Monday, 27 December 2021

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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी अरब ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों के खिलाफ लगातार हवाई हमले कर रहा है। सऊदी गठबंधन सेना ने कहा कि उसने विद्रोहियों का हथियारों का गोदाम तबाह कर दिया है। अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने हूती विद्रोहियों को भेजी जा रही 1400 एके-47 राइफल को अरब सागर में एक मछली पकड़ने वाली नौका से पकड़ा था। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक हूती विद्रोही अल तशरीफात कैंप में हथियार भेजने की कोशिश कर रहे थे और इसी के जवाब में तत्‍काल हवाई हमला किया गया। यमन में साल 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है और वहां सरकार के खिलाफ ईरान समर्थक हूती विद्रोही जंग छेड़े हुए हैं। हूती विद्रोहियों ने देश के ज्‍यादातर उत्‍तरी हिस्‍से को अपने कब्‍जे में कर लिया है। ये विद्रोही अक्‍सर सऊदी अरब पर ड्रोन हमले करते रहते हैं। हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले में सऊदी के दो लोगों की मौत हूती विद्रोहियों के हमले में सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सऊदी अरब लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान हूती व्रिदोहियों को घातक हथियार मुहैया करा रहा है। वहीं हिज्‍बुल्‍ला हूती विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहा है। ईरान ने सऊदी अरब के इन आरोपों को खारिज किया है। शनिवार को हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले में सऊदी अरब के दो लोगों की मौत हो गई थी। तीन साल में यह अपनी तरह की पहली मौत थी। इसके बाद सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्‍य अभियान शुरू किया था। इससे पहले भारत से सटे अरब सागर में एके-47 की एक बड़ी तस्करी पकड़ी गई थी। अमेरिकी नौसेना ने पिछले दिनों बताया था कि उसकी पांचवी फ्लीट ने गश्ती के दौरान उत्तरी अरब सागर से 1400 एके-47 राइफलें और गोला--बारूद को बरामद किया है। ये राइफलें एक मछली पकड़ने वाली बोट पर छिपाई गईं थीं। बड़ी बात यह है कि यह बोट किसी भी देश में रजिस्ट्रेशन के बिना समुद्र में घूम रही थी। नौसेना ने दावा किया है कि इन एके-47 राइफलों को यमन में हूती विद्रोहियों को भेजा जा रहा था। शक जताया गया है कि इनका निर्माण ईरान में किया गया है। ईरानी जहाज से असॉल्ट राइफलें, लाइट मशीन गन मिले अधिकारियों ने बताया था कि उन्हें इस जहाज से वाणिज्यिक शिपिंग और उनके नेविगेशन को खतरा पैदा होने का अंदेशा था। ऐसे में आदेश मिलने पर जहाज से चालक दल और हथियारों को हटाकर उसे समुद्र में डूबा दिया गया। इस साल 11 फरवरी को अमेरिकी नौसेना के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस विंस्टर्न एस चर्चिल ने अंतराष्ट्रीय कानून के अनुसार, सोमालिया के तट पर एक स्टेटलेस शिप से हथियारों की बड़ी बरामदगी की थी। इसमें एके-47 असॉल्ट राइफलें, लाइट मशीन गन, रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर और भारी स्नाइपर राइफल सहित कई दूसरे हथियार मिले थे।


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Sunday, 26 December 2021

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रोम पोप फ्रांसिस ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते कुछ पारिवारिक परेशानियां बढ़ गई हैं, लेकिन विवाहित लोगों को विवाह के संबंध में तीन शब्दों 'आग्रह, आभार तथा क्षमा' को सदैव याद रखना चाहिये। फ्रांसिस का विवाहित दंपत्तियों को लिखा एक पत्र रविवार को यीशु के परिवार की स्मृति में एक कैथोलिक उत्सव के दिन जारी हुआ। पोप ने पत्र में लिखा कि लॉकडाउन और पृथकवास के चलते परिवारों को अधिक समय साथ बिताने का अवसर मिला था, लेकिन इस तरह जबरदस्ती साथ रहना कई बार माता-पिता और भाई-बहनों के धैर्य की परीक्षा लेता है और कुछ मामलों में परेशानियों का कारण बनता है। फ्रांसिस ने पत्र में लिखा, 'पहले से व्याप्त परेशानियां और बढ़ गई हैं, जिससे संघर्ष पैदा हो रहे हैं। कुछ मामलों में ये संघर्ष असहनीय हो जाते हैं। कई बार तो रिश्ते में अलगाव तक की नौबत आ जाती है।' उन्होंने लिखा, 'विवाह का टूटना काफी दुखदायी होता है क्योंकि कई आशाएं दम तोड़ देती हैं और गलतफहमियों के चलते टकराव बढ़ता है और इस पीड़ा से आसानी से पार नहीं पाया जा सकता। बच्चों को अपने माता-पिता को अलग-अलग देखकर पीड़ा का सामना करना पड़ता है।' पोप ने कहा, 'याद रखिये, क्षमा हर घाव को भर देती है।' पोप ने कहा कि विवाह के संबंध में तीन महत्वपूर्ण शब्द सदैव याद रखें: 'आग्रह, आभार और क्षमा।'


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मॉस्को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को कहा कि अगर पश्चिमी देश नाटो का विस्तार यूक्रेन तक नहीं करने की सुरक्षा गारंटी की उनकी मांग को पूरा नहीं करते हैं तो वह अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में मॉस्को ने सुरक्षा दस्तावेज का मसौदा जमा किया था जिसमें मांग की गई थी कि नाटो यूक्रेन और पूर्व सोवियत संघ के देशों को सदस्यता देने से इनकार करे और मध्य एवं पूर्वी यूरोप में सैन्य तैनाती को वापस ले। पुतिन ने आह्वान किया कि पश्चिम उनकी मांगों को जल्द पूरा करे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पश्चिमी देश हमारे देश के करीब ‘आक्रमकता’ को जारी रखेंगे तो मॉस्को ‘उचित सैन्य और प्रौद्योगिकीय कदम’ उठाएगा। रूस के सरकारी टेलीविजन चैनल पर पुतिन के बयान का प्रसारण रविवार को किया गया। जब उनसे मॉस्को के संभावित कदम को बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा, ‘यह विभिन्न प्रकार के हो सकते’’हैं। पुतिन ने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा कि ‘यह हमारे सैन्य विशेषज्ञों द्वारा मेरे समक्ष पेश किए गए प्रस्ताव पर आधारित होगा।’ उल्लेखनीय है कि अमेरिका और उसके साझेदार रूस को यूक्रेन पर उस तरह की गारंटी देने से इनकार कर चुके हैं जैसा पुतिन चाहते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अर्हता रखने वाले किसी भी देश के लिए नाटो की सदस्यता खुली है। हालांकि वे रूस की चिंताओं पर चर्चा के लिए उसके साथ अगले महीने वार्ता करने पर सहमत हुए हैं। पुतिन ने कहा कि जिनेवा में अमेरिका के साथ वार्ता होगी। समानांतर वार्ता भी रूस और नाटो के साथ होगी और यूरोप में सुरक्षा और सहयोग के लिए बने इस संगठन के साथ विस्तृत मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। पुतिन ने कहा कि रूस ने अपनी मांग रख दी है और उम्मीद करता है कि पश्चिम से सकरात्मक जवाब आएगा।


