कैलिफोर्निया अमेरिकी स्पेस एजेंसी के मंगल मिशन पर गए Inegnuity हेलिकॉप्टर की टेस्ट फ्लाइट के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) ने टेक्निकल रुकावट के बाद 14 अप्रैल को टेस्ट करने का फैसला किया था लेकिन ताजा अनैलेसिस के मुताबिक अभी अगले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है। 9 अप्रैल को किए गए हाई-स्पीड रोटर-स्पिनिंग टेस्ट का वीकेंड पर अनैलेसिस करने के बाद टीम ने पाया कि अभी फ्लाइट टेस्ट के लिए रुकना पड़ सकता है। अगले हफ्ते तारीख पर फैसला JPL ने जानकारी दी है कि हेलिकॉप्टर के फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर में कुछ मॉडिफिकेशन और रीइंस्टॉलेशन की जरूरत है। अभी फ्लाइट डेट पर अंतिम फैसला नहीं किया जा सका है लेकिन अगले हफ्ते किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर चेंज का वैलिडेशन और कुछ और प्रक्रियाओं में कुछ वक्त लग सकता है। इसमें कितना समय लगेगा, यह समझने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया है कि इस चुनौती को पार कर लिया जाएगा और किसी दूसरे ग्रह पर पहली कंट्रोल-पावर्ड फ्लाइट का इतिहास रचा जाएगा। तो सफल होगा मिशन Ingenuity की हालत एकदम सही है और इसकी ऊर्जा-संचार प्रणाली सही से काम कर रही हैं। NASA के मुताबिक अगर हेलिकॉप्टर टेक ऑफ और कुछ दूर घूमने में सफल रहा तो मिशन का 90% सफल रहेगा। अगर यह सफलता से लैंड होने के बाद भी काम करता रहा तो चार और फ्लाइट्स टेस्ट की जाएंगी। यह पहली बार किया जा रहा टेस्ट है इसलिए वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं और हर पल कुछ नया सीखने की उम्मीद में हैं। क्यों है हेलिकॉप्टर की जरूरत? मंगल पर रोटरक्राफ्ट की जरूरत इसलिए है क्योंकि वहां की अनदेखी-अनजानी सतह बेहद ऊबड़-खाबड़ है। मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ज्यादा ऊंचाई से एक सीमा तक ही साफ-साफ देख सकते हैं। वहीं रोवर के लिए सतह के हर कोने तक जाना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में ऐसे रोटरक्राफ्ट की जरूरत होती है जो उड़ कर मुश्किल जगहों पर जा सके और हाई-डेफिनेशन तस्वीरें ले सके।
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