Friday, 1 October 2021

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लद्दाख में भारत और चीन में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना ने अपनी तैयारी को पुख्‍ता करना तेज कर दिया है। भारत ने इजरायल से 4 हेरोन मार्क-2 ड्रोन खरीदा है। भारत पहले से ही हेरोन ड्रोन का इस्‍तेमाल करता रहा है लेकिन ये 4 ड्रोन अपग्रेड वर्जन हैं और इसमें लेजर गाइडेड बम और मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। माना जा रहा है कि भारत इस ड्रोन को लद्दाख में तैनात करेगा। इजरायली ड्रोन विमान के लिए इस साल जनवरी में समझौता हुआ था लेकिन कोरोना संकट की वजह से विमान मिल नहीं पाए थे। अब अगले दो से तीन महीने में इजरायल दो हेरोन मार्क 2 ड्रोन विमान दे सकता है। दो अन्‍य ड्रोन विमान साल के अंत तक मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि कितना खतरनाक है हेरोन मार्क 2 ड्रोन विमान....

India Buys Israeli Heron Mk II Drone: भारत को जल्‍द ही इजरायल के अत्‍याधुनिक हेरोन मार्क-2 ड्रोन‍ विमान मिलने जा रहे हैं। ये ड्रोन विमान 45 घंटे तक हवा में रह सकते हैं और इन्‍हें मिसाइलों तथा लेजर गाइडेड बमों से लैस किया जा सकता है।


मिसाइलें, बम...'इजरायली ब्रह्मास्‍त्र' से बेदम होगा चीनी ड्रैगन, भारत आ रहे हेरोन ड्रोन

लद्दाख में भारत और चीन में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना ने अपनी तैयारी को पुख्‍ता करना तेज कर दिया है। भारत ने इजरायल से 4 हेरोन मार्क-2 ड्रोन खरीदा है। भारत पहले से ही हेरोन ड्रोन का इस्‍तेमाल करता रहा है लेकिन ये 4 ड्रोन अपग्रेड वर्जन हैं और इसमें लेजर गाइडेड बम और मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं। माना जा रहा है कि भारत इस ड्रोन को लद्दाख में तैनात करेगा। इजरायली ड्रोन विमान के लिए इस साल जनवरी में समझौता हुआ था लेकिन कोरोना संकट की वजह से विमान मिल नहीं पाए थे। अब अगले दो से तीन महीने में इजरायल दो हेरोन मार्क 2 ड्रोन विमान दे सकता है। दो अन्‍य ड्रोन विमान साल के अंत तक मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि कितना खतरनाक है हेरोन मार्क 2 ड्रोन विमान....



​इजरायल से भारत को मिले एक से बढ़कर ड्रोन
​इजरायल से भारत को मिले एक से बढ़कर ड्रोन

भारत और इजरायली कंपनी आईएआई के बीच पहले करीब 20 करोड़ डॉलर का लीज होना था लेकिन चीन के साथ लद्दाख में तनाव के बाद मोदी सरकार ने इन विमानों को खरीदने का फैसला किया। भारतीय वायुसेना की 'प्रॉजेक्‍ट चीता' योजना के तहत 90 हेरोन ड्रोन लिए जाने हैं। इनको लेजर गाइडेड बम, हवा से जमीन में हमला करने वाली मिसाइलें और हवा से दागी जाने वाली टैंक रोधी मिसाइलें तैनात करने की योजना है। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 180 इजरायल निर्मित यूएवी है, इसमें 108 सर्चर और 68 हेरोन 1 सर्विलांस और जासूसी ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन किसी हथियार से लैस नहीं हैं। इसके अलावा इजरायली कंपनी आईएआई ने भारत को हार्पी ड्रोन दिया है जो बेहद घातक विस्‍फोटक ले जाने में सक्षम हैं। ये ड्रोन विमान अपने लक्ष्‍य जैसे रेडार स्‍टेशन आदि के पास पहुंचते ही खुद को नष्‍ट कर लेते हैं।



​जानें कितना खतरनाक है हेरोन मार्क-2 ड्रोन
​जानें कितना खतरनाक है हेरोन मार्क-2 ड्रोन