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बीजिंग ताइवान को प्रतिनिधि ऑफिस खोलने की अनुमति देने के बाद चीन ने यूरोप के छोटे से देश लिथुआनिया को 'इतिहास के कचड़े के डिब्‍बे' में भेज देने की धमकी दी है। चीन जहां दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश है, वहीं लिथुआनिया की जनसंख्‍या मात्र 30 लाख है। लिथुआनिया के ताइवान को अनुमति देने से चीन लाल हो गया है जो उसे अपना एक हिस्‍सा मानता है। इससे पहले अगस्‍त महीने में लिथुआनिया ने कहा था कि वह ताइवान को उसके अपने नाम से एक कार्यालय को खोलने की अनुमति देगा। इस ऐलान के बाद चीन ने लिथुआनिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था। चीन ने लिथुआनिया से अपने राजनयिक रिश्‍ते को भी कम कर दिया था। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ लिजिन ने कहा कि लिथुआनिया सार्वभौमिक सिद्धांतों के दूसरी तरफ खड़ा है जिसका कभी सुखद अंत नहीं होगा। लिथुआनिया चीन को लगातार ललकार रहा झाओ ने चेतावनी दी कि जो लोग ताइवान के अलगाववादी ताकतों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दे रहे हैं, उन्‍हें इतिहास के कूड़े के डिब्‍बे में भेज दिया जाएगा। बता दें कि लिथुआनिया दुनिया की महाशक्तियों में शुमार चीन को लगातार ललकार रहा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध आजतक के इतिहास में सबसे निचले स्तर पर हैं। चीन और लिथुआनिया के नेता जुबानी जंग में भी एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। चीन चाहता है कि लिथुआनिया तुरंत ताइवान के साथ अपने संबंधों को खत्म करे, जबकि यह देश इसे संप्रभु फैसला बताते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच चीन की धमकियों की परवाह न करते हुए लिथुआनिया के एक सांसद ने पिछले दिनों बीजिंग को 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कॉमेडी' तक बता दिया था। दरअसल, चीन का पूरा नाम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना है। यह सांसद कोई और नहीं, बल्कि एक हफ्ते पहले ही ताइवान गए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले लिथुआनियाई नेता मातस मालदेइकिस हैं। लिथुआनिया ने इस साल की शुरुआत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वकांक्षी मिशन सीईईसी को छोड़ने का ऐलान किया था। ताइवान के साथ राजनयिक संबंध भी बहाल किया इस फोरम को 2012 में चीन ने शुरू किया था। इसमें यूरोप के 17 देश शामिल हैं, जबकि 18वां देश खुद चीन है। लिथुआनिया के विदेश मंत्री गेब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने चीन के सीईईसी फोरम को विभाजनकारी बताया था। इस परियोजना के तहत चीन मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। इतना ही नहीं, लिथुआनिया ने इसके बाद चीन को उकसाने के लिए ताइवान के साथ राजनयिक संबंध भी बहाल किया है।


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सोफिया साल 2021 बीत रहा है और कुछ ही दिनों बाद नया साल शुरू हो जाएगा। इस बीच अमेरिका में अलकायदा के 9/11 हमले से लेकर सुनामी तक की सटीक भविष्‍यवाणी करने वाली बुल्‍गारिया की भविष्‍यवक्‍ता बाबा वेंगा ने चेतावनी दी है कि साल 2022 में कोरोना से भी घातक वायरस आएगा। यही नहीं उन्‍होंने यह भी कहा है कि नए साल में एलियन धरती पर हमला कर सकते हैं। टिड्ड‍ियों के हमले से भारत में भुखमरी आ सकती है। बाबा वेंगा को बाल्‍कन क्षेत्र का नास्‍त्रेदमस भी कहा जाता है। बाबा वेंगा असली नाम वेंगेलिया गुश्‍तेरोवा है और उनकी 1996 में मौत हो गई थी। बाबा वेंगा का जन्‍म साल 1911 में हुआ था और उन्‍होंने दावा किया था कि ईश्‍वर ने उन्‍हें भविष्‍य को देखने का दुर्लभ तोहफा दिया है। मात्र 12 साल की उम्र में एक भीषण तूफान में बाबा वेंगा के आंखों की रोशनी चली गई थी। उन्‍होंने खुद अपनी मौत की सटीक भविष्‍यवाणी की थी। बाबा वेंगा ने साल 1996 में मरते समय साल 5079 तक के लिए अपनी भविष्‍यवाणी बता दी थी। बाबा वेंगा की अब तक कई भविष्‍यवाणी सच बाबा वेंगा का मानना था कि साल 5079 में दुनिया का अंत हो जाएगा। वेंगा ने मरने से पहले सोवियत संघ के विघटन, 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले, 2004 की सुनामी, अफ्रीकी अमेरिकी मूल के व्यक्ति के अमेरिकी प्रेजिडेंट बनने, ब्रिटेन की राजकुमारी डायना के मौत और 2010 के अरब स्प्रिंग जैसी कई सटीक भविष्यवाणियां की थीं। अब साल 2022 के लिए उनकी भविष्‍यवाणी सामने आ गई है। बाबा वेंगा की साल 2022 के लिए भविष्‍यवाणी टाइम्‍स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक बाबा वेंगा का दावा है कि नए साल में दुनिया में प्राकृतिक आपदाएं आएंगी। ऑस्‍ट्रेलिया और कई एशियाई देशों में भीषण बाढ़ आएगी। उन्‍होंने कहा कि कोरोना से भी खतरनाक वायरस साल 2022 में दस्‍तक दे सकता है। उन्‍होंने कहा कि वैज्ञानिकों का एक दल साइबेरिया में एक नए वायरस को खोज निकालेगा जो अभी तक बर्फ में जमा हुआ था। दुनियाभर में पीने का पानी चिंता का विषय बना हुआ है। बाबा वेंगा का दावा है कि आने वाले साल में दुनिया के कई देशों में पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है। टिड्डी दल के हमले से साल 2021 में दुनिया परेशान थी। बाबा वेंगा का दावा है कि टिड्ड‍ियों का दल भारत में फसलों और खेतों पर भीषण हमला करेगा जिससे भारत में भीषण भुखमरी आ सकती है। बता दें कि भारत में साल 2020 में टिड्ड‍ियों ने राजस्‍थान, गुजरात और मध्‍य प्रदेश में भीषण हमला किया था और फसलों को चट कर दिया था। बाबा वेंगा ने कहा है कि साल 2022 में ऐस्‍टरॉइड Oumuamua को एलियन भेजेंगे ताकि धरती पर जीवन की तलाश की जा सके।


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जोहानिसबर्ग दक्षिण अफ्रीका में नस्ली न्याय और एलजीबीटी अधिकारों के संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले कार्यकर्ता और केप टाउन के सेवानिवृत्त एंग्लिकन आर्चबिशप डेसमंड टूटू का निधन हो गया है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने रविवार को यह जानकारी दी। टूटू 90 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेसमंड टूटू के निधन पर गहरा दुख जताया है। रंगभेद के कट्टर विरोधी, काले लोगों के दमन वाले दक्षिण अफ्रीका के क्रूर शासन के खात्मे के लिए टूटू ने अहिंसक रूप से अथक प्रयास किए। उत्साही और मुखर पादरी ने जोहानिसबर्ग के पहले काले बिशप और बाद में केप टाउन के आर्चबिशप के रूप में अपने उपदेश-मंच का इस्तेमाल किया और साथ ही घर तथा विश्व स्तर पर नस्ली असमानता के खिलाफ जनता की राय को मजबूत करने के लिए लगातार सार्वजनिक प्रदर्शन किया। टूटू को न केवल दक्षिण अफ्रीका में बल्कि पूरी दुनिया में चर्चित पीएम मोदी ने टूटू के निधन पर गहरा दुख जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'डेसमंड टूटू विश्‍वभर में अ‍नगिनत लोगों के लिए राह दिखाते थे। उनका मानवीय गरिमा और समानता के लिए जोर देना हमेशा याद किया जाएगा।' बता दें कि नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले टूटू नस्‍ली समानता के लिए कभी भी सच बोलने से नहीं घबराए। टूटू को न केवल दक्षिण अफ्रीका में बल्कि पूरी दुनिया में काफी चर्चित थे। दक्षिण अफ्रीका के राष्‍ट्रपति रामफोसा ने कहा कि टूटू एक चर्चित आध्‍यात्मिक नेता, रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता और विश्‍वभर में मानवाधिकारों के समर्थक थे। उन्‍होंने टूटू को एक राष्‍ट्रभक्‍त करार दिया जो असाधारण बुद्धिकौशल, निष्‍ठा से भरे हुए थे। साथ ही नस्‍लभेद के शिकार लोगों की मदद करते थे।


