पेइचिंग चीन ने भारत से बातचीत की आड़ में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सैनिकों की तैनाती फिर से बढ़ा दी है। बॉर्डर एरिया में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने के लिए चीन ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक कई नए शेल्टर्स का निर्माण किया है। हाईटेक टेक्नोलॉजी से बने ये शेल्टर्स किसी भी मौसम में सैनिकों को सुरक्षित रखने में सक्षम हैं। इतना ही नहीं, चीन ने लद्दाख के पास वाले इलाके में रूस से खरीदे गए एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की दो यूनिट को भी तैनात किया है। चीन ने एस-400 की दो यूनिट तैनात की सर्विलांस और इंटेलिजेंस रिपोर्ट से पता चला है कि चीन ने एलएसी के पास वाले अग्रिम इलाकों में कम से कम आठ नए शेल्टर्स को बनाया है। इन नए मॉड्यूलर कंटेनर-बेस्ड आवासों को ताशीगोंग, मांजा, हॉट स्प्रिंग्स और चुरुप के पास के इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा चीन ने भारत के किसी भी हवाई हमले को रोकने के लिए रूसी एस-400 मिसाइल की दो बैटरियों को भी तैनात किया है। एलएसी पर चीन की बढ़ी गतिविधि चीन ने हाल के दिनों में भारत से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई निर्माण किए हैं। इनमें सैनिकों के रहने के लिए पनाहगाह, हथियार डिपो, एयरबेस और हैलीपैड भी शामिल हैं। चीनी सेना इन इलाकों में दिन और रात दोनों समय युद्धाभ्यास भी कर रही है। ऐसे में चीन की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। सीमा पर दोनों देश कर रहे हथियारों की तैनाती यही कारण है कि चीन की संदिग्ध हरकतों को देखकर भारत ने भी सीमा पर नए नए हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है। भारतीय सेना लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में चीन से निपटने के लिए रूस में बने लाइटवेट Sprut-SD टैंक को खरीदने पर विचार कर रही है। इतना ही नहीं, इजरायल से खरीदे गए चार हेरोन टीपी ड्रोन को भी एलएसी से एलओसी तक की निगरानी के लिए तैनात किया जाएगा। चीन ने तैनात किया PCL-181 भारतीय सेना ने दक्षिण कोरिया की तकनीकी पर बनी के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर की लद्दाख में तैनाती की है। चीन ने भी इसके जवाब में पहले से ही 155 एमएम कैलिबर की PCL-181 सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर तैनात कर रखा है। चीनी मीडिया का दावा है कि कुछ दिनों पहले इसके भी एक उन्नत संस्करण को लद्दाख के पास तैनात किया गया है। यह होवित्जर 122 मिमी-कैलिबर का बताया जा रहा है। K9 वज्र सेना के तोपखाने में शामिल पहली सेल्फ प्रोपेल्ड गन है। यानी इसे ढोने के लिए किसी दूसरे वाहन की जरूरत नहीं पड़ती। यह खुद एक जगह से दूसरी जगह जा सकती है। यह कमजोर जमीन पर धंसती नहीं है और टैंक के साथ-साथ आगे बढ़ती है। 155 एमएम/52 कैलिबर की यह तोप 30 सेकंड में तीन गोले दाग सकती है। इसकी रेंज 38 किलोमीटर तक है। क्या काम करता है एयर डिफेंस सिस्टम इसका काम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाना और उसे रोकना है। यह तमाम तरह के रेडार और उपग्रहों की मदद से जानकारी जुटाता है। इस जानकारी के आधार पर यह बता सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं। इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। भारत ने अब तक रूस से मारने वाले हथियार ही खरीदे हैं। पहली बार भारत रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। क्या है S-400 डिफेंस सिस्टम यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। S-400 को रूस का सबसे अडवांस लॉन्ग रेंज सर्फेस-टु-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम रूस के ही S-300 का अपग्रेडेड वर्जन है। इस मिसाइल सिस्टम को अल्माज-आंते ने तैयार किया है, जो रूस में 2007 के बाद से ही सेवा में है। यह एक ही राउंड में 36 वार करने में सक्षम है।
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