Saturday, 25 December 2021

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पेरिस ब्रिटेन और अमेरिका के बाद अब फ्रांस में कोरोना वायरस विकराल रूप धारण करता दिख रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1,04,611 मामले सामने आए। यह लगातार तीसरा दिन है जब फ्रांस में इतनी बड़ी तादाद में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों के बाद अब फ्रांस के प्रधानमंत्री इमैनुअल मैक्रां और उनकी सरकार के अन्‍य मंत्री सोमवार को एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। इसमें कोरोना से बचाव के नए उपायों पर चर्चा हो सकती है। फ्रांस के अधिकारी कोरोना के तेजी से प्रसार करने वाले ओमीक्रोन वेरिएंट को लेकर चिंतित हैं। शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों ने वयस्‍कों को टीका लगने के तीन महीने बाद बूस्‍टर डोज देने की सिफारिश कर दी। फ्रांस में कोविड-19 और ओमीक्रोन के मामले बढ़ने के साथ अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है और ज्यादातर ऐसे मरीज हैं जिन्होंने टीके की खुराक नहीं ली थी। क्रिसमस पर अस्पतालों ने मरीजों के परिवारों को मुलाकात करने की अनुमति दी, लेकिन अपने प्रियजनों की फिक्र में लोग उदास नजर आए। ‘टीका खतरनाक नहीं है, यह जीवन चुनने के समान है’ मार्सेली अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कोविड-19 के मरीज डेविड डेनियल सेबाग (52) को अफसोस है कि उन्होंने टीके की खुराक नहीं ली थी। उन्होंने कहा, ‘टीका खतरनाक नहीं है। यह जीवन चुनने के समान है।’ आईसीयू के मुख्य डॉक्टर जुलियन कार्वेली ने अपनी टीम के साथ मरीजों का उत्साह बढ़ाया कि वे एक और क्रिसमस देख सकते हैं। ओमीक्रोन स्वरूप के कारण बढ़ते मामलों से अस्पतालों के बेड भरते जा रहे हैं और कर्मचारी भी थक चुके हैं। कार्वेली ने कहा, ‘हमें डर है कि आगे हमारे पास पर्याप्त स्थान नहीं होगा।’ फ्रांस के बड़े अस्पतालों में शुमार मार्सेली के ला तिमोने हॉस्पिटल में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अस्पताल के परिसर को सजाया गया और छुट्टियों के बावजूद कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया गया। अस्पताल ने भी आईसीयू में भर्ती मरीजों के परिजन को उनसे मिलने की अनुमति दी। एमिली खयात हर दिन अपने पति लूडो (41) को देखने अस्पताल जाती हैं जो 24 दिन से कोमा में थे और अब श्वसन मशीनों के सहारे जिंदा हैं। एमिली आईसीयू में अपने पति के बेड पर कुछ देर तक बैठी रहीं और उन्हें ढांढस दिया। फ्रांस में 90 प्रतिशत वयस्कों का टीकाकरण हो चुका है और करीब 40 प्रतिशत को बूस्टर खुराक भी लग चुकी है। ला तिमोने हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित जितने मरीज भर्ती हैं, उनमें से ज्यादातर ने टीके की खुराक नहीं ली थी। सेबाग ने कहा, ‘मुझे बहुत अफसोस है। मैंने खुद को इन चीजों में फंसा लिया। मुझे लगता था कि टीका लेना जरूरी नहीं है।’ सेबाग की पत्नी इस्तर ने अपने पति की बीमारी की गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस सप्ताह हमारी जिंदगी में कोहराम मच गया...मुझे लगा मैं सबकुछ गंवाने वाली हूं।’ ओमीक्रोन से कई स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित हुए हैं सेबाग अब भी संक्रमण मुक्त नहीं हुए हैं और ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। सेबाग ने कहा, ‘अगर मैंने टीके की खुराक ली होती तो शायद आईसीयू में आने की जरूरत नहीं होती।’ दुनिया में ओमीक्रोन स्वरूप के प्रसार के साथ फ्रांस में इन दिनों संक्रमण के सर्वाधिक मामले आ रहे हैं। मार्सेली में आईसीयू के प्रमुख कार्वेली ने कहा, ‘हम बहुत तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। कुछ ही बेड उपलब्ध हैं। हम यह सब देखते देखते थक चुके हैं। इसके बावजूद काम पर ध्यान केंद्रित करने का सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि पहली बात ये कि ओमीक्रोन से कई स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित हुए हैं और वे काम के लिए उपलब्ध नहीं है। वहीं, कुछ कर्मचारी अत्यधिक दबाव के कारण पेशे को अलविदा कह चुके हैं।