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इस्‍लामाबाद पाकिस्तान में अगले आम चुनाव से पहले पीएमएल-एन सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की संभावित वापसी की अफवाहों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ, जो पूर्व प्रधानमंत्री के भाई भी हैं, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नवाज शरीफ पूरी तरह से ठीक होने तक वापस नहीं आएंगे। नवाज शरीफ की वापसी की अटकलें ऐसे समय पर लगाई जा रही हैं जब कहा जा रहा है कि सेना के साथ उनका तालमेल फिर से ठीक हो गया है। शनिवार को जारी एक बयान में, शहबाज शरीफ ने कहा कि नवाज शरीफ ब्रिटेन में कानूनी रूप से तब तक रह सकते हैं जब तक कि ब्रिटिश गृह कार्यालय द्वारा वीजा बढ़ाने की अस्वीकृति के खिलाफ उनकी अपील पर आव्रजन न्यायाधिकरण नियम नहीं बनाते। इस बीच, पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरियम नवाज ने एक ट्वीट में कहा , ‘इस नकली सरकार ने नवाज शरीफ से अपनी हार स्वीकार कर ली है, जो पाकिस्तान का वर्तमान और भविष्य है। एक बड़े व्यक्तित्व को निशाना बनाकर, एक पिग्मी का कद ऊंचा नहीं किया जा सकता है।’ चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित जवाबदेही और आंतरिक बैरिस्टर पर प्रधानमंत्री (एसएपीएम) के विशेष सहायक, शहजाद अकबर ने सवाल किया कि क्या नवाज शरीफ देश की राजनीति में भाग ले सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी घोषित कर दिया और उन्हें जीवन के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। साथ ही एक जवाबदेही अदालत ने उन्हें एनएबी मामले में दोषी ठहराया। अकबर ने कहा, ‘नवाज शरीफ को फिर से चुनाव लड़ने में सक्षम करने के लिए यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि बार काउंसिल अदालत में याचिका दायर कर रही है। बार काउंसिल के लिए अदालत में याचिका दायर करना उचित नहीं है। मुझे समझ में नहीं आता कि उन्हें चौथी बार पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाना कानूनी रूप से कैसे व्यवहार्य है।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष ने हाल ही में नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल द्वारा इस मुद्दे को उठाना एक राजनीतिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट बार एक पेशेवर निकाय है, इसलिए इसे खुद को राजनीतिक मामलों में शामिल होने से बचना चाहिए। नवाज शरीफ के मामले के संबंध में परिषद से एक आवेदन जमा करना उचित नहीं था। उन्होंने अब तक कदम नहीं उठाया है। मैं उनसे समीक्षा करने का आह्वान करता हूं ।’


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Saturday, 25 December 2021

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पेरिस ब्रिटेन और अमेरिका के बाद अब फ्रांस में कोरोना वायरस विकराल रूप धारण करता दिख रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1,04,611 मामले सामने आए। यह लगातार तीसरा दिन है जब फ्रांस में इतनी बड़ी तादाद में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों के बाद अब फ्रांस के प्रधानमंत्री इमैनुअल मैक्रां और उनकी सरकार के अन्‍य मंत्री सोमवार को एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। इसमें कोरोना से बचाव के नए उपायों पर चर्चा हो सकती है। फ्रांस के अधिकारी कोरोना के तेजी से प्रसार करने वाले ओमीक्रोन वेरिएंट को लेकर चिंतित हैं। शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों ने वयस्‍कों को टीका लगने के तीन महीने बाद बूस्‍टर डोज देने की सिफारिश कर दी। फ्रांस में कोविड-19 और ओमीक्रोन के मामले बढ़ने के साथ अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है और ज्यादातर ऐसे मरीज हैं जिन्होंने टीके की खुराक नहीं ली थी। क्रिसमस पर अस्पतालों ने मरीजों के परिवारों को मुलाकात करने की अनुमति दी, लेकिन अपने प्रियजनों की फिक्र में लोग उदास नजर आए। ‘टीका खतरनाक नहीं है, यह जीवन चुनने के समान है’ मार्सेली अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती कोविड-19 के मरीज डेविड डेनियल सेबाग (52) को अफसोस है कि उन्होंने टीके की खुराक नहीं ली थी। उन्होंने कहा, ‘टीका खतरनाक नहीं है। यह जीवन चुनने के समान है।’ आईसीयू के मुख्य डॉक्टर जुलियन कार्वेली ने अपनी टीम के साथ मरीजों का उत्साह बढ़ाया कि वे एक और क्रिसमस देख सकते हैं। ओमीक्रोन स्वरूप के कारण बढ़ते मामलों से अस्पतालों के बेड भरते जा रहे हैं और कर्मचारी भी थक चुके हैं। कार्वेली ने कहा, ‘हमें डर है कि आगे हमारे पास पर्याप्त स्थान नहीं होगा।’ फ्रांस के बड़े अस्पतालों में शुमार मार्सेली के ला तिमोने हॉस्पिटल में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर अस्पताल के परिसर को सजाया गया और छुट्टियों के बावजूद कार्यरत कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया गया। अस्पताल ने भी आईसीयू में भर्ती मरीजों के परिजन को उनसे मिलने की अनुमति दी। एमिली खयात हर दिन अपने पति लूडो (41) को देखने अस्पताल जाती हैं जो 24 दिन से कोमा में थे और अब श्वसन मशीनों के सहारे जिंदा हैं। एमिली आईसीयू में अपने पति के बेड पर कुछ देर तक बैठी रहीं और उन्हें ढांढस दिया। फ्रांस में 90 प्रतिशत वयस्कों का टीकाकरण हो चुका है और करीब 40 प्रतिशत को बूस्टर खुराक भी लग चुकी है। ला तिमोने हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित जितने मरीज भर्ती हैं, उनमें से ज्यादातर ने टीके की खुराक नहीं ली थी। सेबाग ने कहा, ‘मुझे बहुत अफसोस है। मैंने खुद को इन चीजों में फंसा लिया। मुझे लगता था कि टीका लेना जरूरी नहीं है।’ सेबाग की पत्नी इस्तर ने अपने पति की बीमारी की गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस सप्ताह हमारी जिंदगी में कोहराम मच गया...मुझे लगा मैं सबकुछ गंवाने वाली हूं।’ ओमीक्रोन से कई स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित हुए हैं सेबाग अब भी संक्रमण मुक्त नहीं हुए हैं और ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। सेबाग ने कहा, ‘अगर मैंने टीके की खुराक ली होती तो शायद आईसीयू में आने की जरूरत नहीं होती।’ दुनिया में ओमीक्रोन स्वरूप के प्रसार के साथ फ्रांस में इन दिनों संक्रमण के सर्वाधिक मामले आ रहे हैं। मार्सेली में आईसीयू के प्रमुख कार्वेली ने कहा, ‘हम बहुत तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। कुछ ही बेड उपलब्ध हैं। हम यह सब देखते देखते थक चुके हैं। इसके बावजूद काम पर ध्यान केंद्रित करने का सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि पहली बात ये कि ओमीक्रोन से कई स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित हुए हैं और वे काम के लिए उपलब्ध नहीं है। वहीं, कुछ कर्मचारी अत्यधिक दबाव के कारण पेशे को अलविदा कह चुके हैं।