इजरायली कंपनी आईएआई के सीईओ बोआज लेवी ने कहा कि यह दर्शाता है कि भारत हेरोन ड्रोन को लेकर बहुत संतुष्‍ट है। इजरायली मीडिया के मुताबिक हेरोन मार्क-2 ड्रोन दुनिया की सबसे उन्‍नत तकनीक से लैस है। यह एक रणनीतिक और कई तरह के मिशन को अंजाम देने में सक्षम ड्रोन है। यही नहीं अपने साथ ये विमान कई तरह के पेलोड ले जाने में सक्षम हैं। इस ड्रोन विमान में रोटेक्‍स 915 आईएस इंजन लगे हैं जो इसे 10 हजार मीटर की ऊंचाई पर ले जाने में मदद करते हैं। इसकी अधिकतम स्‍पीड 140 नॉट्स प्रतिघंटे है। यह विमान 45 घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है। हेरोन मार्क-2 विमान पहले बनाए गए हेरोन यूएवी का अपडेटेड मॉडल है। हेरोन यूएवी का इस्‍तेमाल इजरायली एयरफोर्स समेत दुनिया के 20 संगठन करते हैं। अब इसके सेंसर को बड़ा किया गया है और सुधारा गया है जिससे यह बेहद खतरनाक हो गया है। इससे अब भारत बिना सीमा रेखा पार किए अपने दुश्‍मन के ठिकानों की काफी दूरी से ही टोह ले सकेगा।



​समुद्र में पनडुब्‍ब‍ियों का पता लगाने में सक्षम
​समुद्र में पनडुब्‍ब‍ियों का पता लगाने में सक्षम

हेरोन मार्क-2 ड्रोन विमान में एक सर्वर लगा हुआ है जिससे यह अपने अंदर बड़ी मात्रा में डेटा को इकट्ठा कर सकता है। इसका टेकऑफ के समय अधिकतम वजन 1,350 किलोग्राम है। इसकी गति भी पहले के मुकाबले बेहतर हो गई है। हेरोन मार्क-2 ड्रोन को काफी चौड़ा और मजबूत बॉडी बनाया गया है। इससे यह इतना मजबूत हो गया है कि आसानी से पनडुब्‍बी की टोह लेने वाले सोनोबओय मॉनिटरिंग सिस्‍टम को ले जा सकता है। साथ ही यह पानी के अंदर भी लक्ष्‍य का पता लगा सकता है। हेरोन मार्क-2 ड्रोन विमान लंबी दूरी तक आसानी से नजर रख सकता है। इस ड्रोन के सिस्‍टम को दूर बैठकर ही सैटलाइट की मदद से बंद किया जा सकता है और उसे फिर से स्‍टार्ट किया जा सकता है। इजरायली ड्रोन विमान को भारत के अलावा कनाडा, चिली, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, मेक्सिको, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया इस्‍तेमाल करते हैं।