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पेइचिंग एक चीनी सैटेलाइट ने कॉमेट लियोनार्ड के एक अद्भुत नजारे को कैमरे में कैद किया जब यह धरती के सबसे नजदीक था। वीडियो में धूमकेतु का अरोरा साफतौर पर देखा जा सकता है। इस साल जनवरी में इसकी खोज की गई थी जिसके बाद से यह करीब 160,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी और सूर्य की तरफ बढ़ रहा है। यह कॉमेट हमारी पृथ्वी के पास से होकर गुजर रहा है। बीते 12 दिसंबर को यह पृथ्वी के 70,000 सालों में सबसे करीब था, जब यह क्लिप रेकॉर्ड की गई। इस नजारे को यांगवांग 1 (Yangwang 1) ने कैप्चर किया है जो चीन के ग्वांगडोंग में स्थित चीनी प्रौद्योगिकी कंपनी ओरिजिन स्पेस की ओर से लॉन्च किया गया एक छोटा सैटेलाइट है। यांगवांग 1 एक कमर्शियल स्पेस टेलिस्कोप है जिसे इस साल की शुरुआत में पराबैंगनी प्रकाश में ब्रह्मांड की तस्वीरें खींचने के लिए लॉन्च किया गया था। यह धरती के करीब मौजूद ऐस्टरॉइड पर भी खोज कर रहा है जिन्हें संभवतः एक दिन संसाधनों के लिए खनन किया जा सकता है और पृथ्वी पर वापस लाया जा सकता है। 12 दिसंबर को खींची अद्भुत तस्वीरइस स्पेसक्राफ्ट ने 12 दिसंबर 2021 को सितारों से भरे आसमान के बीच कॉमेट लियोनार्ड की तस्वीर खींची थी। इस रंगीन तस्वीर को ओरिजिन स्पेस ने शेयर किया है, जिसमें धूमकेतु को अपनी लंबी पूंछ के साथ रात के आकाश में देखा जा सकता है। इसकी पूंछ तब दिखाई पड़ती है जब यह गैस और पानी की बर्फ जैसी वाष्पशील सामग्री को बाहर की ओर फेंकता है जिससे इसकी चमक लगातार बदलती रहती है। 1 किमी चौड़ी बर्फ और धूल की गेंदधूमकेतु लियोनार्ड 3 जनवरी, 2022 को कई सदियों बाद सूर्य के सबसे करीब पहुंचेगा। उस घटना को कैद करने के लिए नासा और ईएसए ने अपने सैटेलाइट उस दिशा में भेजे हैं। बर्फ और धूल की यह विशालकाय गेंद करीब आधा मील (करीब 1 किमी) चौड़ी है। इससे पहले नासा के सोलर टेरेस्ट्रियल रिलेशंस ऑब्जर्वेटरी एस्पेसक्राफ्ट (STEREO-A) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सोलर ऑर्बिटर ऑब्जर्वेटरी ने इसका वीडियो बनाया था। STEREO-A नवंबर से हरे धूमकेतु पर नजर बनाए हुए है।


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इस्‍लामाबाद पाकिस्तान में ब्लूचिस्तान के ग्वादर आंदोलन से जुड़े नेता मौलाना हिदायतुर रहमान ब्लूच ने इमरान खान सरकार को चेतावनी दी है। बलूच ने कहा है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर (सीपीईसी) और ब्लूचिस्तान के संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार है। मौलाना रहमान ने ओरमारा में ब्लूच मछुआरों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी को भी ब्लूचिस्तान समुद्र से संसाधनों की लूट खसोट नहीं करने दी जाएगी क्योंकि इन पर स्थानीय मछुआरों का हक है। मौलाना बलूच चीनी वाणिज्यिक मछुआरा ट्रालर का जिक्र कर रहे थे जो अरब सागर में बड़े पैमाने पर मछलियां पकड़ रहे हैं। समाचार पत्र द डॉन के मुताबिक उन्होंने पाकिस्तानी नौसेना की ओर से की जा रही तारंबदी का जिक्र करते हुए कहा ‘अगर अब से पाकिस्तान की नौसेना ने तारंबदी की तो उसे ओरमारा के लोगों से इसके बारे में पूछना होगा नहीं तो हम इसे नष्ट कर देंगे।’ रोजगार स्थानीय युवकों के बजाए चीनी नागरिकों को दिए जा रहे बता दें कि जिस क्षेत्र में चीन इस कोरिडोर का निर्माण कर रहा है या नौसैनिक परियोजनाओं में संलग्न हैं , उसके आसपास पाकिस्तानी सेना तारबंदी कर रही है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों का इन क्षेत्रों में प्रवेश सीमित हो गया है तथा ब्लूचिस्तान में भी उनकी गतिविधियां सीमित होती जा रही हैं। यहां के लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि इस परियोजना से जुड़े रोजगार के अवसर स्थानीय युवकों के बजाए चीनी नागरिकों को दिए जा रहे हैं। भौगोलिक और राजनीतिक मामलों के जानकार मार्क किनरा ने बताया कि मौलाना हिदायतुर का वह आंदोलन थोड़ा सफल होने के बाद वह चर्चा में आ गए हैं। वह इस बात को लेकर थोड़ा परेशान हो सकते हैं कि ब्लूच लोगों के अधिकारों के लिए उनका पाकिस्तान सरकार के साथ किया गया समझौता एक तरह से विफल हो गया है क्योंकि अभी भी इस क्षेत्र में चीनी ट्रालर दिखाई दे रहे हैं और कारोबारी रिश्वत मांगे जाने तथा अवैध नाका बिंदुओं की शिकायत कर रहे हैं। एक लाख लोगों के साथ क्वेटा में करेंगे धरना प्रदर्शन मौलाना हिदायतुर ने साफ तौर पर कहा है ‘इस प्रांत के सारे संसाधन हमारे हैं, यह क्षेत्र हमारा है, सीपीईसी, यह तट और बंदरगाह भी हमारा है।' उन्होंने ब्लूचिस्तान के मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह एक लाख लोगों के साथ क्वेटा में धरना प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा जब तक इस क्षेत्र से अवैध नाकाबंदी नहीं हटा दी जाती है और उन ट्रालर की गतिविधियों प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


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ढाका बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में एक महिला पर्यटक के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। महिला से दुष्कर्म के दौरान बदमाशों ने उसके पति और बेटे को बंधक बना लिया था। पुरुषों के एक समूह ने लबोनी प्वाइंट इलाके से पीड़िता के पति और बच्चे को बंधक बना लिया और कथित तौर पर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। आरएबी-15 के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल खैरुल इस्लाम ने बताया कि अर्धसैनिक बल की एलीट यूनिट के अधिकारियों ने गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे पीड़िता को जिया गेस्ट इन से बचाया। बल ने होटल प्रबंधक को हिरासत में लिया और सीसीटीवी कैमरे से वीडियो फुटेज की जांच के बाद अपराधियों की पहचान की। अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को कानून मंत्री अनीसुल हक ने बताया, ‘कॉक्स बाजार के वरिष्ठ न्यायिक दंडाधिकारी हमीमुन तंजिन ने शाम करीब पांच बजे पीड़िता का बयान दर्ज किया।’ मंत्री ने कहा, ‘अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ शुक्रवार रात तक पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी नहीं की थी। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि देश में अभी भी एक मजबूत कानून का अभाव है जो दुष्कर्म के खिलाफ सुरक्षा के रूप में काम करे। विशेषज्ञों ने देश की दुष्कर्म पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की और अधिकारियों से कम उम्र से ही यौन शिक्षा शुरू करने का आह्वान किया। लीरहो के कार्यकारी निदेशक नूरजहां खान ने बताया, ‘पिछले 50 वर्षों से, हम महिलाओं के कानूनी अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। फिर भी, पुलिस अपराध को नियंत्रित करने के बजाय, दुष्कर्म पीड़िता पर आरोप लगाती है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि, हम आभारी हैं आरएबी के। यदि वे नहीं होते तो अपराधियों की पहचान भी नहीं की गई थी।’ हाल के महीनों में दुष्कर्म की घटनाओं ने बांग्लादेश में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है और देश में 2021 के पहले 11 महीनों में रोजाना औसतन तीन मामले सामने आए हैं। जनवरी-नवंबर की अवधि में कम से कम 1,247 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुईं। उनमें से 46 की मौत हो गई, जबकि नौ ने आत्महत्या कर ली।