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पेइचिंग एक चीनी सैटेलाइट ने कॉमेट लियोनार्ड के एक अद्भुत नजारे को कैमरे में कैद किया जब यह धरती के सबसे नजदीक था। वीडियो में धूमकेतु का अरोरा साफतौर पर देखा जा सकता है। इस साल जनवरी में इसकी खोज की गई थी जिसके बाद से यह करीब 160,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी और सूर्य की तरफ बढ़ रहा है। यह कॉमेट हमारी पृथ्वी के पास से होकर गुजर रहा है। बीते 12 दिसंबर को यह पृथ्वी के 70,000 सालों में सबसे करीब था, जब यह क्लिप रेकॉर्ड की गई। इस नजारे को यांगवांग 1 (Yangwang 1) ने कैप्चर किया है जो चीन के ग्वांगडोंग में स्थित चीनी प्रौद्योगिकी कंपनी ओरिजिन स्पेस की ओर से लॉन्च किया गया एक छोटा सैटेलाइट है। यांगवांग 1 एक कमर्शियल स्पेस टेलिस्कोप है जिसे इस साल की शुरुआत में पराबैंगनी प्रकाश में ब्रह्मांड की तस्वीरें खींचने के लिए लॉन्च किया गया था। यह धरती के करीब मौजूद ऐस्टरॉइड पर भी खोज कर रहा है जिन्हें संभवतः एक दिन संसाधनों के लिए खनन किया जा सकता है और पृथ्वी पर वापस लाया जा सकता है। 12 दिसंबर को खींची अद्भुत तस्वीरइस स्पेसक्राफ्ट ने 12 दिसंबर 2021 को सितारों से भरे आसमान के बीच कॉमेट लियोनार्ड की तस्वीर खींची थी। इस रंगीन तस्वीर को ओरिजिन स्पेस ने शेयर किया है, जिसमें धूमकेतु को अपनी लंबी पूंछ के साथ रात के आकाश में देखा जा सकता है। इसकी पूंछ तब दिखाई पड़ती है जब यह गैस और पानी की बर्फ जैसी वाष्पशील सामग्री को बाहर की ओर फेंकता है जिससे इसकी चमक लगातार बदलती रहती है। 1 किमी चौड़ी बर्फ और धूल की गेंदधूमकेतु लियोनार्ड 3 जनवरी, 2022 को कई सदियों बाद सूर्य के सबसे करीब पहुंचेगा। उस घटना को कैद करने के लिए नासा और ईएसए ने अपने सैटेलाइट उस दिशा में भेजे हैं। बर्फ और धूल की यह विशालकाय गेंद करीब आधा मील (करीब 1 किमी) चौड़ी है। इससे पहले नासा के सोलर टेरेस्ट्रियल रिलेशंस ऑब्जर्वेटरी एस्पेसक्राफ्ट (STEREO-A) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सोलर ऑर्बिटर ऑब्जर्वेटरी ने इसका वीडियो बनाया था। STEREO-A नवंबर से हरे धूमकेतु पर नजर बनाए हुए है।


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इस्‍लामाबाद पाकिस्तान में ब्लूचिस्तान के ग्वादर आंदोलन से जुड़े नेता मौलाना हिदायतुर रहमान ब्लूच ने इमरान खान सरकार को चेतावनी दी है। बलूच ने कहा है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर (सीपीईसी) और ब्लूचिस्तान के संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार है। मौलाना रहमान ने ओरमारा में ब्लूच मछुआरों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी को भी ब्लूचिस्तान समुद्र से संसाधनों की लूट खसोट नहीं करने दी जाएगी क्योंकि इन पर स्थानीय मछुआरों का हक है। मौलाना बलूच चीनी वाणिज्यिक मछुआरा ट्रालर का जिक्र कर रहे थे जो अरब सागर में बड़े पैमाने पर मछलियां पकड़ रहे हैं। समाचार पत्र द डॉन के मुताबिक उन्होंने पाकिस्तानी नौसेना की ओर से की जा रही तारंबदी का जिक्र करते हुए कहा ‘अगर अब से पाकिस्तान की नौसेना ने तारंबदी की तो उसे ओरमारा के लोगों से इसके बारे में पूछना होगा नहीं तो हम इसे नष्ट कर देंगे।’ रोजगार स्थानीय युवकों के बजाए चीनी नागरिकों को दिए जा रहे बता दें कि जिस क्षेत्र में चीन इस कोरिडोर का निर्माण कर रहा है या नौसैनिक परियोजनाओं में संलग्न हैं , उसके आसपास पाकिस्तानी सेना तारबंदी कर रही है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों का इन क्षेत्रों में प्रवेश सीमित हो गया है तथा ब्लूचिस्तान में भी उनकी गतिविधियां सीमित होती जा रही हैं। यहां के लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि इस परियोजना से जुड़े रोजगार के अवसर स्थानीय युवकों के बजाए चीनी नागरिकों को दिए जा रहे हैं। भौगोलिक और राजनीतिक मामलों के जानकार मार्क किनरा ने बताया कि मौलाना हिदायतुर का वह आंदोलन थोड़ा सफल होने के बाद वह चर्चा में आ गए हैं। वह इस बात को लेकर थोड़ा परेशान हो सकते हैं कि ब्लूच लोगों के अधिकारों के लिए उनका पाकिस्तान सरकार के साथ किया गया समझौता एक तरह से विफल हो गया है क्योंकि अभी भी इस क्षेत्र में चीनी ट्रालर दिखाई दे रहे हैं और कारोबारी रिश्वत मांगे जाने तथा अवैध नाका बिंदुओं की शिकायत कर रहे हैं। एक लाख लोगों के साथ क्वेटा में करेंगे धरना प्रदर्शन मौलाना हिदायतुर ने साफ तौर पर कहा है ‘इस प्रांत के सारे संसाधन हमारे हैं, यह क्षेत्र हमारा है, सीपीईसी, यह तट और बंदरगाह भी हमारा है।' उन्होंने ब्लूचिस्तान के मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह एक लाख लोगों के साथ क्वेटा में धरना प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा जब तक इस क्षेत्र से अवैध नाकाबंदी नहीं हटा दी जाती है और उन ट्रालर की गतिविधियों प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


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ढाका बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में एक महिला पर्यटक के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। महिला से दुष्कर्म के दौरान बदमाशों ने उसके पति और बेटे को बंधक बना लिया था। पुरुषों के एक समूह ने लबोनी प्वाइंट इलाके से पीड़िता के पति और बच्चे को बंधक बना लिया और कथित तौर पर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। आरएबी-15 के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल खैरुल इस्लाम ने बताया कि अर्धसैनिक बल की एलीट यूनिट के अधिकारियों ने गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे पीड़िता को जिया गेस्ट इन से बचाया। बल ने होटल प्रबंधक को हिरासत में लिया और सीसीटीवी कैमरे से वीडियो फुटेज की जांच के बाद अपराधियों की पहचान की। अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को कानून मंत्री अनीसुल हक ने बताया, ‘कॉक्स बाजार के वरिष्ठ न्यायिक दंडाधिकारी हमीमुन तंजिन ने शाम करीब पांच बजे पीड़िता का बयान दर्ज किया।’ मंत्री ने कहा, ‘अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ शुक्रवार रात तक पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी नहीं की थी। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि देश में अभी भी एक मजबूत कानून का अभाव है जो दुष्कर्म के खिलाफ सुरक्षा के रूप में काम करे। विशेषज्ञों ने देश की दुष्कर्म पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की और अधिकारियों से कम उम्र से ही यौन शिक्षा शुरू करने का आह्वान किया। लीरहो के कार्यकारी निदेशक नूरजहां खान ने बताया, ‘पिछले 50 वर्षों से, हम महिलाओं के कानूनी अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। फिर भी, पुलिस अपराध को नियंत्रित करने के बजाय, दुष्कर्म पीड़िता पर आरोप लगाती है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि, हम आभारी हैं आरएबी के। यदि वे नहीं होते तो अपराधियों की पहचान भी नहीं की गई थी।’ हाल के महीनों में दुष्कर्म की घटनाओं ने बांग्लादेश में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है और देश में 2021 के पहले 11 महीनों में रोजाना औसतन तीन मामले सामने आए हैं। जनवरी-नवंबर की अवधि में कम से कम 1,247 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुईं। उनमें से 46 की मौत हो गई, जबकि नौ ने आत्महत्या कर ली।


