वॉशिंगटन यूक्रेन बॉर्डर पर रूसी फौज के बढ़ते जमावड़े के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत की है। बाइडन ने पुतिन के साथ आने वाले महीनों में किसी तीसरे देश में एक शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव भी रखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस प्रस्ताव पर क्रेमलिन की तरफ से अभी तक औपचारिक सहमति नहीं दी गई है। इस सम्मेलन के जरिए बाइडन अमेरिका और रूस के बीच जारी विवादों का निपटारा करना चाहते हैं। बाइडन ने दिया शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव जो बाइडन ने पुतिन को प्रस्ताव दिया है कि वे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए एक तीसरे देश में मिलें। वाइट हाउस ने एक बयान में बताया कि राष्ट्रपति बाइडन ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका रूस के कार्यों, जैसे कि साइबर घुसपैठ और चुनाव हस्तक्षेप के जवाब में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा में मजबूती से काम करेगा। राष्ट्रपति ने रूसी सैन्य कब्जे वाले क्रीमिया और यूक्रेन की सीमाओं पर हमारी चिंताओं पर बात की है। पुतिन को हत्यारा बताने के बाद झुके बाइडन एक महीने पहले ही जो बाइडन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को हत्यारा बताया था। जिसके बाद से अमेरिका और रूस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके अलावा नॉर्वे में अमेरिकी बॉम्बर्स की तैनाती पर भी रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अपने मिसाइल क्रूजर को भेजा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका अपने चिर प्रतिद्वंदी रूस के सामने झुक गया है? राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी जो बाइडन रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पर रूस के प्रति साफ्ट कॉर्नर रखने का आरोप लगा चुके हैं। तीन महीने में बाइडन ने पुतिन को दो बार किया फोन जो बाइडन अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के तीन महीने के अंदर पुतिन से दो बार बात कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने रूस से यूक्रेन की सीमा पर मिलिट्री जमावड़े को खत्म करने की अपील की। हालांकि, रूस पहले ही बता चुका है कि वह अपनी जमीन के अंदर सेना के मूवमेंट के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है और इसे किसी भी देश के प्रति खतरे के भाव से नहीं देखा जाना चाहिए। रूस की दो टूक- क्रीमिया से युद्धपोतों को दूर रखे अमेरिका उधर, रूसी रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह क्रीमिया से अपने युद्धपोतों को दूर रखे। अमेरिकी नौसेना के जंगी जहाज समय-समय पर काला सागर में गश्त लगाते रहते हैं। रूस के नजदीक अमेरिकी युद्धपोतों के पहुंचने से तनाव और बढ़ने की आशंका है। रूस ने भी इस इलाके में अपनी कई परमाणु पनडुब्बियों को तैनात कर रखा है। रूस ने यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात किए हैं 80000 जवान यूक्रेनी सरकार ने दावा किया है कि रूस ने पूर्वी बॉर्डर पर 41,000 और क्रीमिया में 42 हजार सैनिकों को तैनात किया है। जिसके बाद से यूक्रेन ने भी अपने फॉरवर्ड इलाकों में सैनिकों की तादाद को बढ़ा दिया है। खुद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बॉर्डर इलाके का दौरा कर सैनिकों का हौसला बढ़ाया है। हालांकि, क्रेमलिन ने दावा किया है कि सैनिकों की तैनाती एक युद्धाभ्यास का हिस्सा है। इससे किसी को कोई भी खतरा नहीं है। 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर चुका है रूस साल 2014 में रूस के पूर्वी यूक्रेन (क्रीमिया) पर कब्जे के दौरान हुए संघर्ष में 14000 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से ज्यादातर यूक्रेन के निवासी थे। रूस पूर्वी यूक्रेन के क्षेत्रों में 28,000 हथियारबंद लोगों को भी तैनात किए हुए है। इन लोगों को डॉनबास के रूप में जाना जाता है। ये लोग साल 2015 से यूक्रेनी सरकार के खिलाफ सशस्त्र जंग छेड़े हुए हैं। अमेरिका-यूक्रेन में बढ़ती नजदीकी से रूस चिढ़ा हाल में ही अमेरिका से सैन्य हथियारों से लगा एक कार्गो शिप यूक्रेन पहुंचा था। जिसमें कई तरह की गाड़ियां और अन्य साजोसामान भरे हुए थे। रूस पहले से भी यूक्रेन और अमेरिका में बढ़ती हुई नजदीकी से चिढ़ा हुआ है। जिसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इससे दोनों देशों के बीच युद्ध का एक नया खतरा पैदा हो सकता है। यह अभी तक साफ नहीं हो सका है कि यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों का जमावड़ा कब शुरू हुआ।
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