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टोरंटो कनाडा पिछले 700 दिन से कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की मार झेल रहा है और अब भी इस आपदा की स्थिति गंभीर और हतोत्साहित करने वाली है। कनाडा में 22 दिसंबर को संक्रमण के 12,114 नए मामले सामने आए, जो वैश्विक महामारी की शुरुआत से अब तक के सर्वाधिक दैनिक मामले हैं। कनाडा में यह लगातार दूसरा साल है, जब वैश्विक महामारी के कारण त्योहारी सीजन में प्रतिबंध लगाए गए हैं, कई गतिविधियों का पैमाना छोटा किया गया है और कई कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। कोविड-19 के कारण मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 30,000 से अधिक हो गई है। इस समय, इस आपदा से बाहर निकलने का तरीका खोजना संघीय एवं प्रांतीय सरकारों के बस की बात नहीं है। ऐसे में कनाडा के लोगों को वैश्विक महामारी से अपने संबंधों पर पुनर्विचार करना होगा और निकट भविष्य में निरंतर आपदा की स्थिति में रहना सीखना होगा। विरोधाभासी संदेश संघीय सरकार के कई संवाददाता सम्मेलनों में (कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन) ट्रुडो प्रशासन ने सावधानी से काम लेने का संकेत दिया है। कनाडा का दृष्टिकोण, अमेरिका के दृष्टिकोण से पूरी तरह विपरीत है। आपदा प्रबंधन योजना में चार चरणीय आपदा चक्र का इस्तेमाल अमेरिका का दृष्टिकोण है कि ओमीक्रोन के कारण घबराए बिना छुट्टियों का आनंद लेने की कोशिश की जाए। संवाददाताओं द्वारा सवाल किए जाने के बाद ट्रुडो सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के इस संदेश की आलोचना की कि टीकाकरण करा चुके लोग ओमीक्रोन फैलने के बावजूद छुट्टियों के लिए एकत्र हो सकते हैं। आपदा चक्र आपदा प्रबंधन योजना में अकसर चार चरणीय आपदा चक्र का इस्तेमाल किया जाता है: न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और आपदा से उबरना। चार चारणीय आपदा चक्र, आपदाओं से निपटने और उन्हें बेहतर तरीके से समझने में कई बार मददगार साबित होता है और भविष्य की आपदाओं के प्रबंधन के लिए सीख भी देता है। कोविड-19 के संदर्भ में हम अब भी आपदा के आपातकाल दौर में है। चार चरणीय आपदा चक्र का कोई लाभ नजर नहीं आ रहा और महामारी से उबरने का दौर अभी दिखाई नहीं दे रहा। लोग इतना थक चुके हैं कि उनके लिए महामारी से निपटने के लिए खुद को लगातार तैयार रखना मुश्किल हो गया है। महामारी का न्यूनीकरण इस चरण पर अब भी दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। जोखिम प्रबंधन संबंधी हालिया अनुसंधान बताते हैं कि आपदाएं बहुआयामी होती हैं और इनसे निपटने के लिए जो कदम उठाए जाते हैं, वे उनके अनुसार स्वयं में बदलाव करती हैं। कोविड-19 जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना अहम है। हमारे पास इस आपदा से निपटने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं मुश्किल स्थिति से दृढ़ता और आत्मसंयम से निपटने की आवश्यकता मौजूदा आपदा से निपटने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार, महामारियों का अंत आमतौर पर दो प्रकार से होता है। पहला चिकित्सकीय अंत होता है, यानी जब संक्रमण और मौत के मामलों में गिरावट आती है। दूसरा सामाजिक अंत होता है, जब थकान या अन्य कारणों से लोग फैसला करते हैं कि महामारी उनके लिए समाप्त हो गई है, भले ही विज्ञान कुछ भी कहे। अब यह स्वीकार करने का समय आ गया है कि हमारे पास इस आपदा से निपटने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं है। इसलिए हमें आत्मसंयम बरतते हुए इसके साथ जीना सीखना होगा-हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। (जैक एल रोज्दिलस्की: आपदा एवं आपात प्रबंधन के एसोसिऐट प्रोफेसर, यॉर्क यूनिवर्सिटी, कनाडा)


