एथेंस/पेरिस भूमध्य सागर में बढ़ते तनाव के बीच ग्रीस ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों के बाद तीन युद्धपोतों को खरीदने का फैसला किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस डील की सराहना करते हुए चौथे युद्धपोत का भी ऑफर दिया है। मैक्रों ने कहा कि इससे ग्रीस और फ्रांस के रिश्तों में एक नया अध्याय लिखा जाएगा। भूमध्य सागर में ग्रीस का तुर्की के साथ तनाव चरम पर है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन कई बार ग्रीस को सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे चुके हैं। ऐसे में इन अत्याधुनिक युद्धपोतों के आने से ग्रीस की नौसैनिक ताकत में भी भारी इजाफा होगा। राफेल के बाद अब युद्धपोत पेरिस दौरे पर गए ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोटाकिस ने इमैनुएल मैक्रों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके देश ने फ्रांस के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ाने का फैसला किया है। हम ग्रीस और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले साल ग्रीस और फ्रांस ने 18 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 2.5 बिलियन यूरो का सौदा किया था। बेलहर्रा फ्रेंच फ्रिगेट खरीद रहा ग्रीस रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीस अपनी नौसेना के लिए तीन की संख्या में बेलहर्रा फ्रेंच फ्रिगेट खरीदने की डील पर साइन किया है। इस सौदे की कीमत 3.51 बिलियन डॉलर बताई जा रही है। ग्रीस के पीएम मित्सोटाकिस ने इसी महीने ऐलान किया था कि उनका देश फ्रांस से 6 और राफेल विमान खरीदने जा रहा है। ऐसे में ग्रीस के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 24 हो जाएगी। मैक्रों बोले- इंडो पैसिफिक में फ्रांस भी बड़ी ताकत फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने AUKUS डील पर कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ परमाणु सौदा रद्द होने के बावजूद उनकी इंडो-पैसिफिक रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हमारे साझेदार हैं। फ्रांस किसी भी डील की परवाह किए बिना इंडो-पैसिफिक में आज भी एक बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि इंडो पैसिफिक में 10 लाख से अधिक फ्रांसीसी रहते हैं। इसके अलावा 8000 से अधिक फ्रांसीसी सैनिक तैनात हैं। ऑस्ट्रेलिया पर भी बरसे मैक्रों मैक्रों ने यह भी कहा कि उनका देश ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कदम भी उठाएगा। फ्रांसीसी पीएम ने साफ कहा कि ऑस्ट्रेलिया की पसंद के परिणाम होंगे जिनका आने वाले समय में आकलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ डील रद्द होने से फ्रांस के ऊपर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे फ्रांस में बस कुछ सौ नौकरियां ही प्रभावित होंगी।
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