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टोरंटो कनाडा पिछले 700 दिन से कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की मार झेल रहा है और अब भी इस आपदा की स्थिति गंभीर और हतोत्साहित करने वाली है। कनाडा में 22 दिसंबर को संक्रमण के 12,114 नए मामले सामने आए, जो वैश्विक महामारी की शुरुआत से अब तक के सर्वाधिक दैनिक मामले हैं। कनाडा में यह लगातार दूसरा साल है, जब वैश्विक महामारी के कारण त्योहारी सीजन में प्रतिबंध लगाए गए हैं, कई गतिविधियों का पैमाना छोटा किया गया है और कई कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। कोविड-19 के कारण मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 30,000 से अधिक हो गई है। इस समय, इस आपदा से बाहर निकलने का तरीका खोजना संघीय एवं प्रांतीय सरकारों के बस की बात नहीं है। ऐसे में कनाडा के लोगों को वैश्विक महामारी से अपने संबंधों पर पुनर्विचार करना होगा और निकट भविष्य में निरंतर आपदा की स्थिति में रहना सीखना होगा। विरोधाभासी संदेश संघीय सरकार के कई संवाददाता सम्मेलनों में (कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन) ट्रुडो प्रशासन ने सावधानी से काम लेने का संकेत दिया है। कनाडा का दृष्टिकोण, अमेरिका के दृष्टिकोण से पूरी तरह विपरीत है। आपदा प्रबंधन योजना में चार चरणीय आपदा चक्र का इस्तेमाल अमेरिका का दृष्टिकोण है कि ओमीक्रोन के कारण घबराए बिना छुट्टियों का आनंद लेने की कोशिश की जाए। संवाददाताओं द्वारा सवाल किए जाने के बाद ट्रुडो सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के इस संदेश की आलोचना की कि टीकाकरण करा चुके लोग ओमीक्रोन फैलने के बावजूद छुट्टियों के लिए एकत्र हो सकते हैं। आपदा चक्र आपदा प्रबंधन योजना में अकसर चार चरणीय आपदा चक्र का इस्तेमाल किया जाता है: न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और आपदा से उबरना। चार चारणीय आपदा चक्र, आपदाओं से निपटने और उन्हें बेहतर तरीके से समझने में कई बार मददगार साबित होता है और भविष्य की आपदाओं के प्रबंधन के लिए सीख भी देता है। कोविड-19 के संदर्भ में हम अब भी आपदा के आपातकाल दौर में है। चार चरणीय आपदा चक्र का कोई लाभ नजर नहीं आ रहा और महामारी से उबरने का दौर अभी दिखाई नहीं दे रहा। लोग इतना थक चुके हैं कि उनके लिए महामारी से निपटने के लिए खुद को लगातार तैयार रखना मुश्किल हो गया है। महामारी का न्यूनीकरण इस चरण पर अब भी दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। जोखिम प्रबंधन संबंधी हालिया अनुसंधान बताते हैं कि आपदाएं बहुआयामी होती हैं और इनसे निपटने के लिए जो कदम उठाए जाते हैं, वे उनके अनुसार स्वयं में बदलाव करती हैं। कोविड-19 जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना अहम है। हमारे पास इस आपदा से निपटने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं मुश्किल स्थिति से दृढ़ता और आत्मसंयम से निपटने की आवश्यकता मौजूदा आपदा से निपटने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार, महामारियों का अंत आमतौर पर दो प्रकार से होता है। पहला चिकित्सकीय अंत होता है, यानी जब संक्रमण और मौत के मामलों में गिरावट आती है। दूसरा सामाजिक अंत होता है, जब थकान या अन्य कारणों से लोग फैसला करते हैं कि महामारी उनके लिए समाप्त हो गई है, भले ही विज्ञान कुछ भी कहे। अब यह स्वीकार करने का समय आ गया है कि हमारे पास इस आपदा से निपटने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं है। इसलिए हमें आत्मसंयम बरतते हुए इसके साथ जीना सीखना होगा-हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। (जैक एल रोज्दिलस्की: आपदा एवं आपात प्रबंधन के एसोसिऐट प्रोफेसर, यॉर्क यूनिवर्सिटी, कनाडा)


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ल्‍हासा लद्दाख में भारतीय सैनिकों से कड़े प्रतिरोध का सामना रहे चीन ने अब तिब्बितयों को भारत से लड़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। चीनी अधिकारियों ने तिब्‍बती बच्‍चों को विशेष शिविरों में भेजना शुरू कर दिया है ताकि इन बच्‍चों को चीन के नजरिए से दुनिया के बारे में बताया जा सके। चीन इन बच्‍चों को हथियारों का मूलभूत प्रशिक्षण दे रहा है ताकि उन्‍हें मिलिश‍िया में शामिल किया जा सके। चीन ऐसे समय में इन तिब्‍बती बच्‍चों को शामिल कर रहा है जब लद्दाख में उसके सैनिक भीषण ठंड का सामना नहीं कर पा रहे हैं। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इन शिविरों में ज्‍यादातर बच्‍चे अभी किशोर हैं लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ऐसी भी खबरें हैं कि इन शिविरों में 8 से 9 साल के बच्‍चों को भी भेजा गया है। इन शिव‍िरों में बच्‍चों के दिमाग को भरने की कोशिश की गई है ताकि स्‍थानीय लोग तिब्‍बतियों को भर्ती करने का विरोध नहीं कर सकें। इससे पहले इसी महीने तिब्‍बती एक्‍शन इंस्‍टीट्यूट ने एक रिपोर्ट जारी करके कहा कि चीनी अधिकारियों ने तिब्‍बत में बोर्डिंग स्‍कूलों का एक व्‍यापक नेटवर्क तैयार किया है ताकि वहां के बच्‍चों को उनके मां बाप से अलग किया जा सके। 9 लाख तिब्‍बती बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों में पढ़ रहे इन स्‍कूलों के जरिए बच्‍चों को उनके तिब्‍बती भाषा और संस्‍कृति से दूर किया जा सकेगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 लाख तिब्‍बती बच्‍चे जिनकी उम्र 6 से लेकर 18 साल के बीच है, सरकारी स्‍कूलों में पढ़ रहे हैं। इन स्‍कूलों में लाखों तिब्‍बती बच्‍चों को चीनी नागरिकों की तरह से बनाया जा रहा है ताकि वे चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के प्रति वफादार बन सकें। उन्‍हें परिवार से अलग कर दिया गया है और चीनी भाषा पढ़ाई जा रही है। उन्‍हें अपने धर्म को भी नहीं मानने दिया जा रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन शिविरों में बच्‍चों को तिब्‍बती बौद्ध संस्‍कृति से घृणा करना सीखाया जा रहा है और उन्‍हें सैनिक के रूप में तैयार किया जा रहा है। चीन ने न्यिंगत्रि में सैन्‍य प्रशिक्षण शिविर स्‍थापित किया है। यह इलाका भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्‍य से बिल्‍कुल सटा हुआ है। इसे दक्षिणी तिब्‍बत कहा जाता है। माना जा रहा है कि चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के इशारे पर इस तरह से सैन्‍य प्रशिक्षण शिविर बनाए जा रहे हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक इस सैन्‍य प्रशिक्षण वाले अड्डे को वर्ष 2021 के शुरुआत में बनाया गया है। युवाओं को स्‍कूल की छुट्टी के दौरान प्रशिक्षण दिया जा रहा चीनी सेना के शिव‍िर की तरह से बनाए गए इन प्रतिष्‍ठानों में तिब्‍बती युवाओं को स्‍कूल की छुट्टी के दौरान प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तिब्‍बतियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्री तिब्‍बत के मुताबिक इस शिविर को ऐसी जगह पर बनाया गया है जहां पर पहले ही बड़े पैमाने पर सेना तैनात है। उधर, चीनी मीडिया का दावा है कि इन केंद्रों का निर्माण तिब्‍बती युवाओं को राष्‍ट्रीय रक्षा शिक्षा देना है ताकि उनके अंदर चीन के प्रति प्‍यार आ सके और देशभक्ति की भावना पैदा हो। वे अपने देश की सीमाओं की रक्षा कर सकें।