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ल्‍हासा लद्दाख में भारतीय सैनिकों से कड़े प्रतिरोध का सामना रहे चीन ने अब तिब्बितयों को भारत से लड़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। चीनी अधिकारियों ने तिब्‍बती बच्‍चों को विशेष शिविरों में भेजना शुरू कर दिया है ताकि इन बच्‍चों को चीन के नजरिए से दुनिया के बारे में बताया जा सके। चीन इन बच्‍चों को हथियारों का मूलभूत प्रशिक्षण दे रहा है ताकि उन्‍हें मिलिश‍िया में शामिल किया जा सके। चीन ऐसे समय में इन तिब्‍बती बच्‍चों को शामिल कर रहा है जब लद्दाख में उसके सैनिक भीषण ठंड का सामना नहीं कर पा रहे हैं। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इन शिविरों में ज्‍यादातर बच्‍चे अभी किशोर हैं लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ऐसी भी खबरें हैं कि इन शिविरों में 8 से 9 साल के बच्‍चों को भी भेजा गया है। इन शिव‍िरों में बच्‍चों के दिमाग को भरने की कोशिश की गई है ताकि स्‍थानीय लोग तिब्‍बतियों को भर्ती करने का विरोध नहीं कर सकें। इससे पहले इसी महीने तिब्‍बती एक्‍शन इंस्‍टीट्यूट ने एक रिपोर्ट जारी करके कहा कि चीनी अधिकारियों ने तिब्‍बत में बोर्डिंग स्‍कूलों का एक व्‍यापक नेटवर्क तैयार किया है ताकि वहां के बच्‍चों को उनके मां बाप से अलग किया जा सके। 9 लाख तिब्‍बती बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों में पढ़ रहे इन स्‍कूलों के जरिए बच्‍चों को उनके तिब्‍बती भाषा और संस्‍कृति से दूर किया जा सकेगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 लाख तिब्‍बती बच्‍चे जिनकी उम्र 6 से लेकर 18 साल के बीच है, सरकारी स्‍कूलों में पढ़ रहे हैं। इन स्‍कूलों में लाखों तिब्‍बती बच्‍चों को चीनी नागरिकों की तरह से बनाया जा रहा है ताकि वे चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के प्रति वफादार बन सकें। उन्‍हें परिवार से अलग कर दिया गया है और चीनी भाषा पढ़ाई जा रही है। उन्‍हें अपने धर्म को भी नहीं मानने दिया जा रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन शिविरों में बच्‍चों को तिब्‍बती बौद्ध संस्‍कृति से घृणा करना सीखाया जा रहा है और उन्‍हें सैनिक के रूप में तैयार किया जा रहा है। चीन ने न्यिंगत्रि में सैन्‍य प्रशिक्षण शिविर स्‍थापित किया है। यह इलाका भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्‍य से बिल्‍कुल सटा हुआ है। इसे दक्षिणी तिब्‍बत कहा जाता है। माना जा रहा है कि चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के इशारे पर इस तरह से सैन्‍य प्रशिक्षण शिविर बनाए जा रहे हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक इस सैन्‍य प्रशिक्षण वाले अड्डे को वर्ष 2021 के शुरुआत में बनाया गया है। युवाओं को स्‍कूल की छुट्टी के दौरान प्रशिक्षण दिया जा रहा चीनी सेना के शिव‍िर की तरह से बनाए गए इन प्रतिष्‍ठानों में तिब्‍बती युवाओं को स्‍कूल की छुट्टी के दौरान प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तिब्‍बतियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्री तिब्‍बत के मुताबिक इस शिविर को ऐसी जगह पर बनाया गया है जहां पर पहले ही बड़े पैमाने पर सेना तैनात है। उधर, चीनी मीडिया का दावा है कि इन केंद्रों का निर्माण तिब्‍बती युवाओं को राष्‍ट्रीय रक्षा शिक्षा देना है ताकि उनके अंदर चीन के प्रति प्‍यार आ सके और देशभक्ति की भावना पैदा हो। वे अपने देश की सीमाओं की रक्षा कर सकें।