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लंदन ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने डायनासोर की एक नई प्रजाति की खोज की है जिसके शरीर पर बेहद अजीबोगरीब कांटे मौजूद थे। जीवाश्म खोजकर्ताओं ने डायनासोर के सबसे पुरानी और बेहद 'अलग' समूह के अवशेषों की खोज की है। इस समूह को 'Ankylosaur' के नाम से जाना जाता था और यह मोरक्को की साइट पर की गई अपनी तरह की पहली खोज है। यह Spicomellus Afer प्रजाति से संबंधित है जिसे अपने असामान्य Bone Armour (अस्थि कवच) के लिए जाना जाता था। 16 करोड़ 80 लाख साल पुराने जीवाश्मNature Ecology and Evolution में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि 160 मिलियन साल पहले इस डायनासोर में खास तरह की नुकीली हड्डियां पाई जाती थीं। इस तरह की हड्डियां अब तक किसी भी हड्डी वाली प्रजाति में नहीं देखी गई हैं। लंदन के National History Museum के रिसर्चर्स ने अवशेषों के छोटे हिस्सों को जोड़कर जीवाश्मों का अध्ययन किया। जांच में पता चला कि ये जीवाश्म करीब 168 मिलियन साल पुराने हैं। पसलियों से जुड़ी थीं कांटेदार हड्डियांद गार्जियन से बात करते हुए जीवाश्म विज्ञानी Dr Susannah Maidment ने कहा कि यह बेहद, बेहद अजीब था। उन्होंने कहा कि आमतौर पर जब हम डायनासोर में अस्थि कवच को देखते हैं तो वह उनके खाल से जुड़ा होता है न कि उनके ढांचे से। लेकिन इस मामले में यह कवच न सिर्फ ढांचे बल्कि यह पसलियों से भी जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों ने दावा किया कि कवच के जीवाश्म उत्तरी महाद्वीपों पर व्यापक रूप से खोजे गए हैं। कैसे हुआ डायनासोर का अंत?कभी धरती पर राज करने वाले विशालकाय डायनासोर कैसे खत्‍म हो गए, इसका जवाब अभी तक कोई ठीक-ठीक नहीं दे सका है। एक शोध में कहा गया था कि 6.6 करोड़ साल पहले उत्‍तरी अमेरिका में धरती से एक विशाल ऐस्‍टरॉइड टकराया था जिससे समुद्र के अंदर एक मील या करीब 1600 मीटर तक ऊंची सुनामी उठी थी। इस सुनामी की चपेट में आकर डायनासोर इस धरती से सदा के लिए खत्‍म हो गए।


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इस्लामाबादपाकिस्तान की कंगाली अब खुलकर सामने आ रही है। सरकार अब पैसे जुटाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने देश के पहले भांग के खेत का उद्घाटन किया है। इस मौके पर उन्होंने विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय और खासकर पाकिस्तान काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (PCSIR) को सम्मानित किया। करोड़ों डॉलर कमाने का सपनाभांग एक मादक पदार्थ होता है लेकिन दुनिया में कई जगह इसका इस्तेमाल मेडिकल रूप में भी किया जाता है। पाकिस्तान सरकार भांग की खेती को बढ़ावा देना चाहती है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे बेचकर मोटी कमाई की जा सके। ट्विटर पर फवाद चौधरी ने कहा कि इस परियोजना को आगे बढ़ते देखना बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान करोड़ों डॉलर के भांग उद्योग में अहम भागीदार बनने जा रहा है। हर पाकिस्तान के ऊपर लाखों का कर्जअगस्त में खबर आई कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 2.75 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया। भारतीय रुपए में कर्ज की यह राशि 20 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा बैठती है। पहले से ही हर पाकिस्तानी नागरिक के ऊपर 1 लाख 75 हजार रुपये का कर्ज चढ़ा हुआ है। ऐसे में नए-नए कर्ज लेकर इमरान खान देश का बेड़ा गर्क करने की राह पर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इमरान खान के आने से बुरे हुए हालातपाकिस्‍तान यह कर्ज ऐसे समय पर ले रहा है जब पिछले साल पाकिस्तान की संसद में इमरान खान सरकार ने कबूल किया है कि अब हर पाकिस्तानी के ऊपर अब 1 लाख 75 हजार रुपये का कर्ज है। कर्ज का यह बोझ पाकिस्तानियों के ऊपर पिछले दो साल में बढ़ा है। यानी जब इमरान ने पाकिस्तान की सत्ता संभाली थी तब देश के हर नागरिक के ऊपर 120099 रुपये का कर्ज था।