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वॉशिंगटन/नई दिल्‍ली सैकड़ों परमाणु बमों से लैस चीन-पाकिस्‍तान के खतरे का सामना कर रहे भारत के अग्नि पी मिसाइल परीक्षण की गूंज दुनियाभर में सुनी जा रही है। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की नई पीढ़ी की यह मिसाइल मात्र कुछ सेकंड में पाकिस्‍तान को तबाह करने की बेजोड़ ताकत रखती है। उन्‍होंने कहा कि इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका कनस्‍तर के अंदर बंद होना है। टिन के डब्‍बे में बंद होने की वजह से इस मिसाइल में परमाणु बम को फिट करने में लगने वाला समय नहीं लगता है और भारत बहुत जल्‍द भीषण हमला करने में सक्षम हो गया है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्‍ट की ताजा रिपोर्ट में अग्नि पी की खासियत के बारे में बताया गया है। इसमे कहा गया है कि अग्नि पी मिसाइल के अंदर अग्नि -4 और अग्नि-5 की तकनीकों को शामिल किया गया है। इसमें नए रॉकेट मोटर्स, नेविगेशन सिस्‍टम और अन्‍य उपकरणों को लगाया गया है। यह मिसाइल अब अग्नि 1 मिसाइल की जगह लेगी। इसमें लगाया गया लॉन्‍चर इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पर ले जा सकता है। ऐसी भी खबरें हैं कि अग्नि पी और अग्नि 5 मिसाइलें एक साथ कई परमाणु बम गिराने में सक्षम हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ सेकंड में ही दुश्‍मन के खिलाफ परमाणु बम से पलटवार अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा कि कनस्‍तर में सील बंद होने की वजह से अग्नि पी मिसाइल एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाए जाते समय वातावरण के प्रभाव में नहीं आती है। इस संस्‍करण में परमाणु बम को मिसाइल के अंदर ही लगाकर रखा जाता है। इससे संकट के समय में भारत मात्र कुछ सेकंड में ही दुश्‍मन के खिलाफ परमाणु बम से पलटवार कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने इस मिसाइल को पाकिस्‍तान को लक्ष्‍य करके बनाया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर परमाणु बम को कनस्‍तर में बंद मिसाइलों के अंदर फिट करके रखा जाता है तो इसे परमाणु संकट के समय दुश्‍मन के लिए पकड़ पाना आसान नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि भारत अब बहुत कम समय में जवाबी हमला कर सकता है। भारत के पास नई अग्नि 5 मिसाइल है जो 5 हजार किमी तक मार कर सकती है। यह मिसाइल कनस्‍तर से लैस है और उसी को अब अग्नि पी में फिट किया गया है। कम मिसाइलों से ज्‍यादा लक्ष्‍यों को तबाह कर सकेगा भारत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एक मिसाइल से कई परमाणु बम गिराने की तकनीक पर भी काम कर रहा है। इसे MIRV तकनीक कहा जाता है और चीन के पास यह तकनीक पहले से ही मौजूद है। ऐसी अफवाह थी कि भारत ने जून 2021 में किए गए अपने टेस्‍ट में MIRV तकनीक का परीक्षण किया था लेकिन भारतीय रक्षा सूत्रों का कहना है कि इस तकनीक को बनाने और परीक्षण करने में अभी दो और साल लगेंगे। वैज्ञानिकों ने कहा क‍ि अगर भारत MIRV क्षमता हासिल कर लेता है तो वह कम मिसाइलों से ज्‍यादा लक्ष्‍यों को तबाह कर सकेगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा कि भारत के शत्रु चीन के पास पहले से ही यह तकनीक है और इसी वजह से भारत MIRV तकनीक हासिल करने के लिए प्रेरित हुआ है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच MIRV तकनीक को लेकर मची होड़ से इस इलाके पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। भारत इससे भविष्‍य में और ज्‍यादा परमाणु बम बनाने के लिए प्रेरित हो सकता है। उन्‍होंने कहा क‍ि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्‍तेमाल नहीं करने नीति पर चलता है लेकिन चीन के बढ़ते खतरे के बीच इसे बदलने की मांग उठ रही है।


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Friday, 24 December 2021

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इस्लामाबाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि पैगंबर मोहम्मद के अपमान को 'अभिव्यक्ति की आजादी' नहीं माना जा सकता। गुरुवार को अपनी वार्षिक प्रेस कान्फ्रेंस में पुतिन ने कहा कि पैगंबर का अपमान 'धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन और इस्लाम को मानने वाले लोगों की पवित्र भावनाओं के खिलाफ है। अब पुतिन के इस बयान के समर्थन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान उतर आए हैं। इमरान खान खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हमदर्द बताते हैं, हालांकि उइगरों पर होते अत्याचार पर उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता। इमरान खान ने ट्विटर पर लिखा, 'मैं राष्ट्रपति पुतिन के उस बयान का स्वागत करता हूं जो मेरे संदेश की पुष्टि करता है कि हमारे पवित्र पैगंबर पीबीयूएच (PBUH) का अपमान करना 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' नहीं है। हम मुसलमानों और खासकर मुस्लिम नेताओं को इस संदेश को गैर-मुस्लिम देशों के नेताओं तक पहुंचाना चाहिए ताकि इस्लामोफोबिया से मुकाबला किया जा सके।' इमरान खान एक ऐसे मुल्क में बैठकर यह बयान दे रहे हैं जहां पैगंबर का अपमान तो दूर की बात ऐसी अफवाह भी किसी की जान ले सकती है। 'चार्ली हेब्दो' मैग्जीन का दिया उदाहरणपुतिन ने अपने बयान में वेबसाइटों पर नाजियों की तस्वीरें पोस्ट करने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के काम चरमपंथ को जन्म देते हैं। पुतिन ने उदाहरण के तौर पर पेरिस में चार्ली हेब्दो मैग्जीन के संपादकीय कार्यालय पर हुए हमले का हवाला दिया जिसने पैगंबर के कार्टून प्रकाशित किए थे। 'कलात्मक स्वतंत्रता' की तारीफ करते हुए पुतिन ने कहा कि इसकी कुछ सीमाएं हैं और इसे अन्य स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग वाला देश- पाकिस्तान पाकिस्तान में ईशनिंदा पर कड़ा कानून लागू है जिसके लिए दोषी को मौत की सजा दिए जाने का भी प्रावधान है। लेकिन पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामलों में 'फैसला' ज्यादातर कोर्ट के बाहर भीड़ ही कर देती है। हाल ही में हुई श्रीलंकाई नागरिक की हत्या समेत ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें सिर्फ ईशनिंदा के शक के चलते भीड़ ने संदिग्ध की पीट-पीटकर मार दिया। पाकिस्तान में चरमपंथी हिंदू और बौद्ध मंदिरों को भी निशाना बनाते रहते हैं लेकिन उन मामलों में ईशनिंदा कानून के तहत कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।


