Tuesday, 28 September 2021

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इस्लामाबाद पाकिस्तान में एक महिला स्कूल प्रिंसिपल को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उस महिला के ऊपर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। महिला टीचर ने साल 2013 में पैगंबर मोहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर मानने से इनकार कर दिया था। उसने खुद को इस्लाम का पैगंबर होने का दावा भी किया था। इसी बात को लेकर एक स्थानीय मौलवी ने कोर्ट में केस दायर किया था, जिसपर अब फैसला आया है। महिला ने खुद को बताया था इस्लाम का पैगंबर लाहौर की डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट ने सोमवार को निश्तर कॉलोनी के एक प्राइवेट स्कूल की हेडमास्टर सलमा तनवीर को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 5000 पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया। अडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट के जज मंसूर अहमद ने फैसले में कहा कि तनवीर ने पैगंबर मुहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर नहीं मान कर ईशनिंदा की। आरोपी की खराब मानसिक स्थिति की दलील भी खारिज तनवीर के वकील मुहम्मद रमजान ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और अदालत को इस फैक्ट पर गौर करना चाहिए। वहीं, मौलवी की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के एक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया था कि आरोपी महिला संदिग्ध मुकदमा चलाने के लिए फिट है क्योंकि उसकी मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक है। अल्पसंख्यकों को पीड़ित करने का हथियार 'ईशनिंदा' पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए हमेशा ईशनिंदा कानून का उपयोग किया जाता है। तानाशाह जिया-उल-हक के शासनकाल में पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को लागू किया गया। पाकिस्तान पीनल कोड में सेक्शन 295-बी और 295-सी जोड़कर ईशनिंदा कानून बनाया गया। दरअसल पाकिस्तान को ईशनिंदा कानून ब्रिटिश शासन से विरासत में मिला है। 1860 में ब्रिटिश शासन ने धर्म से जुड़े अपराधों के लिए कानून बनाया था जिसका विस्तारित रूप आज का पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून है। पाकिस्तान की जेल में ईशनिंदा के सैकड़ों आरोपी कैद पाकिस्तान की जेलों में मुसलमानों और ईसाइयों समेत सैंकड़ों लोग ईशनिंदा के आरोपों में बंद है। इससे पहले एक ऐसे ही मामले में 2010 में भी चार बच्चों की मां आसिया बीबी (48) को भी पड़ोसियों से विवाद होने पर इस्लाम का अपमान करने को लेकर दोषी ठहराया गया था। उसने बेगुनाह होने की बात कही थी लेकिन उसे आठ साल तक कालकोठरी में रखा गया। बाद में 2018 में पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने उसे बरी कर दिया। उसे उसी साल पाकिस्तान से चले जाने की इजाजत दी गयी और वह कथित रूप से कनाडा में रह रही है। आरोपियों को पसंद का वकील भी नहीं मिलता पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानून और इसके तहत निर्धारित दंड को बेहद कठोर माना जाता है। पाकिस्तान में 1987 से ईशनिंदा कानून के तहत कम से कम 1472 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। ईशनिंदा के आरोपी आमतौर पर अपनी पसंद का वकील रखने के मौलिक अधिकार से वंचित रह जाते हैं क्योंकि ज्यादातर वकील ऐसे संवेदनशील मामलों को लेने से इनकार करते हैं। ईशनिंदा कानून अंग्रेजों के जमाने का है, लेकिन पूर्व तानाशाह जनरल जियाउल हक ने इनमें संशोधन किया था जिससे निर्धारित दंड की गंभीरता बढ़ गई।


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