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वॉशिंगटन हिटलर की सेना ने दिसंबर 1944 में बेल्जियम और लक्जमबर्ग में अपना आखिरी हमला बोला था। इसके बाद अमेरिकी बॉम्बर पायलटों को जर्मनी के आसमान में एक भयानक नजारा दिखाई दिया। मीडिया रिपोर्ट्स ने इस दृश्य को 'Nazi Super Weapon' कहा। अमेरिकी वायुसेना के पायलटों ने बताया कि जर्मनी के ऊपर आसमान में उन्होंने सिल्वर रंग की एक गोल आकृति को देखा था। यह आकृति एक या कई हिस्सों से मिलकर बनी हुई थी और धुंधली नजर आती थी। रडार ऑपरेटर ने कहा- फू फाइटर्सइन रहस्यमयी आकृतियों को 'Foo Fighters' कहा गया। पहली बार यह नाम Donald J. Meiers ने दिया था। डोनाल्ड 415th Night Fighter Squadron में एक रडार ऑपरेटर थे। 415th की आधिकारिक वॉर डायरी के एक भाग में इसका खुलासा किया गया है कि पायलटों को ऐसा क्यों लगता है कि 'Foo Fighters' का नियंत्रण किसी इंटेलिजेंस के हाथ में था। युद्ध की डायरी से खुला राजडायरी में लिखा है, 'जर्मनी के Rastatt क्षेत्र में लाल और हरे रंग की छह रौशनियों को देखा गया जिनका आकार T जैसा था। इन आकृतियों ने विमानों का पीछा किया और 1000 फीट तक पास आ गईं। रौशनी ने कई मील तक पीछा किया और फिर गायब हो गई।' दूसरी जगह लिखा है, 'बीती रात हवा में और ज्यादा फू फाइटर्स मौजूद रहे। संचालन रिपोर्ट कहती है कि Hagenau के आसपास के क्षेत्र में दो रौशनियां देखी गईं जो जमीन से हमारे विमानों की ओर आ रही थीं।' जर्मनी के पास थे एक से एक हथियारनाजियों ने युद्ध में क्रूज मिसाइल V1 और बैलिस्टिक मिसाइल V2 का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा हिटलर की सेना में ऑपरेशनल जेल और रॉकेट से लैस फाइटर्स भी शामिल थे। इसलिए अमेरिका और सहयोगी देशों के कमांडर यह मानते हैं कि जर्मनी के अंदर वैज्ञानिक नए तरह के कुछ अजीबोगरीब हथियार विकसित कर सकते थे। कुछ अमेरिकी बॉम्बर्स के अनुसार जर्मनी पर हमले के दौरान 'फू फाइटर्स' ने उनके विमानों को नुकसान पहुंचाया था। एलियंस से हो सकता था संबंध!हालांकि युद्ध के बाद पता चला कि जर्मन और जापान पायलट भी इस रहस्यमयी घटना से परेशान थे। Pacific theatre में 'फू फाइटर्स' कथित तौर पर 'एक बड़ा आग का गोला' था। जनवरी 1945 के बाद फू फाइटर्स के देखे जाने की खबरें फीकी पड़ गईं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर 'UFO' शब्द 1943-45 के दौरान लोकप्रिय होता तो इस घटना को एलियंस से जोड़ दिया जाता।