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पेइचिंग चीन तकनीक के मामले में दुनिया के सबसे विकसित देशों में शामिल है। चीन की तकनीक और वैज्ञानिक कितने उन्नत हैं इसके कई उदाहरण हैं जिनमें से 'कृत्रिम सूर्य परियोजना' एक है। हाल ही में चीन ने अपनी इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) का इस्तेमाल किया है। चीन के हेफेई इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल साइंसेज ने एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकामक (EAST) हीटिंग सिस्टम प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। माना जा रहा है कि यह कदम कृत्रिम सूर्य को और ज्यादा टिकाऊ और गर्म बनाए रखने में मदद करेगा। अब तक चीन अपने कृत्रिम सूर्य या टोकामक के निर्माण में पैसा पानी की तरह खर्च कर चुका है। टोकामक एक इंस्टॉलेशन है जो प्लाज्मा में हाइड्रोजन आइसोटोप को उबालने के लिए उच्च तापमान का इस्तेमाल करता है। यह एनर्जी को रिलीज करने में मदद करता है। 2040 तक बिजली निर्माण चीन का मिशनरिपोर्ट के मुताबिक इसके सफल इस्तेमाल से बहुत कम ईंधन का इस्तेमाल होगा और लगभग 'शून्य' रेडियोएक्टिव कचरा पैदा होगा। इंस्टीट्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स के डेप्युटी डायरेक्टर सांत यूंताओ ने कहा कि आज से पांच साल बाद हम अपना फ्यूजन रिएक्टर बनाना शुरू करेंगे, जिसके निर्माण में और 10 साल लगेंगे। उसके बनने के बाद हम बिजली जनरेटर का निर्माण करेंगे और करीब 2040 तक बिजली पैदा करना शुरू कर देंगे। असली से 10 गुना ज्यादा गर्म चीन का नकली सूर्यइस आर्टिफिशियल सिस्टम में इस्तेमाल किया गया परमाणु संलयन पहली बार 2006 में संचालित किया गया था। इस सिस्टम ने जून 2021 में 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस पर पहुंचकर और सूर्य से 10 गुना ज्यादा गर्म होकर रेकॉर्ड बनाया था। चीन के आर्टिफिशियल सूर्य में लगे न्यूक्लियर फ्यूजन (Nuclear Fusion) रिएक्टर ने शुरू होते ही विश्व रिकॉर्ड बना दिया था। इस रिएक्टर ने 100 सेकेंड तक 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा किया था।


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लंदन दिसंबर के आखिरी हफ्ते में हर कोई जश्न मनाने का बहाना ढूंढ़ता है क्योंकि मौका होता है पहले क्रिसमस और फिर नए साल का। ब्रिटेन में भी कुछ कर्मचारियों ने क्रिसमस से पहले एक सीक्रेट पार्टी का आयोजन किया। लेकिन इस पार्टी में किसी कर्मचारी ने अपने बॉस को नहीं बुलाया। बॉस को पार्टी का पता तब चला जब वह रात को सीसीटीवी कैमरे चेक करने बैठे। दरअसल क्रिसमस पार्टी करते कर्मचारी मस्ती में कैमरे बंद करना भूल गए थे। पॉल गैलाघेर और उनका भाई बोल्टन में एक बार के मालिक हैं। रात को जब वह बार सीसीटीवी चेक करने बैठे तो हैरान हो गए। उन्होंने देखा कि बार में पार्टी चल रही है। बार के 10 कर्मचारी सांता टोपी पहनकर और शराब हाथ में पकड़े हुए क्रिसमस पार्टी कर रहे हैं जिसमें उनको नहीं बुलाया गया है। बॉस ने अपने कर्मचारियों की सीक्रेट पार्टी का भंडाफोड़ करने के लिए उनके सेलिब्रेशन की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट कर दीं। पार्टी के लिए बॉस को नहीं दिया न्यौताद सन से बात करते हुए पॉल ने कहा कि मैं अक्सर सुरक्षा के लिए चीजों पर नजर रखता हूं और सीसीटीवी चेक करता रहता हूं। उस रात जब मैंने लॉग इन किया तो देखा कि मेरे कर्मचारी सांता की टोपी पहनकर पार्टी कर रहे हैं। इस पार्टी में हम आमंत्रित नहीं थे। कर्मचारी जानते थे कि सोमवार की रात होने के चलते बार जल्दी बंद हो जाएगा इसलिए उन्होंने पार्टी करने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने एक सीक्रेट सांता और म्यूजिशियन को भी बुलाया था। स्टाफ की पार्टी को देखकर हंस पड़े बॉसपॉल ने बताया कि जब उन्हें एहसास हुआ कि वे सीसीटीवी बंद करना भूल गए हैं। तो कैमरे पर क्रिसमस कैप लगाने से पहले उन्होंने पॉल को अश्लील इशारे किए और ताना मारा। भले ही स्टाफ ने अपने बॉस को इस पार्टी में न बुलाया हो लेकिन उन्हें इसका बिल्कुल बुरा नहीं लगा। पॉल ने कहा कि मैं चाहता था कि वे ज्यादा न पिएं क्योंकि एक बड़ा हफ्ता आने वाला है। स्टाफ की पार्टी को देखकर मुझे बहुत हंसी आई।


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दुबई ड्रग्स का जाल पूरी दुनिया में फैला हुआ है, जिसे रोकने के लिए सभी देश लगातार संदिग्धों पर नजर बनाए रखते हैं। लेकिन नशीली दवाओं के तस्कर भी ड्रग्स की स्मगलिंग के लिए अजीबोगरीब तरीके ढूंढ़ निकालते हैं। ताजा मामला संयुक्त अरब अमीरात का है जहां पुलिस अधिकारियों ने 'नींबू में से ड्रग्स' बरामद किया है। गुरुवार को दुबई पुलिस ने बताया कि उन्होंने 'अरब की नागरिकता' वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग प्लास्टिक के नींबू में छिपाकर लाखों डॉलर की कैप्टागन गोलियों की यूएई में तस्करी का प्रयास कर रहे थे। कैप्टागन एक एम्फैटेमिन प्रकार का ड्रग्स है जो ज्यादातर लेबनान और संभवतः इराक और सीरिया में बनाया जाता है। इसका ज्यादातर हिस्सा तस्करी के माध्यम से सऊदी अरब में लाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब्त किए गए ड्रग्स की स्ट्रीट वैल्यू 15.8 मिलियन डॉलर (1 अरब 18 करोड़ रुपए से भी ज्यादा) है। पुलिस को सूत्रों ने इस तस्करी के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस मेजर जनरल खलील इब्राहिम अल मंसूरी ने इस बारे में जानकारी दी। रेफ्रिजेरेटेड कंटेनर के भीतर नींबू के 3,840 डिब्बेपाकिस्तान के जियो टीवी के मुताबिक कुल 1,160,500 गोलियां जब्त की गई हैं। मंसूरी ने कहा कि अवैध गोलियां 'नकली नींबू में एक रेफ्रिजेरेटेड कंटेनर के अंदर शिपमेंट में छिपी हुई थीं। गिरफ्तार किए गए चारों संदिग्ध 'एक ही अरब देश के नागरिक' हैं और यूएई के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि रेफ्रिजेरेटेड कंटेनर के भीतर नींबू के 3,840 डिब्बे थे, जिनमें से 66 डिब्बों में नकली नींबू और उनमें नशे की गोलियां थीं। ड्रग्स का स्रोत लेबनान बना अरब देशों के लिए सिरदर्द पुलिस ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें लेबनान के चिन्हों वाला एक बॉक्स दिखाई दे रहा है। लेबनान अक्सर ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में सहयोग न करने के चलते खाड़ी देशों के निशाने पर रहता है, खासकर कैप्टागन पिल्स को लेकर। अप्रैल में सऊदी अरब ने घोषणा की थी कि वह लेबनान के फलों और सब्जियों के आयात को निलंबित करेगा क्योंकि 50 लाख से अधिक कैप्टागन गोलियां फलों से बरामद की गई थीं।


