश शासन ने धर्म से जुड़े अपराधों के लिए कानून बनाया था जिसका विस्तारित रूप आज का पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून है।
सैकड़ों लोग ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तानी जेलों में कैद

पाकिस्तान की जेलों में मुसलमानों और ईसाइयों समेत सैंकड़ों लोग ईशनिंदा के आरोपों में बंद है। इससे पहले एक ऐसे ही मामले में 2010 में भी चार बच्चों की मां आसिया बीबी (48) को भी पड़ोसियों से विवाद होने पर इस्लाम का अपमान करने को लेकर दोषी ठहराया गया था। उसने बेगुनाह होने की बात कही थी लेकिन उसे आठ साल तक कालकोठरी में रखा गया। बाद में 2018 में पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने उसे बरी कर दिया। उसे उसी साल पाकिस्तान से चले जाने की इजाजत दी गयी और वह कथित रूप से कनाडा में रह रही है।
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