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टोक्‍यो चीनी ड्रैगन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत और जापान की वायुसेना एकसाथ युद्धाभ्‍यास करने जा रही हैं। इस अहम युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लेने के लिए भारत अपने अत्‍याधुनिक सुखोई-30 फाइटर जेट भेजने जा रहा है। दोनों वायुसेनाओं के बीच यह अभ्‍यास पहले वर्ष 2020 में होना था लेकिन उसे कोरोना वायरस के कारण स्‍थगित कर दिया गया था। यह अभ्‍यास ऐसे समय पर हो रहा है जब पूर्वी चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ क्रमश: जापान और भारत का तनाव काफी बढ़ा हुआ है। जापानी अखबार सानकेई शिमबून ने बताया कि चीन के खतरे को देखते हुए इस साल के आख‍िर तक यह भारतीय-जापानी अभ्‍यास हो सकता है। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमान, अमेरिका के एफ-15 और ब्रिटिश टाइफून फाइटर जेट आपस में अभ्‍यास कर चुके हैं। हालांकि जापानी वायुसेना के फाइटर पायलट के साथ रूसी मूल के विमान के साथ मुकाबला दुर्लभ माना जा रहा है। जापानी वायुसेना अमेरिका निर्मित एफ-15, एफ-2 और हाल ही में मिले दुनिया के सबसे आधुनिक विमान एफ-35 का इस्‍तेमाल करती है। 'सुखोई-30 विमानों के साथ अभ्‍यास का महत्‍व काफी अधिक' जापान की वायुसेना न केवल चीन के सुखोई-30 विमानों बल्कि रूसी सुखोई-30 विमानों का अक्‍सर सामना करती रहती है। जापान का रूस के साथ क्षेत्रीय विवाद चल रहा है। चीन और रूस दोनों ही सुखोई सीरिज के कई विमानों का इस्‍तेमाल करते हैं। इस अभ्‍यास से जापानी वायुसेना सुखोई जेट के खिलाफ जंग के गुर सीख सकती है। जापान के कनागवा यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ कोरे वॉलेस ने कहा, 'जापान का भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमानों के साथ अभ्‍यास का महत्‍व काफी अधिक हो सकता है।' वॉलेस ने कहा कि इस अभ्‍यास से जापानी पायलट सुखोई-30 की हवाई कौशल, रेंज, ईंधन की खपत और मेंटेंनेंस आदि के बारे में जानकारी मिल सकती है। यह युद्ध के दौरान रणनीति बनाने में काफी कारगर हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि भारत के सुखोई कई खास क्षमता से लैस हैं जिनके बारे में भी जापानी सेना को जानकारी मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस अभ्‍यास का मकसद चीन को सख्‍त संदेश देना है जो भारत और जापान दोनों के लिए खतरा बना हुआ है। स्‍टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ अर्जान तारापोरे कहते हैं कि भारत अच्‍छी तरह से जानता है कि चीन के खिलाफ फायदे की सबसे अच्‍छी स्थिति यह है कि वह जापान जैसे एक समान सोच वाले देश के साथ गठजोड़ करे। उन्‍होंने कहा कि गठजोड़ का निर्माण चीन को सबसे ज्‍यादा डराता है। इस अभ्‍यास की योजना उस समय बनी थी जब दिसंबर 2018 में जापान ने अपने सी-2 ट्रांसपोर्ट विमान को आगरा भेजा था। भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान के साथ जापानी विमान ने अभ्‍यास किया था। रूस के नाराज होने का खतरा मंडराने लगा जापान और भारतीय वायुसेना के बीच इस अभ्‍यास से रूस के नाराज होने का खतरा मंडराने लगा है। रूस का जापान साथ सीमा विवाद चल रहा है। हाल ही में रूस ने अपने एक विमान को जापानी क्षेत्र में भेज दिया था। यही नहीं दोनों ही देशों ने सीमा विवाद को लेकर एक दूसरे के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध भी जताया था। दरअसल, कुरील द्वीप को लेकर जापान और रूस के बीच विवाद है। रूसी सरकार इस विवादित इलाके में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। इससे जापान भड़का हुआ है। वहीं भारतीय सुखोई-30‍ विमानों को रूस ने बनाया है और उसकी जानकारी जापानी वायुसेना को भी मिल जाएगी। ऐसे में इस अभ्‍यास पर रूस की प्रतिक्रिया का इंतजार सभी को रहेगा।