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मेलबर्न / स्टॉकहोम साल का अंत होने के साथ ऑफिसों में साथियों के बीच पार्टियां, क्रिसमस लंच और नए साल के स्वागत में समारोहों का सिलसिला शुरू हो जाता है। खासकर पश्चिमी देशों में इस मौके पर युवाओं को शराब पीने का भरपूर मौका भी मिलता है। लेकिन इस सदी की शुरुआत के बाद से कुछ अप्रत्याशित हुआ है। ऑस्ट्रेलिया, यूके, नॉर्डिक देशों और उत्तरी अमेरिका में युवा अपने माता-पिता, जब वह उनकी उम्र के थे, की पीढ़ी की तुलना में औसतन काफी कम शराब पी रहे हैं। कोविड लॉकडाउन के दौरान, कुछ सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इस रूख में और भी गिरावट आई है। मेलबर्न की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के सारा जे मैक्लीन, एमी पेनी, गेब्रियल कैलुजी, शेफील्ड यूनिवर्सिटी के जॉन होम्स और स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के जुक्का टोरोनन ने इस विषय पर व्यापक रिसर्च की है। उन्होंने कहा कि हमारे शोध से पता चलता है कि इस बात की संभावना तो कम ही है कि युवाओं के शराब पीने में कटौती का यह चलन सरकारी प्रयासों के कारण आया होगा। व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और आर्थिक परिवर्तन इन गिरावटों की वजह लगते हैं। कई देशों में युवा लोगों के साथ साक्षात्कार-आधारित अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने युवाओं में शराब पीने में गिरावट के चार मुख्य कारणों की पहचान की है। ये हैं: अनिश्चितता और भविष्य के बारे में चिंता, स्वास्थ्य के बारे में चिंता, प्रौद्योगिकी और अवकाश में परिवर्तन, और माता-पिता के साथ संबंधों में बदलाव। अनिश्चित भविष्य आज विकसित देशों में युवा होना पिछली पीढ़ियों की तुलना में बहुत अलग है। जलवायु परिवर्तन से लेकर करियर की योजना बनाने और घर खरीदने में सक्षम होने तक, युवा जानते हैं कि उनका भविष्य अनिश्चित है। अकादमिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बहुत पहले से शुरू हो जाता है और मानसिक अस्वस्थता की दर बढ़ रही है। कई युवा भविष्य के बारे में उन तरीकों से सोच रहे हैं जिनके बारे में सोचने की पिछली पीढ़ियों को आवश्यकता नहीं थी। वे अपने जीवन पर नियंत्रण की भावना हासिल करने और उस भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसकी वे आकांक्षा रखते हैं। कुछ दशक पहले, नशे में होना कई युवा लोगों द्वारा वयस्कता में पहुंचने की निशानी के रूप में व्यापक रूप से माना जाता था और काम और अध्ययन की दिनचर्या से समय निकालने का एक अच्छा तरीका था। अब, युवा लोगों को कम उम्र में जिम्मेदार और स्वतंत्र होने का दबाव महसूस होता है और कुछ लोग शराब की आदत न लग जाए इस डर से कम पीते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो वह खुद पर से अपना नियंत्रण खो देंगे जो उनके भविष्य की योजनाओं को खतरे में डाल देगा। भविष्य की योजनाओं पर इस जोर का मतलब है कि युवा पार्टी और शराब पीने में कितना समय बिताना है, उसकी एक सीमा तय करके रखते हैं। युवा हैं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा लोगों के लिए स्वास्थ्य और सेहत के प्रति महत्व भी तेजी से बढ़ता प्रतीत होता है। 15-20 साल पहले के शोध में पाया गया कि उस समय के युवा लोग ज्यादा शराब पीने से होने वाले प्रभावों (उल्टी, बेहोशी) को सकारात्मक रूप से देखते थे या उसे ज्यादा महत्व नहीं देते थे। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि इस संबंध में युवाओं का रवैया बदल गया है। अब युवा शराब पीने से मानसिक स्वास्थ्य को होने वाली हानि और इसके लगातार इस्तेमाल से सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई और स्वीडिश शोध में यह भी पाया गया कि कुछ युवा शराब पीने के सामाजिक लाभों को अपने लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। हालांकि, कई युवाओं ने शराब की मध्यम खपत पर जोर दिया, जबकि 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में लोग जमकर पीते थे। क्या होगा यदि मेरे ऑफिस के अधिकारियों ने देख लिया तो? प्रौद्योगिकी ने, शराब पीने के विरोधाभासी प्रभावों के साथ, युवाओं के सामाजिकरण का स्वरूप बदल दिया है। सोशल मीडिया शराब कंपनियों को अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए (कम विनियमित) रास्ते प्रदान किए हैं। किसी पार्टी में जश्न मनाते हुए एक ड्रिंक के साथ सोशल मीडिया पर दिखना एक सामान्य बात है। फिर भी, युवा अपनी ऑनलाइन छवियों को प्रबंधित करने में भी सावधानी बरतते हैं। हमारे शोध में पाया गया कि युवा इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सोशल मीडिया (जैसे दोस्त, परिवार और भविष्य के नियोक्ता) पर उनकी तस्वीरें कौन देख सकता है, जो इस पीढ़ी के लिए अपनी तरह का नया जोखिम है। इंटरनेट युवा लोगों को संभावनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करता है, जिसमें नए दृष्टिकोण शामिल हैं जिससे वे शराब पीने की बजाय कोई बेहतर विकल्प चुन सकें। यह सामाजिक विकल्प भी प्रदान करता है जिसमें वीडियो गेम और अन्य डिजिटल मीडिया सहित शराब पीने की संभावना कम होती है। पारिवारिक रिश्ते बदलना किशोरों की परवरिश और शराब के लिए उनके परिचय को प्रबंधित करने की शैलियाँ एक पीढ़ी के दौरान अधिक विकसित हुई हैं। कई माता-पिता अपने बच्चों की नाइट आउट के दौरान निगरानी करते हैं और पिछली पीढ़ियों की तुलना में उनके पीने की अधिक बारीकी से निगरानी करते हैं, जो अधिकांश युवा लोगों के मोबाइल फोन के द्वारा संभव है। युवक भी अपने माता-पिता के साथ अब अधिक समय बिताते हैं, परस्पर संवाद पर आधारित अधिक बेहतर संबंध विकसित करते हैं जो उनके शराब पीने और विद्रोह करने की आवश्यकता को कम करते हैं। शराब पीना अब 'कूल' नहीं रहा ऐसे कई अन्य कारण भी हैं जिनकी वजह से युवा लोग शराब की खपत को सीमित करते हैं, जिसमें संस्कृति और धार्मिक जुड़ाव, स्वास्थ्य की स्थिति और व्यक्तिगत प्रेरणा शामिल हैं। कुल मिलाकर, इन परिवर्तनों का मतलब है कि बहुत से युवा अब नशे में झूमने को ‘‘कूल’’ नहीं मानते हैं और अब इसे स्वतंत्रता और वयस्कता की प्रमुख निशानी के रूप में नहीं देखते हैं। शराब का सेवन कम मात्रा में करने के साथ-साथ युवा लोगों में शराब का सेवन अधिक सामाजिक रूप से स्वीकृत हो गया है। बेशक, कुछ युवा बहुत अधिक पीना पसंद करते रहेंगे और क्रिसमस तथा नए साल की पूर्व संध्या जैसी छुट्टियों के आसपास शराब के नशे में झूमते दिखाई देंगे। लेकिन यह तो तय है कि युवा लोगों में शराब की खपत कम करते रहने का चलन अगर चलता रहा तो यह उनके अपने जीवन के व्यापक संदर्भों की वजह से है, उनकी सरकारों द्वारा लागू की गई नीतियों के कारण नहीं।


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ढाका दक्षिणी बांग्लादेश में शुक्रवार को लोगों को ले जा रही एक नौका में आग लगने से कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 200 लोग झुलस गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह आग, बारगुना जा रही नौका एमवी अभिजन-10 के इंजन कक्ष में स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को तड़के तीन बजे लगी। यह नौका ढाका से रवाना हुई थी। द ढाका ट्रिब्यून ने अपनी एक खबर में कहा कि अधिकारियों ने झलकथी में सुगंधा नदी पर जा रही नौका से जले हुए कम से कम 40 शव बरामद किए हैं। यह स्थान राजधानी ढाका से 250 किलोमीटर दक्षिण में है। खबर में नौका प्रशासन, पुलिस और दमकल कर्मियों के हवाले से बताया गया कि घटना में कम से कम 200 लोग झुलस गए हैं और स्थानीय अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है।


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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...