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वॉशिंगटन/नई दिल्‍ली सैकड़ों परमाणु बमों से लैस चीन-पाकिस्‍तान के खतरे का सामना कर रहे भारत के अग्नि पी मिसाइल परीक्षण की गूंज दुनियाभर में सुनी जा रही है। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की नई पीढ़ी की यह मिसाइल मात्र कुछ सेकंड में पाकिस्‍तान को तबाह करने की बेजोड़ ताकत रखती है। उन्‍होंने कहा कि इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका कनस्‍तर के अंदर बंद होना है। टिन के डब्‍बे में बंद होने की वजह से इस मिसाइल में परमाणु बम को फिट करने में लगने वाला समय नहीं लगता है और भारत बहुत जल्‍द भीषण हमला करने में सक्षम हो गया है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्‍ट की ताजा रिपोर्ट में अग्नि पी की खासियत के बारे में बताया गया है। इसमे कहा गया है कि अग्नि पी मिसाइल के अंदर अग्नि -4 और अग्नि-5 की तकनीकों को शामिल किया गया है। इसमें नए रॉकेट मोटर्स, नेविगेशन सिस्‍टम और अन्‍य उपकरणों को लगाया गया है। यह मिसाइल अब अग्नि 1 मिसाइल की जगह लेगी। इसमें लगाया गया लॉन्‍चर इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पर ले जा सकता है। ऐसी भी खबरें हैं कि अग्नि पी और अग्नि 5 मिसाइलें एक साथ कई परमाणु बम गिराने में सक्षम हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ सेकंड में ही दुश्‍मन के खिलाफ परमाणु बम से पलटवार अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा कि कनस्‍तर में सील बंद होने की वजह से अग्नि पी मिसाइल एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाए जाते समय वातावरण के प्रभाव में नहीं आती है। इस संस्‍करण में परमाणु बम को मिसाइल के अंदर ही लगाकर रखा जाता है। इससे संकट के समय में भारत मात्र कुछ सेकंड में ही दुश्‍मन के खिलाफ परमाणु बम से पलटवार कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने इस मिसाइल को पाकिस्‍तान को लक्ष्‍य करके बनाया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर परमाणु बम को कनस्‍तर में बंद मिसाइलों के अंदर फिट करके रखा जाता है तो इसे परमाणु संकट के समय दुश्‍मन के लिए पकड़ पाना आसान नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि भारत अब बहुत कम समय में जवाबी हमला कर सकता है। भारत के पास नई अग्नि 5 मिसाइल है जो 5 हजार किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल कनस्‍तर से लैस है और उसी को अब अग्नि पी में फिट किया गया है। कम मिसाइलों से ज्‍यादा लक्ष्‍यों को तबाह कर सकेगा भारत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एक मिसाइल से कई परमाणु बम गिराने की तकनीक पर भी काम कर रहा है। इसे MIRV तकनीक कहा जाता है और चीन के पास यह तकनीक पहले से ही मौजूद है। ऐसी अफवाह थी कि भारत ने जून 2021 में किए गए अपने टेस्‍ट में MIRV तकनीक का परीक्षण किया था लेकिन भारतीय रक्षा सूत्रों का कहना है कि इस तकनीक को बनाने और परीक्षण करने में अभी दो और साल लगेंगे। वैज्ञानिकों ने कहा क‍ि अगर भारत MIRV क्षमता हासिल कर लेता है तो वह कम मिसाइलों से ज्‍यादा लक्ष्‍यों को तबाह कर सकेगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा कि भारत के शत्रु चीन के पास पहले से ही यह तकनीक है और इसी वजह से भारत MIRV तकनीक हासिल करने के लिए प्रेरित हुआ है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच MIRV तकनीक को लेकर मची होड़ से इस इलाके पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। भारत इससे भविष्‍य में और ज्‍यादा परमाणु बम बनाने के लिए प्रेरित हो सकता है। उन्‍होंने कहा क‍ि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्‍तेमाल नहीं करने नीति पर चलता है लेकिन चीन के बढ़ते खतरे के बीच इसे बदलने की मांग उठ रही है।


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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...