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कैलिफोर्निया एलियंस पर अध्ययन करने वाले दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक का मानना है कि अगर कभी यूएफओ ने हमारी धरती पर हमला कर दिया तो हम तबाह हो जाएंगे। Seth Shostak ने कहा कि अगर कभी ऐसा होता है तो यह पूरी दुनिया के लिए संकट पैदा कर देगा। और इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार होंगे जो आज इस 'आशंका' को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अब तक एलियंस को लेकर कई तरह के दावे किए जा चुके हैं लेकिन किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। अगर युद्ध हुआ तो हमारी हार निश्चितSETI इंस्टीट्यूट में खगोल विज्ञानी ने डेलीस्टार से बात करते हुए कहा, 'अगर एलियंस धरती पर आए और हमला किया तो हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे।' वैज्ञानिक को उम्मीद है कि एक दिन वह अंतरिक्ष में दूर किसी कोने में स्थित किसी अज्ञात सभ्यता से संपर्क स्थापित कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युद्ध हुआ तो हमारी हार निश्चित है। कैलिफोर्निया के सिलिकन वैली में स्थित SETI इंस्टीट्यूट एलियंस पर रिसर्च के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा 'आशंका'Seth इस संस्थान में वरिष्ठ खगोल विज्ञानी हैं और वह एलियंस को लेकर लंबे समय से जारी रिसर्च का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी दिन एलियंस से संपर्क हुआ तो यह बहुत बड़ी खबर होगी। अन्य लोग भी इसके लिए प्रयास करेंगे और यह खोज विज्ञान को बदल देगी। लेकिन अगर एक भी एलियन धरती पर आता है तो यह पूरी दुनिया के लिए बुरी खबर होगी क्योंकि संयुक्त राष्ट्र से लेकर देशों की सरकारें कोई भी इस 'आशंका' को गंभीरता से नहीं ले रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाए यूएनउन्होंने कहा कि वह अपने संस्थान के साथियों के साथ लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र का पक्ष जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी कोशिश दूसरी सभ्यता से पहली मुलाकात के लिए तैयारी के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल की स्थापना है। अपनी बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अगर दूसरी दुनिया के प्राणी धरती पर आते हैं तो हम बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं होंगे। हालांकि आज तक एलियंस की मौजूदगी को लेकर किसी को कोई भी सबूत नहीं मिला है।


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Thursday, 30 September 2021

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लिस्बन अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद कई लोग अपना घर और जमीन छोड़ने के लिए मजबूर हुए। अफगान राष्ट्रीय महिला युवा फुटबॉल टीम की खिलाड़ी भी उनमें से एक हैं। 15 साल की फुटबॉल खिलाड़ी सारा कहती हैं कि अपने घर अफगानिस्तान को छोड़ना दर्दनाक था। लेकिन अब वह पुर्तगाल में हैं और सुरक्षित हैं। भविष्य में वह प्रफेश्नल फुटबॉल प्लेयर बनना चाहती हैं। उनका सपना अपने पसंदीदा खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) से मिलने का है। घर लौटूंगी लेकिन आजादी मिली तोपुर्तगाल ने इन खिलाड़ियों को शरण दी है। अपनी मां और साथी खिलाड़ियों के साथ लिस्बन में घूमते हुए सारा कहती हैं कि अब वह आजाद हैं। उन्होंने कहा, 'मैं रोनाल्डो की तरह फुलबॉल प्लेयर और पुर्तगाल की एक बड़ी महिला व्यवसायी बनना चाहती हूं।' सारा को उम्मीद है कि वह एक दिन घर वापस लौट पाएंगी लेकिन इसके लिए 'आजादी' उनकी शर्त है। सारा की मां ने रॉयटर्स ने उनका सरनेम इस्तेमाल न करने की विनती की। तालिबान ने लगाई खेल पर रोकसारा की मां ने तालिबान का पिछला शासन देखा है। उनकी मां को इस बात की कम उम्मीदें हैं कि अब वे कभी अफगानिस्तान लौट पाएंगी। सत्ता पर कब्जा करने से पहले तालिबान ने महिलाओं को उनके अधिकार देने का वादा किया था। लेकिन गुरुवार को खबर आई कि तालिबान ने काबुल यूनिवर्सिटी को बंद कर दिया है और महिला छात्रों व टीचरों को घर वापस भेज दिया। काबुल पर कब्जे के बाद एक वरिष्ठ तालिबानी नेता ने कहा था कि महिलाओं को खेलने की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि यह 'गैर-जरूरी' है और इससे उनके शरीर का 'प्रदर्शन' होता है। खेलना जारी रहे इसलिए छोड़ा देशअफगानिस्तान की महिला सीनियर नेशनल टीम की कैप्टन Farkhunda Muhtaj ने कहा कि हम निकासी अभियान में इसलिए शामिल हुए ताकि महिलाएं अपनी पसंद के खेल को खेलना जारी रख सकें। तालिबान के पिछले शासन के दौरान महिलाओं की शिक्षा पर रोक लगा दी गई थी। उनके लिए एक ड्रेसकोड को अनिवार्य कर दिया गया था और पुरुष साथी के बिना घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी।


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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...